कब थमेगा युद्ध?: संघर्ष की चौथी बरसी पर कीव पहुंचे यूरोपीयन नेता, जेलेंस्की बोले- हमने अपनी आजादी की रक्षा की
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब अपने पांचवे साल में प्रवेश कर रहा है। इसके बाद भी इस संघर्ष के खत्म होने की संभावनाएं कम दिख रही है। इसका बड़ा कारण शांति समझौते पर दोनों देशों का अलग-अलग और सख्त रुख है। इसी बीच इस संघर्ष की चौथी बरसी पर यूरोपीय नेता कीव के दौरे पर पहुंचे। आइए जानते हैं इस दौरान जेलेंस्की ने क्या कहा?
विस्तार
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भयावह संघर्ष की चौथी बरसी पर मंगलवार को यूरोप के एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेता यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। उनका यह दौरा यूक्रेन के प्रति समर्थन दिखाने के लिए था। यह युद्ध चार साल पहले शुरू हुआ था और अब तक इसमें दसियों हजार लोगों की जान जा चुकी है। इस संघर्ष ने पूरे यूरोप को चिंता में डाल रखा है कि रूस की मंशा आखिर कितनी बड़ी है। इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश रूस की बड़ी और बेहतर हथियारों से लैस सेना का डटकर सामना कर रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में रूस ने यूक्रेन के केवल 0.79 प्रतिशत इलाके पर ही कब्जा किया है। जेलेंस्की ने कहा कि हमने अपनी आजादी की रक्षा की है, हमने अपना देश नहीं खोया है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने मकसद में सफल नहीं हुए हैं और न ही वे यूक्रेनियों का हौसला तोड़ पाए हैं।
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पांचवे साल में प्रवेश कर रहा संघर्ष
हालांकि युद्ध अब पांचवें साल में प्रवेश कर रहा है और हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। अमेरिका की पहल पर शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। सबसे बड़ी अड़चन पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र को लेकर है। यह इलाका उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है और इसका बड़ा हिस्सा अभी रूसी कब्जे में है। यूक्रेन चाहता है कि युद्ध के बाद उसकी सुरक्षा की पक्की गारंटी हो, ताकि भविष्य में रूस फिर हमला न कर सके।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों के मारे गए, घायल या लापता सैनिकों की संख्या वसंत तक 20 लाख तक पहुंच सकती है। यह संख्या दूसरे विश्व युद्ध के बाद किसी बड़े देश के लिए सबसे ज्यादा हो सकती है। इस अनुमान को सामरिक और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र ने जारी किया है।
यूरोपीय नेताओं को किस बात का डर?
इस संघर्ष को लेकर यूरोपीय नेताओं को डर है कि अगर रूस को नहीं रोका गया तो उसका असर पूरे महाद्वीप की सुरक्षा पर पड़ेगा। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि पिछले चार साल यूक्रेन और पूरे यूरोप के लिए एक बुरे सपने जैसे रहे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध फिर से यूरोप में लौट आया है और इसे खत्म करने के लिए हमें एकजुट और मजबूत रहना होगा। कीव पहुंचे नेताओं में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब भी शामिल थे। इसके अलावा सात देशों के प्रधानमंत्री और तीन विदेश मंत्री भी वहां पहुंचे।
यूक्रेन अपनी लड़ाई को जारी रखने के लिए विदेशी मदद पर काफी हद तक निर्भर है। नाटो देशों ने उसे सैन्य सहायता दी है। रूस को उत्तर कोरिया, ईरान और चीन जैसे देशों से मदद मिलने की भी बात कही जा रही है। इस युद्ध का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ा है। खाद्यान्न की कमी, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं।
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यूक्रेन के पुननिर्माण और लगात
गौरतलब है कि यूक्रेन के पुनर्निर्माण की लागत बहुत भारी बताई जा रही है। विश्व बैंक, यूरोपीय आयोग और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार अगले दस साल में यूक्रेन को फिर से खड़ा करने के लिए करीब 588 अरब डॉलर की जरूरत होगी। यह रकम यूक्रेन की पिछले साल की कुल अर्थव्यवस्था से लगभग तीन गुना ज्यादा है। कुल मिलाकर, चार साल बाद भी यह युद्ध खत्म होने के कोई साफ संकेत नहीं दिख रहे हैं। यूरोप और दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक कोशिशें इस लंबे और विनाशकारी संघर्ष को खत्म कर पाएंगी।
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