International Geopolitics: 'नाटो-अफगानिस्तान पर ट्रंप की टिप्पणियां भयानक', ब्रिटिश PM स्टार्मर ने जताई चिंता
अफगानिस्तान युद्ध पर डोनाल्ड ट्रंप के बयान को लेकर यूरोपीय देशों में खासी नाराजगी देखने को मिल रही है। ब्रिटिश पीएम ने ट्रंप के बयान को बेहद दुखद बताया है। वहीं अन्य का कहना है कि ट्रंप के बयान न सिर्फ गलत हैं, बल्कि उन हजारों सैनिकों के बलिदान का अपमान हैं जिन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी।
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'राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियां बेहद दुखद'
पत्रकारों से बात करते हुए स्टार्मर ने कहा, 'मैं राष्ट्रपति ट्रंप की इन टिप्पणियों को अपमानजनक और सच कहूं तो बेहद दुखद मानता हूं। मुझे हैरानी नहीं है कि इससे उन परिवारों को ठेस पहुंची है, जिनके अपने लोग इस युद्ध में मारे गए या घायल हुए।' जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ट्रंप से माफी की मांग करेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, 'अगर मैंने इस तरह की बात कही होती या ऐसे शब्द बोले होते, तो मैं निश्चित रूप से माफी मांगता।'
VIDEO | London: UK Prime Minister Keir Starmer (@Keir_Starmer) demanded that Donald Trump apologise for claiming that NATO troops avoided the frontline in Afghanistan. He said,
“Let me start begin by paying tribute to the 457 members of our armed forces who lost their lives in… pic.twitter.com/7EFQjCs8w8— Press Trust of India (@PTI_News) January 23, 2026
ब्रिटेन ने अफगानिस्तान युद्ध में 457 सैनिक खोए थे। यह 1950 के दशक के बाद उसका सबसे घातक विदेशी युद्ध था। कई वर्षों तक ब्रिटेन ने अफगानिस्तान के सबसे बड़े और सबसे हिंसक प्रांत हेलमंद में सैन्य अभियान का नेतृत्व किया। इसके अलावा इराक युद्ध में भी वह अमेरिका का मुख्य सहयोगी रहा। ट्रंप ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा था कि अमेरिका को 'कभी भी' इस ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन की जरूरत नहीं पड़ी और सहयोगी देश अफगानिस्तान में 'फ्रंट लाइन से दूर' रहकर लड़े। उनके इस बयान से पहले ही अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में तनाव था, खासकर तब जब ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा दोहराई थी।
ट्रंप के बयान से यूरोपीय देशों में नाराजगी
ट्रंप के बयान पर यूरोप के कई देशों में नाराजगी देखी गई। नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वान वील ने इसे 'गलत और अपमानजनक' बताया। पोलैंड के सेवानिवृत्त जनरल और पूर्व स्पेशल फोर्स कमांडर रोमन पोल्को ने कहा, 'हम इस बयान के लिए माफी की उम्मीद करते हैं। ट्रंप ने एक लाल रेखा पार कर दी है। हमने इस गठबंधन के लिए खून बहाया है। हमने अपनी जानें कुर्बान की हैं।' ब्रिटेन के वेटरन्स मंत्री एलिस्टेयर कार्न्स, जिन्होंने खुद अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के साथ कई बार सेवा दी है, ने ट्रंप के दावों को 'पूरी तरह से बेतुका' बताया। उन्होंने कहा, 'हमने खून, पसीना और आंसू एक साथ बहाए हैं। हर कोई वापस घर नहीं लौट सका।' ब्रिटिश कर्नल स्टुअर्ट टूटल, जो 2006 में हेलमंद भेजे गए पहले ब्रिटिश बैटल ग्रुप के कमांडर थे, ने कहा कि ट्रंप को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने माना कि यूरोपीय देशों के रक्षा खर्च पर ट्रंप की कुछ आलोचनाओं में दम हो सकता है, लेकिन अफगानिस्तान पर दिए गए बयान 'गलत, दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अनुचित' हैं। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई6 के पूर्व प्रमुख रिचर्ड मूर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने और कई एमआई6 अधिकारियों ने सीआईए के बहादुर और सम्मानित अधिकारियों के साथ खतरनाक हालात में काम किया है और अमेरिका जैसे करीबी सहयोगी के साथ काम करने पर उन्हें गर्व है।
नाटो की संधि के अनुच्छेद 5 के तहत किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। इसका इस्तेमाल केवल एक बार हुआ था, 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद, जब सभी देशों ने अमेरिका का साथ देने का वादा किया था। अफगानिस्तान में लंबे समय तक नाटो के नेतृत्व में ही सैन्य अभियान चला।
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नेताओं ने ट्रंप पर साधा निशाना
कुछ नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि ट्रंप ने वियतनाम युद्ध के दौरान पांच बार सैन्य सेवा से छूट ली थी, हड्डियों की समस्या (बोन स्पर्स) का हवाला देकर। ब्रिटेन की लिबरल डेमोक्रेट पार्टी के नेता एड डेवी ने कहा, 'ट्रंप ने पांच बार सैन्य सेवा से बचने का रास्ता निकाला। उन्हें सैनिकों के बलिदान पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं है।' पोलैंड के रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिश ने कहा, 'पोलैंड का बलिदान कभी नहीं भुलाया जाएगा और इसे कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। पोलैंड एक भरोसेमंद और मजबूत सहयोगी है।' डेनमार्क के सांसद रासमस यारलोव ने ट्रंप की टिप्पणियों को 'अज्ञानतापूर्ण' बताया। खास बात यह है कि डेनमार्क पर ही ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका को सौंपने का दबाव बना रहे हैं।
अफगानिस्तान युद्ध में किन देशों के कितने सैनिक मारे गए
अफगानिस्तान युद्ध में सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि कई देशों को भारी नुकसान हुआ। इसमें ब्रिटेन के 457 सैनिक, कनाडा के 150 से अधिक, फ्रांस के लगभग 90 और डेनमार्क के 44 सैनिक (नाटो में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति मौतों में से एक) के साथ-साथ जर्मनी, इटली और अन्य देशों के भी दर्जनों सैनिक मारे गए। अमेरिका ने भी लगभग 2,460 सैनिक खोए। प्रति व्यक्ति के हिसाब से यह आंकड़ा ब्रिटेन और डेनमार्क के बराबर ही माना जाता है।
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