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भारत-थाईलैंड का संयुक्त युद्धाभ्यास: भारतीय नौसेना के कौन से युद्धपोत हुए शामिल? रॉयल थाई नेवी ने भी दिया साथ
Wed, 01 Jul 2026 03:58 PM IST
Devesh Tripathi
एएनआई, सत्ताहिप
एएनआई, सत्ताहिप
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 01 Jul 2026 03:58 PM IST
सार
भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के तीन युद्धपोतों ने थाईलैंड की रॉयल थाई नेवी के साथ समुद्र में संयुक्त PASSEX अभ्यास कर दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई मजबूती दी। सत्ताहिप बंदरगाह यात्रा के दौरान दोनों नौसेनाओं ने परिचालन समन्वय, पेशेवर संवाद, क्रॉस-डेक गतिविधियों, खेल आयोजनों और सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
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भारत-थाईलैंड युद्धाभ्यास
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती ने थाईलैंड के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास में शामिल हुए। इन युद्धपोतों ने थाईलैंड के सत्ताहिप दौरे के बाद रॉयल थाई नेवी के युद्धपोत एचटीएमएस चाओ फ्राया के साथ PASSEX (पासिंग एक्सरसाइज) में हिस्सा लिया। यह ऐसा संयुक्त नौसैनिक अभ्यास होता है, जो समुद्र में मित्र देशों की नौसेनाओं के आमने-सामने आने पर आयोजित किया जाता है।
भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "पूर्वी बेड़े के आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती ने थाईलैंड के सत्ताहिप दौरे के बाद रॉयल थाई नेवी के एचटीएमएस चाओ फ्राया के साथ PASSEX अभ्यास किया। इस अभ्यास ने दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया तथा समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।"
कब थाईलैंड पहुंचे थे भारत के तीनों युद्धपोत?
इससे पहले 28 जून को भारतीय नौसेना के ये तीनों युद्धपोत अपने ऑपरेशनल तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहिप पहुंचे थे। रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट के नेतृत्व में पहुंचे इन युद्धपोतों का रॉयल थाई नेवी ने स्वागत किया। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बंदरगाह यात्रा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की समुद्री भागीदारी का हिस्सा है और भारत-थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को दर्शाती है।
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इस दौरे पर दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर विचार-विमर्श, क्रॉस-डेक विजिट, परिचालन संबंधी बातचीत, खेल गतिविधियां और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य नौसेना-से-नौसेना सहयोग और संयुक्त संचालन क्षमता को और मजबूत करना है।
युद्धाभ्यास का क्या है उद्देश्य?
बयान में कहा गया कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच आपसी सहयोग, मित्रता और द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को और मजबूत करना है। साथ ही, यह भारतीय नौसैनिक जहाजों की स्वदेशी डिजाइन, मॉड्यूलर निर्माण क्षमता और अत्याधुनिक तकनीक का भी प्रदर्शन है, जो रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
भारतीय नौसेना ने फेसबुक पर भी पोस्ट साझा करते हुए कहा, "भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत उदयगिरि, शक्ति और कवरत्ती, रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में सत्ताहिप पहुंचे। इस यात्रा का उद्देश्य रॉयल थाई नेवी के साथ परिचालन गतिविधियों, खेल आयोजनों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से संयुक्त संचालन क्षमता बढ़ाना, पेशेवर सहयोग को मजबूत करना और आपसी समझ को बढ़ावा देना है। यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति, 'महासागर' दृष्टिकोण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026 के दौरान आसियान देशों के साथ समुद्री साझेदारी को और मजबूत करने का भी लक्ष्य रखता है।"
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भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "पूर्वी बेड़े के आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती ने थाईलैंड के सत्ताहिप दौरे के बाद रॉयल थाई नेवी के एचटीएमएस चाओ फ्राया के साथ PASSEX अभ्यास किया। इस अभ्यास ने दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया तथा समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।"
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कब थाईलैंड पहुंचे थे भारत के तीनों युद्धपोत?
इससे पहले 28 जून को भारतीय नौसेना के ये तीनों युद्धपोत अपने ऑपरेशनल तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहिप पहुंचे थे। रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट के नेतृत्व में पहुंचे इन युद्धपोतों का रॉयल थाई नेवी ने स्वागत किया। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह बंदरगाह यात्रा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की समुद्री भागीदारी का हिस्सा है और भारत-थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को दर्शाती है।
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इस दौरे पर दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर विचार-विमर्श, क्रॉस-डेक विजिट, परिचालन संबंधी बातचीत, खेल गतिविधियां और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य नौसेना-से-नौसेना सहयोग और संयुक्त संचालन क्षमता को और मजबूत करना है।
युद्धाभ्यास का क्या है उद्देश्य?
बयान में कहा गया कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच आपसी सहयोग, मित्रता और द्विपक्षीय समुद्री संबंधों को और मजबूत करना है। साथ ही, यह भारतीय नौसैनिक जहाजों की स्वदेशी डिजाइन, मॉड्यूलर निर्माण क्षमता और अत्याधुनिक तकनीक का भी प्रदर्शन है, जो रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
भारतीय नौसेना ने फेसबुक पर भी पोस्ट साझा करते हुए कहा, "भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत उदयगिरि, शक्ति और कवरत्ती, रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में सत्ताहिप पहुंचे। इस यात्रा का उद्देश्य रॉयल थाई नेवी के साथ परिचालन गतिविधियों, खेल आयोजनों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से संयुक्त संचालन क्षमता बढ़ाना, पेशेवर सहयोग को मजबूत करना और आपसी समझ को बढ़ावा देना है। यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति, 'महासागर' दृष्टिकोण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026 के दौरान आसियान देशों के साथ समुद्री साझेदारी को और मजबूत करने का भी लक्ष्य रखता है।"