1973 के बाद सबसे गंभीर संकट: होर्मुज के चलते रोजाना 8-10 मिलियन बैरल तेल आपूर्ति ठप, कीमतों में लंबी उछाल तय
पश्चिम एशिया का युद्ध अब वैश्विक तेल और गैस बाजार को झकझोर रहा है। होर्मुज के प्रभावित होने से रोजाना लाखों बैरल तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी सप्लाई रुक गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की भारी कमी और कीमतों में लंबी तेजी तय है। हालात 1973 जैसे बड़े ऊर्जा संकट की याद दिला रहे हैं, जहां दुनिया को जल्द राहत मिलती नहीं दिख रही।
विस्तार
ईरान युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार गहरे संकट में प्रवेश कर चुका है। एस एंड पी ग्लोबल के सीईआरए वीक सम्मेलन में दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनियों के सीईओ ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से रोजाना 8–10 मिलियन (80-100 करोड़) बैरल तेल और वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का करीब 20% बाजार से बाहर हो गया है। इससे जेट फ्यूल, डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति में भी अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है, जिसकी लहर एशिया से यूरोप तक तेजी से फैल रही है और कीमतों में दीर्घकालिक उछाल अब लगभग तय माना जा रहा है।
कॉनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने स्पष्ट कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल और गैस को वैश्विक बाजार से हटाने के गंभीर परिणाम अपरिहार्य हैं। कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ शेख नवाफ अल-सबाह ने इसे खाड़ी तेल उत्पादकों के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी करार देते हुए कहा कि ईरान ने हॉर्मुज को बंद कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना दिया है। स्वतंत्र विश्लेषक पॉल सैंकी ने स्थिति को 1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो के बाद सबसे गंभीर बताते हुए कहा कि हम एक ऐसी स्थिति में हैं जहां ईरान का हॉर्मुज पर डि-फैक्टो नियंत्रण है और यह संकट अभूतपूर्व है।
एलएनजी सप्लाई पर दबाव, तत्काल राहत नहीं
चेनीयर के सीईओ जैक फुस्को ने कहा कि कंपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रही है, लेकिन अमेरिका से एशिया तक एलएनजी पहुंचाने में 28 दिन लगते हैं। ऐसे में कतर पर निर्भर एशियाई देशों को तुरंत राहत मिलना मुश्किल है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ वली नसर के अनुसार ईरान युद्धविराम नहीं बल्कि व्यापक समझौता चाहता है, जिसमें हॉर्मुज पर नियंत्रण, आर्थिक मुआवजा और सुरक्षा गारंटी शामिल हैं।
पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री जनरल जिम मैटिस ने कहा कि यह संघर्ष फिलहाल गतिरोध में है, लेकिन आगे और बढ़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसेना के लिए हॉर्मुज से ओमान की खाड़ी तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
तीन साल के उच्चतम स्तर पर तेल की कीमतें
सीएनबीसी के अनुसार युद्ध के दौरान जब वार्ता की उम्मीद बढ़ी तो कीमतें गिरीं और तनाव बढ़ते ही फिर उछलीं। सप्ताह के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर हमले की धमकी से पीछे हटते हुए कहा कि तेहरान समझौता चाहता है, लेकिन निवेशकों की चिंता बनी रही। 28 फरवरी को अमेरिकी कच्चा तेल 49% बढ़कर 99.64 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट 55% उछलकर 112.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जो तीन साल का उच्चतम स्तर है।
सरकारें सुरक्षित कर रहीं अपना तेल भंडार, बिगड़ेगी स्थिति
टोटलएनर्जी के सीईओ पैट्रिक पुइयाने के मुताबिक, जेट फ्यूल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल और डीजल 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है जो असामान्य उछाल है। रूस और चीन ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जबकि थाईलैंड में पेट्रोल की राशनिंग शुरू हो गई है। यह कमी एशिया में फैल चुकी है और अप्रैल तक यूरोप को भी प्रभावित करेगी। सरकारें अपने भंडार सुरक्षित कर रही हैं, जिससे वैश्विक कमी और गहराने का खतरा है।
खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर बड़ा खतरा
पॉल सैंकी के अनुसार यह संकट खाड़ी देशों के आर्थिक मॉडल को तोड़ सकता है। इराक, कतर, यूएई और संभावित रूप से सऊदी अरब की जीडीपी में 30% तक गिरावट आ सकती है। मैटिस ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने खाड़ी सहयोगियों से बिना परामर्श युद्ध शुरू किया और अब वह आसानी से इससे बाहर नहीं निकल सकता। उन्होंने कहा इस युद्ध के अंत का फैसला ईरान के हाथ में भी है।
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