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US: ग्रीन कार्ड धारकों की बढ़ीं मुश्किलें, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला- अपराध किया तो मिलेगा देश निकाला
एएनआई, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 24 Jun 2026 08:35 AM IST
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सार
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नैतिक पतन से जुड़े अपराधों में शामिल ग्रीन कार्ड धारकों को निर्वासित करना चाहिए। इस फैसले के बाद ग्रीन कार्ड धारकों की चिंता बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक अहम फैसला दिया, जिससे अमेरिका में रहने वाले ग्रीन कार्ड धारकों की परेशानी बढ़ना तय है। दरअसल इस फैसले के बाद अगर कोई ग्रीन कार्ड धारक नैतिक पतन से जुड़ा अपराध करता है तो उसे स्थायी नागरिक होने के बाद भी अमेरिका से निर्वासित किया जा सकेगा। अमेरिका के सीमा सुरक्षा अधिकारियों को अब ऐसे लोगों को अमेरिका से निकालना आसान होगा।
जज ने फैसले में क्या कहा?
अमेरिकी न्यायाधीश क्लेरेंस थॉमस ने फैसले में कहा कि आव्रजन अधिकारियों को अब स्पष्ट सबूतों की जरूरत नहीं होगी और अगर उन्हें लगता है कि अपराध हुआ है तो भी वे कार्रवाई कर सकते हैं। जज ने कहा कि अप्रवासन और नेशनलिटी एक्ट में सबूतों की जरूरत की बात नहीं है। दरअसल एक याचिकाकर्ता मुक चोइ लाउ ने अपनी याचिका में बताया कि वह चीनी नागरिक है, लेकिन उसके पास अमेरिका में स्थायी निवास के लिए ग्रीन कार्ड है।
क्या है पूरा मामला
ट्रेडमार्क में जालसाजी के आरोप में लाउ को साल 2012 में चीन से लौटते समय न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रवेश नहीं दिया गया था। हालांकि उस समय उन्हें सशर्त प्रवेश की मंजूरी दी गई। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, लाउ ने बाद में जाली नोट बनाने के आरोपों को भी स्वीकार किया। जिसके बाद उसे देश से निर्वासित करने का आदेश दिया गया। जिसे लाउ ने अदालत में चुनौती दी और तर्क दिया कि उसका अपराध नैतिक पतन से संबंधित श्रेणी में नहीं आता। हालांकि लाउ को निर्वासित करने का तीन जजों ने विरोध भी किया। एक जज जैक्सन ने कहा कि इस फैसले से अदालत ने सरकार को खुली छूट दे दी है और इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
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जज ने फैसले में क्या कहा?
अमेरिकी न्यायाधीश क्लेरेंस थॉमस ने फैसले में कहा कि आव्रजन अधिकारियों को अब स्पष्ट सबूतों की जरूरत नहीं होगी और अगर उन्हें लगता है कि अपराध हुआ है तो भी वे कार्रवाई कर सकते हैं। जज ने कहा कि अप्रवासन और नेशनलिटी एक्ट में सबूतों की जरूरत की बात नहीं है। दरअसल एक याचिकाकर्ता मुक चोइ लाउ ने अपनी याचिका में बताया कि वह चीनी नागरिक है, लेकिन उसके पास अमेरिका में स्थायी निवास के लिए ग्रीन कार्ड है।
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क्या है पूरा मामला
ट्रेडमार्क में जालसाजी के आरोप में लाउ को साल 2012 में चीन से लौटते समय न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रवेश नहीं दिया गया था। हालांकि उस समय उन्हें सशर्त प्रवेश की मंजूरी दी गई। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, लाउ ने बाद में जाली नोट बनाने के आरोपों को भी स्वीकार किया। जिसके बाद उसे देश से निर्वासित करने का आदेश दिया गया। जिसे लाउ ने अदालत में चुनौती दी और तर्क दिया कि उसका अपराध नैतिक पतन से संबंधित श्रेणी में नहीं आता। हालांकि लाउ को निर्वासित करने का तीन जजों ने विरोध भी किया। एक जज जैक्सन ने कहा कि इस फैसले से अदालत ने सरकार को खुली छूट दे दी है और इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।