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ISS: अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन आईएसएस पर रहेंगे 240 दिन, नासा बोला- मिशन के लिए 14 जुलाई को भरेंगे उड़ान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 18 Jun 2026 08:06 AM IST
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सार
भारतीय मूल के अमेरिकी फिजिशियन और नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने पहले अंतरिक्ष मिशन पर जाने के लिए तैयार हैं। वह 14 जुलाई 2026 को कजाखस्तान स्थित बैकोनूर कोस्मोड्रोम से प्रक्षेपित होने वाले मिशन के तहत लगभग 240 दिनों तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहेंगे।
भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
भारतीय मूल के फिजिशियन और नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने जीवन के पहले अंतरिक्ष मिशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर लगभग 8 महीने यानी 240 दिन का लंबा समय बिताएंगे।
यह मिशन मंगलवार, 14 जुलाई, 2026 को कजाखस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से लॉन्च किया जाएगा। अनिल मेनन और उनका दल वसंत 2027 तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेगा। इस दौरान वे कई ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे जो भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर भेजे जाने वाले मानव मिशनों के लिए बेहद मददगार साबित होंगे। इतना ही नहीं, अंतरिक्ष का यह सफर अनिल मेनन अकेले तय नहीं कर रहे हैं, क्योंकि आईएसएस के मिशन हमेशा एक टीम के रूप में होते हैं। वह एक अंतरराष्ट्रीय क्रू के सदस्य के रूप में रूसी अंतरिक्ष यात्रियों प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे।
शून्य गुरुत्वाकर्षण में इन्सानी शरीर को ढालने पर होगी खोज मिशन पर 240 दिन बिताने के दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगों का हिस्सा बनेंगे। नासा के अनुसार, मेनन का मुख्य काम यह रिसर्च करना होगा कि अंतरिक्ष के वातावरण और शून्य गुरुत्वाकर्षण में इंसानी शरीर खुद को कैसे ढालता है। बता दें कि मिनेसोटा के मिनियापोलिस में जन्मे अनिल मेनन के माता-पिता भारतीय और यूक्रेनी मूल के अप्रवासी हैं।
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यह मिशन मंगलवार, 14 जुलाई, 2026 को कजाखस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से लॉन्च किया जाएगा। अनिल मेनन और उनका दल वसंत 2027 तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेगा। इस दौरान वे कई ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे जो भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर भेजे जाने वाले मानव मिशनों के लिए बेहद मददगार साबित होंगे। इतना ही नहीं, अंतरिक्ष का यह सफर अनिल मेनन अकेले तय नहीं कर रहे हैं, क्योंकि आईएसएस के मिशन हमेशा एक टीम के रूप में होते हैं। वह एक अंतरराष्ट्रीय क्रू के सदस्य के रूप में रूसी अंतरिक्ष यात्रियों प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे।
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शून्य गुरुत्वाकर्षण में इन्सानी शरीर को ढालने पर होगी खोज मिशन पर 240 दिन बिताने के दौरान दोनों अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगों का हिस्सा बनेंगे। नासा के अनुसार, मेनन का मुख्य काम यह रिसर्च करना होगा कि अंतरिक्ष के वातावरण और शून्य गुरुत्वाकर्षण में इंसानी शरीर खुद को कैसे ढालता है। बता दें कि मिनेसोटा के मिनियापोलिस में जन्मे अनिल मेनन के माता-पिता भारतीय और यूक्रेनी मूल के अप्रवासी हैं।