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अमेरिका-ईरान वार्ता पर अटकलें: पूर्व CIA निदेशक बोले- दोनों देश बातचीत के लिए इच्छुक, बढ़ सकता है युद्धविराम

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shubham Kumar Updated Tue, 21 Apr 2026 12:40 PM IST
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सार

अमेरिका-ईरान तनाव नाजुक मोड़ पर है। ऐसे में पूर्व सीआईए निदेशक डेविड एच. पेट्रियस ने कहा दोनों देश बातचीत के इच्छुक हैं, इसलिए युद्धविराम बढ़ सकता है। हालांकि ईरान की भागीदारी अनिश्चित है। 

Iran-US Talks Former CIA Director Says Both Nations Willing to Talk Ceasefire Could Be Extended
डेविड एच. पेट्रियस, अमेरिका के पूर्व सेंट्रल कमांड प्रमुख और पूर्व सीआईए निदेशक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिका के पूर्व सेंट्रल कमांड प्रमुख और पूर्व सीआईए निदेशक डेविड एच. पेट्रियस ने कहा है कि दोनों देश बातचीत जारी रखने के इच्छुक हैं, इसलिए युद्धविराम को आगे बढ़ाए जाने की संभावना ज्यादा है। बता दें कि यह युद्धविराम बुधवार को समाप्त होने वाला है। इसके बीच खबर है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान जाकर ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह इस वार्ता में शामिल होगा या नहीं।

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तनावपूर्ण समय में पेट्रियस ने बताया कि हालात अभी भी काफी नाजुक हैं, खासकर होर्मुज को लेकर। यह दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से बड़े पैमाने पर तेल की आवाजाही होती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान दोनों इस क्षेत्र में एक-दूसरे के खिलाफ दबाव बना रहे हैं, जिससे समुद्री व्यापार पर असर पड़ रहा है।

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कैसे उलझ सकती है स्थिति? समझिए
अपने बयान में पेट्रियस ने कहा कि भले ही अमेरिका को कुछ सैन्य सफलताएं मिली हों, लेकिन अगर समुद्री मार्ग पर नियंत्रण पूरी तरह नहीं मिला तो स्थिति संतुलित या उलझी हुई रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे हालात के अनुसार हवाई हमले या अन्य सैन्य विकल्प भी सामने आ सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध की संभावना कम है। कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच बातचीत की उम्मीद भी है और तनाव भी बना हुआ है। आने वाले कुछ दिन इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकते हैं कि यह शांति की ओर जाएगा या टकराव और बढ़ेगा।

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समझिए क्या चाहता है अमेरिका?
गौरतलब है कि अमेरिका का कहना है कि उसका लक्ष्य इस रास्ते पर ईरान का नियंत्रण खत्म करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही को बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को बंद करे और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को अपने परमाणु भंडार की जांच की अनुमति दे। हालांकि दूसरी ओर ईरान इन शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है और अब तक अपने यूरेनियम कार्यक्रम को रोकने पर सहमत नहीं हुआ है।

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