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Iran War: ईरान ने चीनी जहाजों के लिए खोला होर्मुज, जिनपिंग ने ट्रंप के जलडमरूमध्य खोलने की मांग का समर्थन किया

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: अमन तिवारी Updated Thu, 14 May 2026 09:43 PM IST
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सार

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से चीनी जहाजों को निकलने की अनुमति दी है। यह फैसला चीन द्वारा जलमार्ग को खुला रखने के समर्थन के बाद आया। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच इस कदम को तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कानूनों से बेहद अहम माना जा रहा है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य - फोटो : hormuztracking.com
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विस्तार

ईरान ने दर्जनों चीनी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब चीन ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खुला रखने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांग का समर्थन किया। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद इस रास्ते को बंद कर दिया था।

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चीन की सरकारी शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गुरुवार को ईरान की सेमी-ऑफिशियल फोर्स न्यूज एजेंसी ने रिवोल्यूशनरी गार्ड-नेवी के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि बुधवार रात से ईरान ने ईरानी मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के हिसाब से 30 चीनी जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि यह रास्ता सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला है। इसके लिए जहाजों को ईरानी नौसेना के साथ सहयोग करना होगा।

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इस बीच, बीजिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अहम मुलाकात हुई। इसको लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारी ने नाम न बताे की सर्त पर बताया कि, दोनों नेता इस बात पर सहमत हैं कि दुनिया में ऊर्जा की सप्लाई जारी रखने के लिए होर्मुज का रास्ता खुला रहना चाहिए। हालांकि, चीन ने अभी तक अमेरिकी दावों पर अपनी तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की है।


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शी जिनपिंग ने जहाजों पर किसी भी तरह का टैक्स या टोल लगाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने भविष्य में इस रास्ते पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से अधिक तेल खरीदने की इच्छा भी जताई। ईरान इस रास्ते का इस्तेमाल ट्रंप पर युद्ध खत्म करने का दबाव बनाने के लिए कर रहा है। इस रास्ते के बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है और सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं।

ईरान ने कभी-कभी अपने स्ट्रेटेजिक साथी चीन के जहाजों को आने दिया है। चीन ईरान का सबसे बड़ा सहयोगी है और अमेरिका के प्रतिबंध के बावजूद उसका तेल खरीदता रहा है। हालांकि, ट्रंप ने जब ईरानी बंदरगाहों की पूरी तरह घेराबंदी की, तो चीन की चिंता बढ़ गई। यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी इस रास्ते के बंद होने पर परेशानी जताई है।

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस रास्ते को खुलवाने में चीन का अमेरिका से भी ज्यादा फायदा है। उन्हें उम्मीद है कि चीन इस संकट को सुलझाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। इससे पहले, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान युद्ध एशिया की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है क्योंकि एशिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है।

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