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भारत-मंगोलिया सहयोग: जयशंकर ने कीं कई उच्च-स्तरीय बैठकें, कहा- 1.7 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना बेहद अहम
एजेंसी, उलानबाटर।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 24 Jun 2026 03:50 AM IST
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सार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगोलिया में भारत की मदद से बन रही 1.7 अरब डॉलर की तेल रिफाइनरी परियोजना स्थल का दौरा किया और इसकी प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने भारतीय और मंगोलियाई कर्मियों के काम की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच विकास, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। पढ़िए रिपोर्ट-
एस जयशंकर
- फोटो : एक्स/डॉ एस जयशंकर
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विस्तार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मंगोलिया में भारत की मदद से बन रही 1.7 अरब डॉलर की रिफाइनरी परियोजना निर्माण साइट का दौरा किया और काम की प्रगति का जायजा लिया। इस पहल के प्रगति दौरे पर उनके साथ मंगोलियाई समकक्ष बैटसेटसेग बैटमुंख और उद्योग-खनन मंत्री गोंगोर डमडिनन्याम भी मौजूद रहे। जयशंकर ने कहा, भारत-मंगोलिया दोस्ती की यह अहम परियोजना आगे बढ़ रही है।
जयशंकर बोले, इस परियोजना में शामिल विभिन्न टीमों के साथ चल रहे काम की स्थिति सराहनीय है। उन्होंने परियोजना स्थल पर भारतीय और मंगोलियाई कर्मियों से चर्चा की और मुश्किल हालात में इतनी बड़ी परियोजना को साकार करने में उनके समर्पण व प्रतिबद्धता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंगोल तेल रिफाइनरी परियोजना भारत से 1.7 अरब डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट की मदद से पूरी की जा रही है और यह मंगोलिया की टिकाऊ ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। जयशंकर अपने दौरे के अंतिम चरण के लिए बुधवार को दक्षिण कोरिया जाएंगे।
गंदन मठ का दौरा किया: विदेश मंत्री ने मंगोलिया में गंदन मठ का भी दौरा किया, जहां उन्होंने मठ के प्रमुख भिक्षु (चीफ एबॉट) खंबा नोमुन खान गेशे लहारम्पा डी जावजानदोरज से मुलाकात की। उन्होंने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक-आध्यात्मिक रिश्तों में मठ की भूमिका पर जोर दिया।
ये भी पढ़ें: ट्रंप की सैन्य नीति को झटका?: 'कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान में सैन्य कार्रवाई नहीं', सीनेट का संदेश
सहयोग के लिए उच्च-स्तरीय बैठकें
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-मंगोलिया के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के मकसद से उच्च-स्तरीय बैठकें भी कीं। उन्होंने कहा, स्टेट ग्रेट खुराल (मंगोलिया की संसद) के स्पीकर सैंडाग ब्याम्बत्सोत ने दोनों देशों में संसदीय आदान-प्रदान के समर्थन का स्वागत किया। उन्होंने लोगों पर केंद्रित विकास साझेदारी गहराने के लिए समर्थन दोहराया।
रणनीतिक-सांस्कृतिक संबंधों पर जोर
जयशंकर ने मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अमगलान और पूर्व राष्ट्रपति एन. एन्खबयार से चर्चा कर इन मुलाकातों को आपसी संबंधों की मजबूती के लिए अहम बताया। विदेश मंत्री की यात्रा का मकसद भारत के रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है। उन्होंने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से मिलकर द्विपक्षीय सोच को लेकर सकारात्मक रुख जताया।
जयशंकर बोले, इस परियोजना में शामिल विभिन्न टीमों के साथ चल रहे काम की स्थिति सराहनीय है। उन्होंने परियोजना स्थल पर भारतीय और मंगोलियाई कर्मियों से चर्चा की और मुश्किल हालात में इतनी बड़ी परियोजना को साकार करने में उनके समर्पण व प्रतिबद्धता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंगोल तेल रिफाइनरी परियोजना भारत से 1.7 अरब डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट की मदद से पूरी की जा रही है और यह मंगोलिया की टिकाऊ ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। जयशंकर अपने दौरे के अंतिम चरण के लिए बुधवार को दक्षिण कोरिया जाएंगे।
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Visited the construction site of the Mongol Refinery Project with Foreign Minister Battsetseg Batmunkh and Industry and Mining Minister Gongor Damdinnyam.
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This landmark 🇮🇳 🇲🇳 friendship project is making steady progress. Reviewed the status of works under implementation with… pic.twitter.com/OcWOJj1Gam— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) June 23, 2026
गंदन मठ का दौरा किया: विदेश मंत्री ने मंगोलिया में गंदन मठ का भी दौरा किया, जहां उन्होंने मठ के प्रमुख भिक्षु (चीफ एबॉट) खंबा नोमुन खान गेशे लहारम्पा डी जावजानदोरज से मुलाकात की। उन्होंने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक-आध्यात्मिक रिश्तों में मठ की भूमिका पर जोर दिया।
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सहयोग के लिए उच्च-स्तरीय बैठकें
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-मंगोलिया के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के मकसद से उच्च-स्तरीय बैठकें भी कीं। उन्होंने कहा, स्टेट ग्रेट खुराल (मंगोलिया की संसद) के स्पीकर सैंडाग ब्याम्बत्सोत ने दोनों देशों में संसदीय आदान-प्रदान के समर्थन का स्वागत किया। उन्होंने लोगों पर केंद्रित विकास साझेदारी गहराने के लिए समर्थन दोहराया।
रणनीतिक-सांस्कृतिक संबंधों पर जोर
जयशंकर ने मंगोलिया के शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अमगलान और पूर्व राष्ट्रपति एन. एन्खबयार से चर्चा कर इन मुलाकातों को आपसी संबंधों की मजबूती के लिए अहम बताया। विदेश मंत्री की यात्रा का मकसद भारत के रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना है। उन्होंने मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से मिलकर द्विपक्षीय सोच को लेकर सकारात्मक रुख जताया।