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What Is Mission Arctic Sentry: ट्रंप ग्रीनलैंड हथियाने पर अड़े, आर्कटिक सेंट्री मिशन के तहत NATO क्या करेगा?
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: लव गौर
Updated Mon, 12 Jan 2026 10:13 AM IST
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सार
US-Greenland: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका आक्रामक बयानबाजी कर रहा है। ट्रंप कई दफा अपनी मंशा बता चुके हैं। इस बीच एक बार फिर उन्होंने दो टूक बयान देते हुए दोहराया है कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं करेगा तो रूस या चीन वहां कब्जा कर सकते हैं। ऐसे में ट्रंप को रोकने के लिए क्या कुछ प्लान तैयार किया जा रहा है। जानिए...
अमेरिका का ग्रीनलैंड को लेकर घमासान जारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मंशा जगजाहिर कर चुके हैं। वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को लेकर धमकी भरे लहजे में बयानबाजी कर रहे हैं। इस बीच एक बार फिर ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि वह ऐसा होने नहीं देंगे और 'किसी भी तरह' ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बनेगा। ट्रंप ने दो टूक बयान देते हुए कहा कि हम ग्रीनलैंड को किसी भी कीमत पर हासिल करेंगे। साथ ही उन्होंने नाटो को भी निशाने पर लिया है।
अब ग्रीनलैंड पर क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने अब कहा कि अगर हम ग्रीनलैंड नहीं लेते हैं, तो रूस या चीन ग्रीनलैंड ले लेंगे। और मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। मुझे उनके (ग्रीनलैंड के साथ) एक डील करना पसंद आएगा। यह आसान है। लेकिन किसी भी तरह से, हम ग्रीनलैंड लेने वाले हैं।
ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है, जहां प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य और भू-राजनीतिक संतुलन भी जुड़ा हुआ है। इसी के साथ ट्रंप ने नाटो (NATO) को लेकर भी अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी।
'मैं राष्ट्रपति नहीं होता, तो शायद आज नाटो...'
नाटो पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि नाटो को बचाने वाले वही हैं। उन्होंने कहा कि मैंने सदस्य देशों को उनके रक्षा बजट पर खर्च करने के लिए मजबूर किया। पहले वे जीडीपी का सिर्फ 2 प्रतिशत भी नहीं देते थे, अब वे 5 प्रतिशत तक भुगतान कर रहे हैं। अगर मैं राष्ट्रपति नहीं होता, तो शायद आज नाटो ही नहीं होता।' ट्रंप ने यह भी सवाल उठाया कि जरूरत पड़ने पर क्या नाटो देश अमेरिका के साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नाटो पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन बदले में भरोसे की कोई गारंटी नहीं है। साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अगर अमेरिका नाटो से बाहर निकलता है, तो इससे नाटो को आर्थिक नुकसान होगा।
नाटो को भी दिखाया ट्रंप ने आईना
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मैंने ही उन्हें जीडीपी का 5.5% हिस्सा देने के लिए राजी किया। पहले यह 2 फीसदी था, और वे नहीं देते थे। अब वे 5 प्रतिशत दे रहे हैं। नाटो को बचाने वाला मैं ही हूं। अगर मैं राष्ट्रपति नहीं होता तो नाटो होता ही नहीं। हो सकता है नाटो नाराज हो जाए अगर मैं ऐसा करूं (अगर मैं अमेरिका को नाटो से बाहर निकाल लूं)। हो सकता है नाटो से बहुत सारा पैसा बच जाए। मुझे नाटो पसंद है। मैं बस सोचता हूं कि अगर हमें नाटो की जरूरत पड़ी, तो क्या वे हमारे लिए मौजूद रहेंगे? मुझे यकीन नहीं है कि वे होंगे। हमने नाटो पर बहुत पैसा खर्च किया है।'
क्या है मिशन आर्कटिक सेंट्री? ट्रंप को रोकने का प्लान
खबरों की मानें तो ट्रंप को रोकने के लिए 31 देश मिलकर एक गोपनीय मिशन चला रहे हैं, जिसे 'आर्कटिक सेंट्री' नाम दिया गया। इस मिशन का सीधा मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ती महत्वाकांक्षा को रोकना है। इसी के साथ ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने भी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी अगुवाई ब्रिटेन और जर्मनी कर रहे हैं। जिसका साफतौर पर यह संदेश देना है कि यूरोप और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन यानी नाटो आर्कटिक सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है।
ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले रिपोर्ट में दावा किया कि जर्मनी आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त नाटो मिशन तैयार कर रहा है। , जिसका नाम 'आर्कटिक सेंट्री' है, जो कि नौ देशों से घिरा बाल्टिक सागर के लिए किए गए बाल्टिक सेंट्री मिशन की तरह होगा।
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अब ग्रीनलैंड पर क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने अब कहा कि अगर हम ग्रीनलैंड नहीं लेते हैं, तो रूस या चीन ग्रीनलैंड ले लेंगे। और मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। मुझे उनके (ग्रीनलैंड के साथ) एक डील करना पसंद आएगा। यह आसान है। लेकिन किसी भी तरह से, हम ग्रीनलैंड लेने वाले हैं।
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#WATCH | On Greenland, US President Donald Trump says, "If we don't take Greenland, Russia or China will take Greenland. And I am not going let that happen. I'd love to make a deal with them (Greenland). It's easier. But one way or the other, we're gonna have Greenland..."… pic.twitter.com/7OlM7i9ueh
— ANI (@ANI) January 12, 2026
ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र माना जाता है, जहां प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य और भू-राजनीतिक संतुलन भी जुड़ा हुआ है। इसी के साथ ट्रंप ने नाटो (NATO) को लेकर भी अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी।
'मैं राष्ट्रपति नहीं होता, तो शायद आज नाटो...'
नाटो पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि नाटो को बचाने वाले वही हैं। उन्होंने कहा कि मैंने सदस्य देशों को उनके रक्षा बजट पर खर्च करने के लिए मजबूर किया। पहले वे जीडीपी का सिर्फ 2 प्रतिशत भी नहीं देते थे, अब वे 5 प्रतिशत तक भुगतान कर रहे हैं। अगर मैं राष्ट्रपति नहीं होता, तो शायद आज नाटो ही नहीं होता।' ट्रंप ने यह भी सवाल उठाया कि जरूरत पड़ने पर क्या नाटो देश अमेरिका के साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नाटो पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन बदले में भरोसे की कोई गारंटी नहीं है। साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अगर अमेरिका नाटो से बाहर निकलता है, तो इससे नाटो को आर्थिक नुकसान होगा।
नाटो को भी दिखाया ट्रंप ने आईना
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मैंने ही उन्हें जीडीपी का 5.5% हिस्सा देने के लिए राजी किया। पहले यह 2 फीसदी था, और वे नहीं देते थे। अब वे 5 प्रतिशत दे रहे हैं। नाटो को बचाने वाला मैं ही हूं। अगर मैं राष्ट्रपति नहीं होता तो नाटो होता ही नहीं। हो सकता है नाटो नाराज हो जाए अगर मैं ऐसा करूं (अगर मैं अमेरिका को नाटो से बाहर निकाल लूं)। हो सकता है नाटो से बहुत सारा पैसा बच जाए। मुझे नाटो पसंद है। मैं बस सोचता हूं कि अगर हमें नाटो की जरूरत पड़ी, तो क्या वे हमारे लिए मौजूद रहेंगे? मुझे यकीन नहीं है कि वे होंगे। हमने नाटो पर बहुत पैसा खर्च किया है।'
क्या है मिशन आर्कटिक सेंट्री? ट्रंप को रोकने का प्लान
खबरों की मानें तो ट्रंप को रोकने के लिए 31 देश मिलकर एक गोपनीय मिशन चला रहे हैं, जिसे 'आर्कटिक सेंट्री' नाम दिया गया। इस मिशन का सीधा मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ती महत्वाकांक्षा को रोकना है। इसी के साथ ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने भी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी अगुवाई ब्रिटेन और जर्मनी कर रहे हैं। जिसका साफतौर पर यह संदेश देना है कि यूरोप और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन यानी नाटो आर्कटिक सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है।
ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले रिपोर्ट में दावा किया कि जर्मनी आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त नाटो मिशन तैयार कर रहा है। , जिसका नाम 'आर्कटिक सेंट्री' है, जो कि नौ देशों से घिरा बाल्टिक सागर के लिए किए गए बाल्टिक सेंट्री मिशन की तरह होगा।
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