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Iran-US Tensions: ईरान पर बड़े हमले की योजना से ट्रंप क्यों पीछे हटे, सलाहकारों ने किस बड़े खतरे से किया आगाह?

Sun, 26 Jul 2026 08:24 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 26 Jul 2026 08:24 AM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार 13 दिनों तक ईरान पर सैन्य हमले कराने के बाद शुक्रवार को नए हमलों पर रोक लगाने का निर्देश दिया। यह फैसला ऐसे समय आया, जब ओमान का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचकर बातचीत कर रहा था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है, लेकिन वह पहले समझौते का रास्ता चाहता है। ऐसे में सवाल है कि क्या यह फैसला ईरान के साथ नए समझौते की शुरुआत बनेगा?

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Iran-US Tensions Why Trump Back Away from Wider Iran Strike Plan What Major Threat Did Advisers Warn
अचानक ट्रंप के सुर क्यों बदले? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान में बड़ा बदलाव करते हुए शुक्रवार को अमेरिकी सेना को नए हवाई हमले नहीं करने का निर्देश दिया। इससे पहले लगातार 13 दिनों तक अमेरिका की ओर से रोज सैन्य कार्रवाई की जा रही थी। ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया, जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत के लिए ओमान का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई की पूरी क्षमता है, लेकिन उनकी पहली कोशिश बातचीत के जरिए समाधान निकालने की है।
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ट्रंप के इस फैसले ने पश्चिम एशिया की स्थिति को नया मोड़ दे दिया। बताया गया कि ओमान और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है और सप्ताहांत तक किसी समझौते पर सहमति बन सकती है। अगर ऐसा होता है तो अंतिम फैसला ट्रंप को लेना होगा कि वह प्रस्तावित समझौते को स्वीकार करते हैं या नहीं। हालांकि अमेरिकी सेना ने संभावित बड़े सैन्य अभियान की तैयारियां पूरी तरह बंद नहीं की हैं। सेना को कम समय में दोबारा कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
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ट्रंप ने हमले क्यों रुकवाए और क्या कहा?

पिछले दो सप्ताह से हर दोपहर अमेरिकी सैन्य अधिकारी ट्रंप के सामने हमलों की योजना पेश कर रहे थे और कुछ ही घंटों में उन पर कार्रवाई हो जाती थी। शुक्रवार को भी ऐसी ही योजना उनके सामने रखी गई, लेकिन इस बार ट्रंप ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहे तो ईरान की हर सैन्य क्षमता को खत्म कर सकता है, लेकिन उनके अनुसार सबसे समझदारी भरी रणनीति समझौता करना है। ट्रंप ने कहा, "हम अभी ईरानियों से बातचीत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वे हर गुजरते दिन के साथ ज्यादा गंभीर हो रहे हैं। हम पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन बातचीत भी जारी है।"
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बाद में ट्रंप के सुर क्यों बदले?

शुक्रवार शाम व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के रात्रिभोज में ट्रंप ने कुछ नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें नहीं लगता कि ईरान समझौते के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन अगर बातचीत की संभावना बनती है तो वह उसे सुनने के लिए तैयार हैं। इस बीच ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपुर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "ईरान में रात शांतिपूर्ण रही।" वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी पिछले 13 दिनों की तरह किसी नए सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की।

इस्राइल की तैयारी पर क्या असर पड़ा?

ट्रंप के अचानक फैसले से इस्राइल भी हैरान रह गया। इस्राइल की सुरक्षा कैबिनेट और इस्राइली रक्षा बल (IDF) को उम्मीद थी कि शुक्रवार को अमेरिका एक और बड़े हवाई हमले की शुरुआत करेगा। इसी संभावना को देखते हुए इस्राइल ने संभावित जवाबी हमलों से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी थीं और पूरे दिन हाई अलर्ट बनाए रखा। बाद में शुक्रवार रात इस्राइली अधिकारियों को औपचारिक रूप से बताया गया कि ट्रंप ने नए हमलों को मंजूरी नहीं दी है। इसके बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बना हुआ है।

बड़े सैन्य अभियान की योजना क्यों टली?

  • एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य अभियान की योजना भी फिलहाल रोक दी है। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी रक्षा अधिकारियों की चेतावनी बताई गई। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में तैनात पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से कम हो रहा है। 
  • आशंका जताई गई कि अगर बड़े स्तर पर युद्ध शुरू हुआ तो अमेरिकी सैनिकों, खाड़ी देशों के सहयोगियों और महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। सैन्य अधिकारियों ने यह भी बताया कि जॉर्डन में एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था को भेदते हुए गिरी थी, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद सुरक्षा संसाधनों को लेकर चिंता और बढ़ गई।

अमेरिका की आगे की रणनीति क्या होगी?

  • बताया गया कि जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन कैन ने ट्रंप को सलाह दी कि बड़े सैन्य अभियान चलाना संभव तो है, लेकिन इससे अमेरिकी सेंट्रल कमांड के लिए उपलब्ध इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार खतरनाक स्तर तक घट सकता है। 
  • व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन च्यूंग ने कहा कि ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्षधर रहे हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या सहयोगी देशों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियां जारी रखता है तो सभी विकल्प खुले हैं। 
  • उन्होंने कहा कि ईरान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना समझदारी होगी, नहीं तो उसे परिणाम पता हैं। इस बीच अमेरिका ने ईरान के कारोबारी बाबक जंजानी के वित्तीय नेटवर्क से जुड़ी नौ कंपनियों और चार लोगों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। 
  • अमेरिकी सेना ने पश्चिम एशिया में अतिरिक्त सैनिक, हथियार और सैन्य संसाधन भी भेजे हैं। सैन्य योजनाओं में ऊर्जा ढांचे, परिवहन नेटवर्क और पिकएक्स माउंटेन स्थित भूमिगत परमाणु सुविधा जैसे ठिकानों को निशाना बनाने के विकल्प भी शामिल रहे हैं।
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