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पश्चिम एशिया संकट: बलोच नेता ने इस्राइली पीएम नेतन्याहू को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान की मध्यस्थता को बताया ढोंग
आईएएनएस, क्वेटा
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 10 Apr 2026 09:51 PM IST
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सार
बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं ने इस्राइल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है कि अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता केवल एक कूटनीतिक चाल है। उन्होंने पाकिस्तान पर हमास और अन्य चरमपंथी समूहों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत की भागीदारी के बिना क्षेत्र में कोई भी शांति प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती।
शफी बुरफत, जेएसएमएम अध्यक्ष
- फोटो : @सोशल मीडिया
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विस्तार
पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, प्रमुख बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलोच ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक चिट्ठी लिखी है। इस पत्र के जरिए उन्होंने पाकिस्तान की दोहरी नीति पर निशाना साधा है। अपनी चिट्ठी में उन्होंने न केवल पाकिस्तान में पनप रही 'इस्राइल विरोधी कट्टरता' के बारे में बताया है, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने की पाकिस्तान की कोशिशों को एक बड़ा खतरा करार दिया है।
पाकिस्तानी मंत्री के विवादित बयान का हवाला
मीर यार बलोच ने अपने पत्र में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयानों का जिक्र किया है। बता दें कि ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इस्राइल को 'मानवता पर अभिशाप' कहा था। हालांकि, शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से ठीक पहले उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। इसी को लेकर बलोच नेता का कहना है कि यह केवल एक दिखावा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि ऐसी भाषा केवल भड़काऊ नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान प्रायोजित उग्रवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता का प्रमाण है।
'आतंक का गढ़ है पाकिस्तान'
बलोच नेता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का शांति दूत बनना एक ढोंग है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान का असली मकसद शांति नहीं, बल्कि क्षेत्र में आतंकवाद फैलाना है। उन्होंने पाकिस्तान वाले पंजाब में हमास के समर्थन में आयोजित रैलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान आज हमास, हिजबुल्ला और आईएसआईएस जैसे समूहों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है। मीर ने दावा किया है कि जब तक इस 'आतंकवादी केंद्र' को खत्म नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
'भारत के बिना शांति अधूरी'
बलोच नेताओं के साथ-साथ सिंधी राष्ट्रवादी संगठन 'जीए सिंध मुत्तहिदा महाज' (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने भी पाकिस्तान की आलोचना की है। बुरफत ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की तुलना 'भेड़िये को मेमनों की रखवाली सौंपने' से की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि भारत इस क्षेत्र की एक महाशक्ति है। भारत को दरकिनार कर पश्चिम एशिया या ईरान के साथ किया गया कोई भी राजनीतिक या रणनीतिक समझौता अधूरा और अवैध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को शांति वार्ता की मेजबानी देना वैश्विक सुरक्षा के लिए एक 'दुखद और चिंताजनक' स्थिति है।
यह भी पढ़ें: मथुरा में बड़ा हादसा: यमुना में पुल से टकराकर पलटी नाव, पंजाब के 10 श्रद्धालुओं की मौत; CM योगी ने जताया दुख
बलोचिस्तान का संकल्प
मीर यार बलोच ने अपने पत्र के अंत में इस्राइल और वैश्विक समुदाय को संदेश दिया कि बलोचिस्तान के लोग संघर्ष का जरिया बनने के बजाय शांति के भागीदार बनना चाहते हैं। उन्होंने न केवल बलोचिस्तान की आजादी के लिए समर्थन मांगा, बल्कि एक सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र के निर्माण में साझा हितों की बात भी दोहराई।
बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं ने इस्राइल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है कि अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता केवल एक कूटनीतिक चाल है। उन्होंने पाकिस्तान पर हमास और अन्य चरमपंथी समूहों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत की भागीदारी के बिना क्षेत्र में कोई भी शांति प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती।
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पाकिस्तानी मंत्री के विवादित बयान का हवाला
मीर यार बलोच ने अपने पत्र में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयानों का जिक्र किया है। बता दें कि ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इस्राइल को 'मानवता पर अभिशाप' कहा था। हालांकि, शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से ठीक पहले उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। इसी को लेकर बलोच नेता का कहना है कि यह केवल एक दिखावा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि ऐसी भाषा केवल भड़काऊ नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान प्रायोजित उग्रवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता का प्रमाण है।
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'आतंक का गढ़ है पाकिस्तान'
बलोच नेता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का शांति दूत बनना एक ढोंग है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान का असली मकसद शांति नहीं, बल्कि क्षेत्र में आतंकवाद फैलाना है। उन्होंने पाकिस्तान वाले पंजाब में हमास के समर्थन में आयोजित रैलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान आज हमास, हिजबुल्ला और आईएसआईएस जैसे समूहों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है। मीर ने दावा किया है कि जब तक इस 'आतंकवादी केंद्र' को खत्म नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
'भारत के बिना शांति अधूरी'
बलोच नेताओं के साथ-साथ सिंधी राष्ट्रवादी संगठन 'जीए सिंध मुत्तहिदा महाज' (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने भी पाकिस्तान की आलोचना की है। बुरफत ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की तुलना 'भेड़िये को मेमनों की रखवाली सौंपने' से की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि भारत इस क्षेत्र की एक महाशक्ति है। भारत को दरकिनार कर पश्चिम एशिया या ईरान के साथ किया गया कोई भी राजनीतिक या रणनीतिक समझौता अधूरा और अवैध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को शांति वार्ता की मेजबानी देना वैश्विक सुरक्षा के लिए एक 'दुखद और चिंताजनक' स्थिति है।
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बलोचिस्तान का संकल्प
मीर यार बलोच ने अपने पत्र के अंत में इस्राइल और वैश्विक समुदाय को संदेश दिया कि बलोचिस्तान के लोग संघर्ष का जरिया बनने के बजाय शांति के भागीदार बनना चाहते हैं। उन्होंने न केवल बलोचिस्तान की आजादी के लिए समर्थन मांगा, बल्कि एक सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र के निर्माण में साझा हितों की बात भी दोहराई।
बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं ने इस्राइल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है कि अमेरिका-ईरान विवाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता केवल एक कूटनीतिक चाल है। उन्होंने पाकिस्तान पर हमास और अन्य चरमपंथी समूहों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत की भागीदारी के बिना क्षेत्र में कोई भी शांति प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती।