Hormuz Toll: होर्मुज के हथियार से अमेरिका क्यों परेशान, युद्ध विराम के बाद इस जलडमरुमध्य पर नया बवाल क्या?
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद भी होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद में है। ईरान जहाजों से टोल वसूली की तैयारी में बताया जा रहा है, जिसे ट्रंप ने सीजफायर उल्लंघन कहा। इधर लेबनान हमलों से तनाव जारी है और जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हुई है।
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के दौरान एक चीज जिसकी चर्चा बहुत ज्यादा हुई, वह है होर्मुज जलडमरूमध्य। लेकिन अब जब युद्धविराम का ऐलान कर दिया गया है, तब भी इसकी चर्चा जारी है। ऐसा क्यों? क्योंकि अब खबरें आ रही हैं कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही के लिए कर वसूलने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल अकाउंट ट्रुथ पर ईरान के इस फैसले की निंदा की है। ट्रंप ने दावा किया कि ऐसा करके ईरान युद्ध विराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। दूसरी तरफ लेबनान पर इस्राइल के हमले जारी हैं। ईरान इसे शर्तों का उल्लंघन बता रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि क्या वास्तव में युद्धविराम हुआ है? क्या ईरान होर्मुज खोलने के लिए तैयार है? क्या ईरान होर्मुज पर कर लगाने जा रहा है? क्या पहले भी यहां जहाजों से कर लिया जाता था? अभी कितने जहाज गुजर रहे हैं? और क्या किसी समुद्री रास्ते के इस्तेमाल के लिए कर वसूला जा सकता है?
ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव के बाद युद्धविराम?
इस समझौते को संभव बनाने में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये ने भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। सोमवार को ईरानी पक्ष ने एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया, जिसे अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने शुरुआत में “तबाही का प्रस्ताव” करार दिया था। इसके बाद पूरे दिन संशोधन का दौर चला, जिसमें मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों ने भी मदद की। अतंत: शर्तों में कई संसोधन के बाद युद्ध विराम पर सहमति बनी।
युद्धविराम के बाद क्या हुआ?
युद्धविराम के बाद भी इस्राइल ने ईरान समर्थित लेबनान पर हमले जारी रखे। इसके चलते लेबनान में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इस्राइल द्वारा लेबनान पर लगातार किए जा रहे हमले क्षेत्रीय युद्धविराम को खतरे में डाल सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
गुरुवार को ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक निर्देश जारी किया है। इसमें जहाजों को लारक द्वीप के आसपास ईरान के जलक्षेत्र से होकर गुजरने को कहा गया है।
इसका कारण यह बताया गया कि जलडमरूमध्य के सामान्य मार्गों पर नौसैनिक बारूदी सुरंगों का खतरा है, जो युद्ध के दौरान लगाई गईं थीं। युद्ध विराम की शर्तों में ईरान की तरफ से होर्मुज खोलना शामिल था। हालांकि, इसमें कहा गया कि जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ईरानी सेना के समन्वय में होगी। साथ ही एक सुरक्षित ट्रांजिट सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिसमें ईरान की प्रमुख भूमिका होगी।
युद्धविराम के बाद जहाजों को लारक द्वीप के आसपास से गुजरने का निर्देश इस बात का संकेत देता है कि ईरान शुल्क वसूली की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। हालांकि, इस क्षेत्र में मौजूद जहाजों को यह चेतावनी भी दी गई है कि बिना अनुमति जलडमरूमध्य पार करने पर उन्हें “निशाना बनाकर नष्ट कर दिया जाएगा।
जब होर्मुज खुला तो जहाजों की संख्या कम क्यों?
सीजफायर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सामान्य नहीं हुई है। रॉयटर्स के अनुसार, Kpler के डेटा के मुताबिक बुधवार को केवल 5 जहाज गुजरे, जो पिछले दिन के 11 जहाजों से कम थे, जबकि गुरुवार को 7 जहाज गुजरे।
इस रुकावट के कारण खाड़ी में 600 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें 325 टैंकर शामिल हैं। युद्ध से पहले यहां से रोज़ 120–140 जहाज गुजरते थे। 10 अप्रैल को भारतीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे तक केवल 15 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई। इनमें से 4 टैंकर तेल, गैस या रसायन ले जा रहे थे, जबकि बाकी बल्क कैरियर या कंटेनर जहाज थे
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ईरान कितना कर वसूलना चाहता है?
ईरान की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह राशि 2 मिलियन डॉलर तक हो सकती है।

क्या युद्ध से पहले भी यहां इस तरह का कर लिया जाता था?
28 फरवरी तक, यानी युद्ध से पहले, यहां सब कुछ सामान्य था। रोज लगभग 120 से 140 जहाज बिना किसी शुल्क के गुजरते थे। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून के अनुसार अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क नहीं लगाया जा सकता। केवल विशेष सेवाओं के लिए ही शुल्क लिया जा सकता है।
ईरान के इस कदम पर अन्य देशों की प्रतिक्रिया क्या है?
लारक द्वीप के रास्ते से गुजरना असामान्य है और इससे जहाजों को कठिनाई हो रही है। पश्चिमी देशों ने किसी भी प्रकार के शुल्क का विरोध किया है। हाल ही में एक भारतीय झंडे वाला LPG जहाज ‘पाइन गैस’ इस मार्ग से गुजरा। जहाज के चीफ ऑफिसर सोहन लाल ने बताया कि कंपनी ने कोई टोल नहीं दिया और IRGC ने जहाज की तलाशी भी नहीं ली।
ईरान के कर वसूलने पर अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों से शुल्क वसूल रहा है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर यह सच है, तो ईरान को तुरंत ऐसा करना बंद करना होगा। उन्होंने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर इस तरह का शुल्क लगाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।