{"_id":"6a60f1181df19145600e8c88","slug":"europe-heatwave-france-records-5700-excess-deaths-9-million-tonnes-grain-loss-2026-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूरोप में हीटवेव का कहर: फ्रांस में भीषण गर्मी से जून में बढ़ा मौतों का आंकड़ा; 2.2 खरब रुपयों की फसल बर्बाद","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
यूरोप में हीटवेव का कहर: फ्रांस में भीषण गर्मी से जून में बढ़ा मौतों का आंकड़ा; 2.2 खरब रुपयों की फसल बर्बाद
Wed, 22 Jul 2026 10:04 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, पेरिस/ब्रसेल्स
पीटीआई, पेरिस/ब्रसेल्स
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 22 Jul 2026 10:04 PM IST
सार
यूरोप में जून की भीषण गर्मी ने जनजीवन और कृषि, दोनों पर गंभीर असर डाला है। फ्रांस में गर्मी की लहर के दौरान सामान्य से हजारों अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई, जबकि पूरे महाद्वीप में लाखों टन अनाज की फसल प्रभावित होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे किसानों की आय घटेगी और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ेगा। सबसे अधिक नुकसान फ्रांस, हंगरी और स्पेन में होने की आशंका है।
विज्ञापन
यूरोपीय देशों में भीषण गर्मी का कहर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/IANS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फ्रांस में पिछले महीने पड़ी ऐतिहासिक गर्मी की लहर के दौरान सामान्य से कम से कम 5,700 अधिक लोगों की मौत हुई। देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि रिकॉर्ड तोड़ तापमान के कारण मौतों की आशंका पहले के अनुमान से कहीं अधिक रही। पब्लिक हेल्थ फ्रांस के अनुसार, 17 जून से 2 जुलाई के बीच भीषण गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में सभी कारणों से कुल 21,674 लोगों की मौत दर्ज की गई।
एजेंसी ने कहा कि अगर इस अवधि में गर्मी की लहर नहीं होती, तो पिछले वर्षों के आंकड़ों पर आधारित सांख्यिकीय आकलन के अनुसार इन्हीं क्षेत्रों में लगभग 15,910 लोगों की मौत होने की संभावना थी। इस प्रकार अनुमानित और वास्तविक मौतों के बीच 5,764 का अंतर दर्ज किया गया, जिसे एजेंसी ने भीषण गर्मी के दौरान हुई "अतिरिक्त मौतें" बताया है।
90 लाख टन अनाज की फसल बर्बाद
जून में यूरोप में पड़ी भीषण गर्मी की लहर से महाद्वीप के अनाज किसानों को लगभग 2 अरब यूरो (करीब 2..2 खरब रुपयों) के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। इस दौरान करीब 90 लाख टन अनाज की फसल भी नष्ट हो गई, जिससे खाद्य कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विज्ञापन
यूरोपीय अनाज और तिलहन व्यापार संगठन कोसेराल (कोसेराल) ने गेहूं, जौ, मक्का और जई जैसी फसलों की कटाई के आकलन के आधार पर यह अनुमान जारी किया है। संगठन के मुताबिक, 90 लाख टन की कमी का मतलब है कि यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों और ब्रिटेन में वर्ष 2018 के बाद सबसे कम अनाज उत्पादन होगा। यह नुकसान ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और नीदरलैंड के अनुमानित कुल अनाज उत्पादन से भी अधिक है।
पश्चिमी यूरोप में सबसे गर्म महीना रहा जून
कोसेराल ने फसल नुकसान का कारण पश्चिमी यूरोप में रिकॉर्ड पर दर्ज सबसे गर्म जून को बताया है। भीषण गर्मी के कारण मक्का की परागण प्रक्रिया प्रभावित हुई, जबकि गेहूं की फसल उस महत्वपूर्ण चरण में प्रभावित हुई, जब दानों के भराव के लिए पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है।
मौजूदा बाजार कीमतों के आधार पर एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलिजेंस यूनिट (ईसीआईयू) ने अनुमान लगाया है कि केवल अनाज उत्पादन में कमी से लगभग 2 अरब यूरो का नुकसान हुआ है। हालांकि इसमें सब्जियों की फसल और पशुपालन पर पड़े व्यापक असर को शामिल नहीं किया गया है।
ईसीआईयू के भूमि, खाद्य और कृषि विश्लेषक टॉम लैंकेस्टर ने कहा, "इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा और साथ ही यूरोप की खाद्य सुरक्षा भी कमजोर होगी। ब्रिटेन में इस दशक के दौरान पहले ही पांच सबसे खराब फसलों में से तीन का सामना करना पड़ा है और हालिया गर्मी की लहर ने वहां के किसानों को भी नुकसान पहुंचाया है।"
फ्रांस में सबसे अधिक नुकसान का अनुमान
फ्रांस में सबसे अधिक नुकसान होने का अनुमान है। वहां करीब 34 लाख टन मक्का की फसल नष्ट हुई है, जिससे लगभग 89.1 करोड़ यूरो का नुकसान होने की आशंका है। इसके बाद सबसे ज्यादा अनाज नुकसान हंगरी में 24 लाख टन और स्पेन में 14 लाख टन रहने का अनुमान है।
फ्रांस के औवेर्गने-रोन-आल्प्स क्षेत्र के किसान बेनोआ मेरलो ने कहा कि पिछले एक दशक से उन्होंने अपने खेतों को गर्म और शुष्क मौसम के अनुकूल बनाने की कोशिश की, लेकिन इस वर्ष इसका भी लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा, "जब कई हफ्तों तक तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। मुझे सोयाबीन जैसी कुछ फसलों में 50 से 70 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की आशंका है।"
