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फिर होगी नेतन्याहू की कानूनी परीक्षा: जंग के कारण अटका ट्रायल इस्राइली अदालत में दोबारा शुरू होगा; जानिए मामला
एएनआई, तेल अवीव
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 10 Apr 2026 06:00 PM IST
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सार
ईरान के साथ युद्ध के चलते स्थगित हुआ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भ्रष्टाचार ट्रायल रविवार से दोबारा शुरू होने जा रहा है। कोर्ट पर लगी इमरजेंसी पाबंदियां हटा ली गई हैं। नेतन्याहू पर रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोप हैं, और इस मुकदमे का असर अक्टूबर 2026 में होने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।
बेंजामिन नेतन्याहू पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
- फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थितियों के कारण ठप पड़ा बेंजामिन नेतन्याहू का भ्रष्टाचार मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुकदमे की सुनवाई 12 अप्रैल 2026 से यरूशलम की अदालत में फिर शुरू हो रही है। ईरान के साथ संघर्ष की वजह से अदालती कार्यवाही रुकी हुई थी। लेकिन अब यह पुराने शेड्यूल, रविवार से बुधवार के अनुसार चलेगी। वर्तमान में 'केस 4000' पर जिरह चल रही है, जिसमें नेतन्याहू पर रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप हैं।
क्या है पूरा मामला?
बेंजामिन नेतन्याहू पर पिछले कई वर्षों से रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगे हैं। ये मामले तीन मुख्य श्रेणियों में बंटे हुए हैं। इसमें केस 1000, 2000 और 4000 शामिल हैं। इस्राइल के इतिहास में नेतन्याहू पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए अदालती कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
फरवरी के अंत में जब ईरान के साथ संघर्ष चरम पर था और इस्राइल-अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद देश में इमरजेंसी लगा दी गई थी। इस दौरान सुरक्षा कारणों से अदालती कार्यवाही को भी टाल दिया गया था। अब जबकि दो हफ्ते के अस्थायी संघर्ष विराम के बाद स्थितियां कुछ हद तक संभली हैं, तो तेल अवीव जिला अदालत ने सुनवाई को फिर से शुरू करने का आदेश दिया है।
यह भी पढ़ें: बाढ़, भूकंप और भूस्खलन: अफगानिस्तान में अब तक 148 लोगों की मौत, 73 हजार+ लोग प्रभावित; और बिगड़ सकते हैं हालात
अदालती कार्यवाही का समय-सारणी
कोर्ट के नए आदेशों के अनुसार, सुनवाई अपने पुराने समय-सारणी यानी रविवार से बुधवार के बीच आयोजित की जाएगी। रविवार को होने वाली सुनवाई में बचाव पक्ष के एक अहम गवाह की गवाही होने की संभावना है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस बार कोर्ट की कोशिश होगी कि लंबे समय से लटके इस मामले को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
इस ट्रायल की वापसी ने इस्राइल की राजनीति में एक बार फिर उबाल ला दिया है। एक तरफ विपक्षी नेता याइर लैपिड और उनके समर्थक नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के गठबंधन सहयोगी इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं।
ट्रंप ने की थी माफी देने की वकालत
दिलचस्प बात यह भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस्राइली राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से नेतन्याहू को माफी देने की वकालत की थी। हालांकि, हर्जोग के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस्राइल एक कानून से चलने वाला संप्रभु राष्ट्र है और वह बिना किसी बाहरी दबाव के अपने न्यायिक फैसले खुद लेगा। अक्टूबर 2026 में इस्राइल में आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यह ट्रायल न केवल नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, बल्कि वोटरों के बीच उनकी छवि पर भी गहरा असर डालेगा।
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क्या है पूरा मामला?
बेंजामिन नेतन्याहू पर पिछले कई वर्षों से रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगे हैं। ये मामले तीन मुख्य श्रेणियों में बंटे हुए हैं। इसमें केस 1000, 2000 और 4000 शामिल हैं। इस्राइल के इतिहास में नेतन्याहू पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पद पर रहते हुए अदालती कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
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फरवरी के अंत में जब ईरान के साथ संघर्ष चरम पर था और इस्राइल-अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद देश में इमरजेंसी लगा दी गई थी। इस दौरान सुरक्षा कारणों से अदालती कार्यवाही को भी टाल दिया गया था। अब जबकि दो हफ्ते के अस्थायी संघर्ष विराम के बाद स्थितियां कुछ हद तक संभली हैं, तो तेल अवीव जिला अदालत ने सुनवाई को फिर से शुरू करने का आदेश दिया है।
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अदालती कार्यवाही का समय-सारणी
कोर्ट के नए आदेशों के अनुसार, सुनवाई अपने पुराने समय-सारणी यानी रविवार से बुधवार के बीच आयोजित की जाएगी। रविवार को होने वाली सुनवाई में बचाव पक्ष के एक अहम गवाह की गवाही होने की संभावना है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस बार कोर्ट की कोशिश होगी कि लंबे समय से लटके इस मामले को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
इस ट्रायल की वापसी ने इस्राइल की राजनीति में एक बार फिर उबाल ला दिया है। एक तरफ विपक्षी नेता याइर लैपिड और उनके समर्थक नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के गठबंधन सहयोगी इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं।
ट्रंप ने की थी माफी देने की वकालत
दिलचस्प बात यह भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस्राइली राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से नेतन्याहू को माफी देने की वकालत की थी। हालांकि, हर्जोग के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस्राइल एक कानून से चलने वाला संप्रभु राष्ट्र है और वह बिना किसी बाहरी दबाव के अपने न्यायिक फैसले खुद लेगा। अक्टूबर 2026 में इस्राइल में आम चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यह ट्रायल न केवल नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, बल्कि वोटरों के बीच उनकी छवि पर भी गहरा असर डालेगा।
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