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US-Iran Tensions: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- बातचीत चाहता था ईरान, हम तैयार; लेकिन अब युद्धविराम खत्म

Fri, 10 Jul 2026 08:34 PM IST
राकेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 10 Jul 2026 08:34 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के बीच का युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। ट्रंप ने और क्या-क्या कहा? जानिए..
 

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donald trump claims iran wants talks says ceasefire is over
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई थी और हम इसके लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। 
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ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने हमसे बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है। हम इसके लिए सहमत हैं, लेकिन हमने उन्हें साफ शब्दों में बता दिया है कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। ट्रंप ने इस पोस्ट पर अपने हस्ताक्षर भी किए।
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जंग से इस्राइल को दूर रखना चाहते हैं ट्रंप: रिपोर्ट
वहीं,  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान पर होने वाले अमेरिकी हमलों में इस्राइल को शामिल नहीं करना चाहता है। सीएनएन ने दो इस्राइली सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका को डर है कि अगर इस जंग में इस्राइल सीधे तौर पर कूदता है, तो पूरे क्षेत्र में महायुद्ध छिड़ सकता है। दरअसल, पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और तेहरान के बीच सैन्य टकराव बेहद चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमला करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान पर कई एयरस्ट्राइक की थीं। 
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अकेले हमला करने के लिए हम पूरी तरह तैयार: इस्राइल काट्ज
इस भड़कती आग के बीच सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन इस्राइल को इस सीधे सैन्य एक्शन से हर हाल में दूर रख रहा है। सूत्रों ने बताया कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद इन अमेरिकी हमलों में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इसके पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं क्योंकि वे ईरान के साथ किसी पूर्ण पैमाने के युद्ध में नहीं उलझना चाहते।

दूसरी तरफ इस्राइल के रक्षामंत्री इस्राइल काट्ज ने कहा है कि उनकी सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी बाहरी मदद के बिना ईरान पर अकेले हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, तुर्किये में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि वे बड़े सैन्य हमले के बजाय ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जैसे कदम उठा सकते हैं। ट्रंप ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने फिर कोई हिमाकत की, तो अमेरिका 10 गुना ज्यादा ताकत से पलटवार करेगा।

शांति की बात करते-करते क्यों बढ़ा तनाव? 
अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव अचानक नहीं बढ़ा है। पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम युद्धविराम समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों देशों को शांति बनाए रखनी थी और ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले रोकने थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों में ईरान ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर फिर से बमबारी कर दी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे समझौते का उल्लंघन माना और इसे युद्धविराम खत्म होने का संकेत कहा।

यह भी पढ़ेंमिसाइल से बचे पर नहीं बची नौकरी: होर्मुज में तैनात नाविकों ने शिपिंग कंपनी पर ठोका मुकदमा, क्या है पूरा केस?


ईरान के कई ठिकानों पर बमबारी
इस उकसावे के जवाब में अमेरिकी सेना ने पिछले दो दिनों में ईरान पर बहुत बड़े हवाई हमले किए हैं। अमेरिका ने ईरान के 170 से ज्यादा सैन्य ठिकानों, मिसाइल भंडारों और बुशहर परमाणु संयंत्र के पास के इलाकों को निशाना बनाया। इन हमलों में ईरान के 14 सैनिकों की मौत हो गई और कई घायल हुए। 

ईरान ने खाड़ी देशों को बनाया निशाना
खुद पर हुए हमलों से भड़ककर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उसने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में बने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर दर्जनों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका हमला करेगा, तो उसे भी जवाबी कार्रवाई झेलनी होगी। इस बदले की भावना और दोनों तरफ से लगातार हो रहे हमलों के कारण दोनों देशों के बीच शांति का समझौता पूरी तरह टूट चुका है और अब पश्चिम एशिया में एक बड़े युद्ध की नौबत आ गई है। हालांकि, ट्रंप के इस बयान ने इशारा किया है कि बातचीत की गुंजाइश बची है। 
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