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हकीकत बनाम अफवाह: क्या सच में ईरान में बेकाबू हैं हालात? प्रदर्शन, मौतों के आंकड़े और अफवाहों पर सरकार की सफाई

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 23 Jan 2026 10:55 PM IST
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सार

दो तरफा खतरों से घिरे ईरान में हालात को लेकर दुनियाभर में सवाल उठ रहे हैं। क्या स्थिति बेकाबू है? मौतों और फांसी के दावों में कितनी सच्चाई है? सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे कितने सटीक है? क्या हकीकत है और क्या अफवाह? इन सभी सवालों पर ईरान की सरकार ने अपनी स्थिति साफ की। आइए जानते हैं।

Iran situation  truly out of control Protests death toll figures and the government response to the rumors
ईरान में हालात - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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ईरान में पिछले कुछ दिनों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहे हैं। पहले जहां लोग महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे, लेकिन अब वहीं विरोध सरकार के खिलाफ राजनीतिक मांगों तक पहुंच गया है। सरकार की सख्ती और दखल के बाद भी ईरान में विरोध प्रदर्शन, मौतों के आंकड़े और हालात को लेकर दुनियाभर में सवाल उठ रहे हैं। सवाल ये पूछे जा रहे हैं कि वर्तमान समय में ईरान की स्थिति कैसी है? सवाल ये भी पूछे जा रहे है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों के आंकड़े में कितनी सच्चाई है? कौन से दावे सच और क्या-क्या के अफवाह? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने क्या सफाई दी?

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सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने वर्तमान समय में ईरान की स्थिति को लेकर सफाई दी है। उनका कहना है कि देश में आर्थिक संकट जरूर है, लेकिन हालात काबू में हैं और सोशल मीडिया पर जो तस्वीर दिखाई जा रही है, वह हकीकत से अलग है। उनका दावा है कि मौतों के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं और इसके पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका है।
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क्या है ईरान की हकीकत और कल्पना?
न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में इलाही ने कहा कि ईरान की स्थिति को समझने के लिए दो चीजों में फर्क करना जरूरी है, हकीकत और कल्पना (अफवाह)। उन्होंने बताया कि ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों (सैंक्शन्स) की वजह से आर्थिक समस्याएं हैं और कुछ लोग इससे नाराज भी हैं। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें इसी गुस्से का फायदा उठाकर अपने मकसद पूरे करने की कोशिश कर रही हैं।उनके शब्दों में कहे तो यह सच है कि ईरान में आर्थिक दिक्कतें हैं, लोग नाराज हैं, लेकिन फिलहाल हालात अच्छे हैं, नियंत्रण में हैं। सोशल मीडिया पर जो बताया जा रहा है, वैसा नहीं है।

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प्रदर्शन और मौतों को लेकर क्या बोले?
ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की मौत हुई है, लेकिन मौतों की संख्या साफ नहीं है। उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में प्रदर्शनकारियों ने आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों और व्यापारियों पर हमला किया और कई लोगों की हत्या कर दी। उनका कहना है कि बाद में इन मौतों का दोष सरकार और पुलिस पर डाल दिया गया, जो सही नहीं है।

विदेशी संगठनों पर आरोप
इस दौरान डॉ. इलाही ने यह भी कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में बैठे कुछ संगठनों ने मौतों के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये आंकड़े फर्जी हैं और सरकार को बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि कई निर्दोष लोग, जो दुकान, अस्पताल या मस्जिद में थे, उन्हें प्रदर्शनकारियों ने मारा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ प्रदर्शनकारी भी मारे गए, लेकिन उनका कहना था कि ऐसा तब हुआ जब उन्होंने पुलिस और आम लोगों पर हमला किया, और पुलिस ने हालात काबू में करने की कोशिश की।

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आईएसआईएस जैसी साजिश का आरोप
डॉ. इलाही ने आरोप लगाया कि ईरान में हालात बिगाड़ने की कोशिश ISIS जैसी सोच से प्रेरित थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह ISIS ने निर्दोष लोगों की हत्या की थी, वैसा ही तरीका अपनाने की कोशिश की गई।उनका कहना है कि कुछ दुश्मन चाहते हैं कि ईरान के समाज में अशांति फैले। गौरतलब है कि ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने पहली बार आधिकारिक आंकड़ा जारी किया है। उसके मुताबिक, हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान 3,117 लोगों की मौत हुई है। हालांकि अभी भी सरकार और आलोचकों के आंकड़ों में अब भी बड़ा अंतर बना हुआ है।

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