अनाज और मांस उत्पादन पर पड़ रहा प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अनाज उत्पादन में कमी के कारण यूरोप को आयात पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में अनाज की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि कीमतों पर दक्षिणी गोलार्ध में 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत में होने वाली फसल का भी प्रभाव पड़ेगा।
यूरोप में उत्पादन घटने के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी फसल आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका के दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में गंभीर सूखे के कारण अनाज और मांस उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।
ब्रिटेन में भी जून की गर्मी और सूखे वसंत के बाद कई हिस्सों में खेतों में नमी की कमी देखी जा रही है। इसका सबसे अधिक असर ईस्ट एंग्लिया और दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के कुछ इलाकों में पड़ा है, हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में स्थिति अलग-अलग है।
विज्ञापन
एजेंसी ने कहा कि अगर इस अवधि में गर्मी की लहर नहीं होती, तो पिछले वर्षों के आंकड़ों पर आधारित सांख्यिकीय आकलन के अनुसार इन्हीं क्षेत्रों में लगभग 15,910 लोगों की मौत होने की संभावना थी। इस प्रकार अनुमानित और वास्तविक मौतों के बीच 5,764 का अंतर दर्ज किया गया, जिसे एजेंसी ने भीषण गर्मी के दौरान हुई "अतिरिक्त मौतें" बताया है।
विज्ञापन
90 लाख टन अनाज की फसल बर्बाद
जून में यूरोप में पड़ी भीषण गर्मी की लहर से महाद्वीप के अनाज किसानों को लगभग 2 अरब यूरो (करीब 2..2 खरब रुपयों) के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। इस दौरान करीब 90 लाख टन अनाज की फसल भी नष्ट हो गई, जिससे खाद्य कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विज्ञापन
यूरोपीय अनाज और तिलहन व्यापार संगठन कोसेराल (कोसेराल) ने गेहूं, जौ, मक्का और जई जैसी फसलों की कटाई के आकलन के आधार पर यह अनुमान जारी किया है। संगठन के मुताबिक, 90 लाख टन की कमी का मतलब है कि यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों और ब्रिटेन में वर्ष 2018 के बाद सबसे कम अनाज उत्पादन होगा। यह नुकसान ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और नीदरलैंड के अनुमानित कुल अनाज उत्पादन से भी अधिक है।
पश्चिमी यूरोप में सबसे गर्म महीना रहा जून
कोसेराल ने फसल नुकसान का कारण पश्चिमी यूरोप में रिकॉर्ड पर दर्ज सबसे गर्म जून को बताया है। भीषण गर्मी के कारण मक्का की परागण प्रक्रिया प्रभावित हुई, जबकि गेहूं की फसल उस महत्वपूर्ण चरण में प्रभावित हुई, जब दानों के भराव के लिए पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है।
मौजूदा बाजार कीमतों के आधार पर एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलिजेंस यूनिट (ईसीआईयू) ने अनुमान लगाया है कि केवल अनाज उत्पादन में कमी से लगभग 2 अरब यूरो का नुकसान हुआ है। हालांकि इसमें सब्जियों की फसल और पशुपालन पर पड़े व्यापक असर को शामिल नहीं किया गया है।
ईसीआईयू के भूमि, खाद्य और कृषि विश्लेषक टॉम लैंकेस्टर ने कहा, "इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा और साथ ही यूरोप की खाद्य सुरक्षा भी कमजोर होगी। ब्रिटेन में इस दशक के दौरान पहले ही पांच सबसे खराब फसलों में से तीन का सामना करना पड़ा है और हालिया गर्मी की लहर ने वहां के किसानों को भी नुकसान पहुंचाया है।"
फ्रांस में सबसे अधिक नुकसान का अनुमान
फ्रांस में सबसे अधिक नुकसान होने का अनुमान है। वहां करीब 34 लाख टन मक्का की फसल नष्ट हुई है, जिससे लगभग 89.1 करोड़ यूरो का नुकसान होने की आशंका है। इसके बाद सबसे ज्यादा अनाज नुकसान हंगरी में 24 लाख टन और स्पेन में 14 लाख टन रहने का अनुमान है।
फ्रांस के औवेर्गने-रोन-आल्प्स क्षेत्र के किसान बेनोआ मेरलो ने कहा कि पिछले एक दशक से उन्होंने अपने खेतों को गर्म और शुष्क मौसम के अनुकूल बनाने की कोशिश की, लेकिन इस वर्ष इसका भी लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा, "जब कई हफ्तों तक तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। मुझे सोयाबीन जैसी कुछ फसलों में 50 से 70 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की आशंका है।"
अनाज और मांस उत्पादन पर पड़ रहा प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अनाज उत्पादन में कमी के कारण यूरोप को आयात पर अधिक निर्भर होना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में अनाज की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि कीमतों पर दक्षिणी गोलार्ध में 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत में होने वाली फसल का भी प्रभाव पड़ेगा।
यूरोप में उत्पादन घटने के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी फसल आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका के दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में गंभीर सूखे के कारण अनाज और मांस उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।
ब्रिटेन में भी जून की गर्मी और सूखे वसंत के बाद कई हिस्सों में खेतों में नमी की कमी देखी जा रही है। इसका सबसे अधिक असर ईस्ट एंग्लिया और दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के कुछ इलाकों में पड़ा है, हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में स्थिति अलग-अलग है।