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'यह केवल भारत की नहीं, हम सबकी लड़ाई है': ग्रेटा ने CJP के नेतृत्व वाले आंदोलन को दिया समर्थन; क्या-क्या कहा?

Mon, 27 Jul 2026 01:31 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 27 Jul 2026 01:31 PM IST
सार

जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारतीय छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे 'जनता की ताकत' का उदाहरण बताया। लंदन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि छात्रों की न्याय और लोकतंत्र की लड़ाई पूरी दुनिया की साझा लड़ाई है। पढ़िए रिपोर्ट-

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climate activist greta thunberg supports indian student protest led by cjp
ग्रेटा थनबर्ग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने रविवार को शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने जनता की ताकत का असली मतलब बताया है।
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ग्रेटा लंदन में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहीं थीं। उन्होंने कहा कि छात्रों की न्याय की लड़ाई और लोकतंत्र व आजादी के लिए चल रहा व्यापक संघर्ष पूरी दुनिया की साझा लड़ाई है।
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उन्होंने कहा, भारतीय छात्र आंदोलन ने हम सभी को गर्व महसूस कराया है। इसने हमें उम्मीद दी है। इस आंदोलन ने दिखाया है कि जब लोग एकजुट होकर विरोध करते हैं तो वे क्या हासिल कर सकते हैं। इसने जनता की ताकत का असली मतलब बताया है। 
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ग्रेटा ने कहा कि भारतीय छात्रों की न्याय की लड़ाई और लोकतंत्र व आजादी का संघर्ष दुनिया भर के लोगों का भी संघर्ष है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को भारत के समर्थन में एकजुट होकर साथ खड़ा होना चाहिए।

एसएफआई ने क्या कहा?
एसएफआई यूके ने सप्ताहांत में इस कार्यक्रम का आयोजन किया। संगठन ने इसे छात्र आंदोलन की जीत का जश्न बताया। एसएफआई यूके ने एक बयान में कहा, हम छात्र आंदोलन के संघर्ष और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पहुंचाने वाली इसकी सफलता को सलाम करते हैं। संगठन ने कहा, यह लड़ाई बहुत प्रेरणादायक और साहसिक रही है। लेकिन अभी खत्म नहीं हुई है। 

संगठन ने कहा कि नीट मामले से जुड़े घटनाक्रम में जान गंवाने वाले 21 छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दुख अब भी बना हुआ है।

आंदोलन कैसे खत्म हुआ?
यह घटनाक्रम कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 36 दिन लंबे आंदोलन के बाद सामने आया। इस आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 20 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद और तेज हो गया।


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इसके बाद कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आंदोलन का समर्थन किया। इनमें सोनम वांगचुक भी शामिल थे, जिन्होंने आंदोलन के समर्थन में लंबा अनशन किया था।

सीजेपी ने शनिवार को घोषणा की कि वह अपना 36 दिन पुराना आंदोलन खत्म कर रही है। पार्टी ने कहा कि केंद्र सरकार ने उसकी बची हुई मांगें मान ली हैं। इन मांगों में नीट पेपर लीक के बाद कथित रूप से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना शामिल है।
 
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