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पाकिस्तान में सेना का बढ़ा दबदबा: क्या शहबाज से छिनी सबसे बड़ी ताकत? अब मुनीर के हाथ 'न्यूक्लियर बटन'
Sun, 26 Jul 2026 06:50 AM IST
प्रशांत तिवारी
एजेंसी, इस्लामाबाद
एजेंसी, इस्लामाबाद
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sun, 26 Jul 2026 06:50 AM IST
सार
पाकिस्तान ने रक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए परमाणु हथियारों और रणनीतिक मिसाइल प्रणाली की ऑपरेशनल कमान सेना को सौंप दी है। 27वें संविधान संशोधन के बाद गठित नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (एनएससी) के जरिए वास्तविक नियंत्रण अब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व वाली केंद्रीय सैन्य कमान के हाथ में होगा। प्रधानमंत्री की भूमिका सीमित हो गई है और नया सैन्य ढांचा चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के मॉडल से प्रेरित बताया जा रहा है।
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आसिम मुनीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान ने अपने रक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए परमाणु हथियारों और रणनीतिक मिसाइल प्रणाली की ऑपरेशनल कमान सेना को सौंप दी है। नए कानून के तहत नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (एनएससी) का गठन किया गया है, जिसकी कमान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास होगी।
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क्या है नया सैन्य ढांचा और किसे मिली कमान?
27वें संविधान संशोधन के बाद एनएससी का गठन किया गया है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और अन्य महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधनों का संचालन अब सीधे केंद्रीय सैन्य कमान के अधीन होगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने लेफ्टिनेंट जनरल आमिर रजा को फोर-स्टार जनरल के रूप में पदोन्नत कर इस नई कमान का पहला कमांडर नियुक्त किया है। नया ढांचा काफी हद तक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के मॉडल पर तैयार किया गया है।
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पहले व्यवस्था क्या थी और अब क्या बदल गया?
पहले पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के अधीन था, जिसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते थे। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या उनकी तैनाती का अंतिम फैसला प्रधानमंत्री करते थे। अब नए सैन्य पुनर्गठन के तहत गठित एनएससी ने वास्तविक कमान संभाल ली है। प्रधानमंत्री की भूमिका अब केवल सूचना प्राप्त करने तक सीमित रह गई है। निर्णय लेने की मुख्य शक्ति अब चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास है।