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शांति वार्ता पर संशय: ईरान ने लेबनान में सीजफायर की शर्त रखी; क्या US से बातचीत के लिए PAK नहीं भेजा अपना दल?

एएनआई, तेहरान Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Fri, 10 Apr 2026 11:27 PM IST
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सार

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर ईरान की सख्त शर्तों के कारण संशय बढ़ गया है। ईरान ने जब्त संपत्तियां लौटाने और लेबनान में इस्राइली हमले रोकने की मांग की है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित है। 

Iran US peace talks negotiations Hormuz Strait crisis Israel Lebanon conflict
अमेरिका-ईरान युद्ध - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

पश्चिम एशिया में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं और अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता पर अब संशय गहराता जा रहा है। पाकिस्तान में प्रस्तावित इस बातचीत से पहले ईरान ने ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिससे पूरा मामला उलझ गया है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी तनाव बढ़ गया है, जहां से गुजरने वाले जहाजों को लेकर नई दिक्कतें सामने आ रही हैं। इससे वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।
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जानकारी के मुताबिक ईरान ने साफ कहा है कि जब तक उसकी जब्त संपत्तियां जारी नहीं की जातीं और लेबनान में इस्राइल के हमले नहीं रुकते, तब तक वह किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा। इसके साथ ही ईरान ने वार्ता के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भी नहीं भेजा है। दूसरी ओर पाकिस्तान में बातचीत की तैयारियां जारी हैं, लेकिन हालात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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क्या ईरान की शर्तों ने बातचीत को मुश्किल बना दिया?
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि दो मुख्य शर्तों के बिना बातचीत संभव नहीं है। पहली शर्त लेबनान में इस्राइली हमलों का पूरी तरह रुकना है और दूसरी शर्त ईरान की विदेशों में जब्त संपत्तियों को तुरंत जारी करना है। उन्होंने दावा किया कि इन मुद्दों पर पहले सहमति बनी थी, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ।

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क्या अमेरिका ने भी दिखाई सख्ती?
अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख सामने आया है। पाकिस्तान रवाना होने से पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका सकारात्मक बातचीत चाहता है, लेकिन अगर ईरान ने चालबाजी की तो उसे सख्त जवाब मिलेगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में जहाजों से टोल वसूली को समझौते का उल्लंघन बताया है।

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा संकट?
होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को नियंत्रित कर रहा है और कथित तौर पर भारी टोल वसूल रहा है। यहां करीब 1400 से 2000 जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं। यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, इसलिए इसका असर वैश्विक तेल और गैस की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

क्या इस्राइल-लेबनान संघर्ष भी बना बड़ी बाधा?
लेबनान में इस्राइल के हमले लगातार जारी हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच टकराव बढ़ गया है। इस्राइल ने कई रॉकेट लॉन्चरों को नष्ट करने का दावा किया है, जबकि हिजबुल्लाह ने भी जवाबी हमले किए हैं। इस तनाव के बीच शांति वार्ता का रास्ता और कठिन होता जा रहा है। हालांकि कुछ संकेत ऐसे भी हैं कि इस्राइल अब लेबनान के साथ सीधे बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन जब तक जमीन पर हालात नहीं बदलते, तब तक स्थायी शांति की उम्मीद कमजोर ही नजर आ रही है।

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