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Dengue: डेंगू के दुश्मन बन गए मच्छर? ब्राजील के बेलेम ने अपनाई ऐसी तरकीब, बीमारी में 70% तक गिरावट

Sat, 15 Aug 2026 07:05 AM IST
शिवम गर्ग अपूर्वा मंडाविली, द न्यूयॉर्क टाइम्स
अपूर्वा मंडाविली, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 15 Aug 2026 07:05 AM IST
सार

ब्राजील के बेलेम शहर ने डेंगू और मच्छरजनित बीमारियों से निपटने के लिए मच्छरों को ही हथियार बनाया। लार्विसाइड वाली बाल्टियों और वोल्बाचिया युक्त मच्छरों की मदद से बीमारी में 70% तक कमी आई।

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How Brazil Belem Used Mosquitoes to Fight Mosquito-Borne Diseases and Cut Cases by 70%
डेंगू के खिलाफ मच्छर बने हथियार - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

ब्राजील का बेलेम शहर दो वर्ष पहले तक डेंगू के भीषण प्रकोप से त्रस्त था। अस्पताल मरीजों से भर जाते थे और मच्छर मारने वाले रसायनों के अत्यधिक छिड़काव से पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा था। फिर, उसने मच्छरों को ही मच्छरों की काट बनाने वाला अनूठा तरीका अपनाया। नतीजा, डेंगू और मच्छरजनित बीमारियों पर 70%  तक काबू पा लिया गया।

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ब्राजील का यह शहर अब दुनिया के तमाम देशों के लिए डेंगू के खिलाफ जंग में एक मिसाल बन गया है। बेलेम शहर ने स्थानीय स्तर पर एक बेहद सरल और क्रांतिकारी तरीका अपनाया, जिसमें लार्विसाइड युक्त विशेष बाल्टियों का इस्तेमाल किया जाता है। छोटे कूड़ेदान जैसी यह बाल्टी मादा मच्छरों को आकर्षित करने के लिए एकदम सही अंधेरी और नम जगह प्रदान करती है। बाल्टी के अंदर एक विशेष लार्विसाइड रसायन से युक्त जालीदार पट्टी होती है। जब मादा मच्छर वहां उतरती है, तो रसायन उसके शरीर से चिपक जाता है। फिर जब वह उड़कर अन्य प्रजनन स्थलों पर जाती है, तो रसायन भी साथ ले जाती है। इनके प्रभाव से उन अन्य जगहों पर पनप रहे मच्छरों के लार्वा भी नष्ट हो जाते हैं।
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मच्छर फैक्टरी एक बड़ा नवाचार

  • ब्राजील ने इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए पारंपरिक और जहरीले कीटनाशकों के छिड़काव से हटकर पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का भी सहारा लिया है।
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  • इसी कड़ी में पिछले वर्ष उसने दुनिया की सबसे बड़ी मच्छर फैक्टरी स्थापित की थी। यह विशेष केंद्र बेलेम में कुछ मील दूर कुरितिबा में बनाया गया है।
  • इसमें वोल्बाचिया नामक प्राकृतिक बैक्टीरिया से युक्त मच्छरों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है और फिर उन्हें मच्छरजनित बीमारियों से प्रभावित क्षेत्र में पहुंचा दिया जाता है।

आबादी पर नियंत्रण पाने में मददगार

  • वोल्बाचिया एक सुरक्षित बैक्टीरिया है जो प्राकृतिक रूप से दुनिया के लगभग आधे कीटों में पाया जाता है, लेकिन आम तौर पर डेंगू, जीका और चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज एजिप्टी मच्छरों में नहीं होता।
  • लैब में तैयार वोल्बाचिया-युक्त मच्छरों को प्रभावित बस्तियों में छोड़ा जाता है, तो वे जंगली मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं। इससे या तो उनकी आबादी नियंत्रित होती है या फिर नई पीढ़ी में डेंगू वायरस को इंसानों तक पहुंचाने की क्षमता समाप्त हो जाती है।

सामूहिक प्रयासों से बदली तस्वीर, दुर्लभ तितलियों की वापसी...बेलेम के मेयर इगोर नोर्मांदो कहते हैं कि यह सफलता सामूहिक प्रयासों से मिली है। नियमित रूप से घर-घर जाकर निरीक्षण किया जाता है। लोगों को पानी जमा न होने देने के लिए प्रेरित किया जाता है। रासायनिक छिड़काव का सीमित इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी वजह से कभी इसके दुष्प्रभाव के कारण लुप्त हो गईं दुर्लभ तितलियां भी फिर से नजर आने लगी हैं।

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