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Explainer: इस पूर्व राष्ट्रपति को ईरान की सत्ता सौंपना चाहता था इस्राइल; दोस्ती हुई, फिर एक गलती से बिगड़ी बात
Mon, 13 Jul 2026 08:10 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 13 Jul 2026 08:10 PM IST
सार
एनवाईटी ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा किया है कि इस्राइल ने कैसे एक 'कट्टर इस्लामिक नेता' को कई साल तक ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह स्थापित करने की कोशिश की। इसके लिए अमेरिका की मदद से इस्राइल ने उन्हें मदद भी पहुंचाई। हालांकि, एक गलती के बाद दोनों देशों की यह योजना नाकाम हो गई।
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खामेनेई के बाद इस्राइल ने बनाई थी ईरानी नेता को ही देश की गद्दी सौंपने की योजना।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
28 फरवरी 2026, यह वो तारीख थी, जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हमला बोला। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत किए गए इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की जान चली गई थी। उनके साथ उनके परिवार के कई सदस्य और ईरान के शीर्ष कमांडरों की भी मौत हुई थी। इस हमले के ठीक बाद कई धड़ों में यह खबर चली थी कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की भी हमले में मौत हुई है। हालांकि, तब इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। अहमदीनेजाद का लंबे समय तक नजर न आना भी उनकी मौत की आशंका पैदा करता रहा। हालांकि, हाल ही में करीब चार महीने से ज्यादा समय के बाद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जब उनकी झलक दिखाई दी तो यह साफ हो गया कि अहमदीनेजाद न सिर्फ जिंदा हैं, बल्कि बिल्कुल ठीक हैं। हालांकि, उनका इतने लंबे समय तक गायब रहना कई सवाल भी छोड़ गया।
इस सवाल का जवाब हाल ही में अमेरिकी मीडिया संस्थान 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (एनवाईटी) की एक रिपोर्ट में मिला। इसमें कुछ सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अहमदीनेजाद को अमेरिका और इस्राइल युद्ध के खत्म होने के बाद ईरान के संभावित नेता के तौर पर स्थापित करने की योजना बना रहे थे। हालांकि, कुछ गलतियों और गड़बड़ियों के चलते यह नहीं हो पाया।
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इस सवाल का जवाब हाल ही में अमेरिकी मीडिया संस्थान 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (एनवाईटी) की एक रिपोर्ट में मिला। इसमें कुछ सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि अहमदीनेजाद को अमेरिका और इस्राइल युद्ध के खत्म होने के बाद ईरान के संभावित नेता के तौर पर स्थापित करने की योजना बना रहे थे। हालांकि, कुछ गलतियों और गड़बड़ियों के चलते यह नहीं हो पाया।
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अब एनवाईटी ने अपनी एक और रिपोर्ट में खुलासा किया है कि इस्राइल ने कैसे एक 'कट्टर इस्लामिक नेता' के तौर पर पहचाने जाने वाले अहमदीनेजाद से संपर्क साधा? इस्राइल ने अहमदीनेजाद को ईरान में अपने भरोसेमंद के तौर पर स्थापित करने के लिए क्या-क्या किया? क्यों दोनों देशों की यह योजना सफल नहीं हो पाई? अहमदीनेजाद बीते चार महीने कहां-क्यों गायब रहे? आइये जानते हैं...
इस्राइल और अमेरिका ने महमूद अहमदीनेजाद को एक 'खुफिया जरिए' के रूप में तैयार करने के लिए उनके विदेश दौरों और सम्मेलनों को एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल किया।
अहमदीनेजाद अपने राष्ट्रपति कार्यकाल (2005-2013) के दौरान इस्राइल के विनाश का आह्वान करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेज करने के लिए एक कट्टर नेता के रूप में जाने जाते थे। हालांकि, सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने अपने विचारों को नरम कर लिया, उदारवादी दिखने की कोशिश की और व्यवस्था के खिलाफ बोलने लगे। जब ईरानी शासन ने उन्हें राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से बार-बार अयोग्य घोषित किया, तो उनका मोहभंग हो गया और उन्होंने विदेशी शक्तियों की मदद से सत्ता में लौटने की इच्छा जताई।
इस्राइल-अमेरिका ने कैसे पहली बार अहमदीनेजाद से संपर्क साधा?
इस्राइल और अमेरिका ने महमूद अहमदीनेजाद को एक 'खुफिया जरिए' के रूप में तैयार करने के लिए उनके विदेश दौरों और सम्मेलनों को एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल किया।
अहमदीनेजाद अपने राष्ट्रपति कार्यकाल (2005-2013) के दौरान इस्राइल के विनाश का आह्वान करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को तेज करने के लिए एक कट्टर नेता के रूप में जाने जाते थे। हालांकि, सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने अपने विचारों को नरम कर लिया, उदारवादी दिखने की कोशिश की और व्यवस्था के खिलाफ बोलने लगे। जब ईरानी शासन ने उन्हें राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से बार-बार अयोग्य घोषित किया, तो उनका मोहभंग हो गया और उन्होंने विदेशी शक्तियों की मदद से सत्ता में लौटने की इच्छा जताई।
रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
- फोटो : Amar Ujala
बताया जाता है कि इस्राइली खुफिया एजेंसियों ने अहमदीनेजाद और ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के बीच बढ़ती इस दरार पर बारीकी से नजर रखी और इसके बाद उनसे संपर्क की कोशिशें शुरू कर दीं।
सबसे अहम और सीधा संपर्क बुडापेस्ट (हंगरी) में हुआ। हंगेरियन सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के निर्देश पर, लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ़ पब्लिक सर्विस ने जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के नाम पर अहमदीनेजाद को आमंत्रित किया। यह आमंत्रण वास्तव में इस्राइली खुफिया एजेंट्स के साथ उनकी गुप्त चर्चाओं के लिए महज एक आवरण था।
पहली कोशिश: ग्वाटेमाला की यात्रा (2023)
यह स्पष्ट नहीं है कि इस्राइली अधिकारियों ने पहली बार उनसे संपर्क कब किया, लेकिन 2023 में ग्वाटेमाला में एक पर्यावरण सम्मेलन के दौरान उनके बीच कम से कम कुछ संपर्क जरूर हुआ था। अधिकतर लातिन अमेरिकी देशों के मुकाबले ग्वाटेमाला के इस्राइल के साथ काफी घनिष्ठ राजनयिक रिश्ते हैं।
दूसरी सफल कोशिश: हंगरी में अकादमिक सम्मेलन (2024 और 2025)
सबसे अहम और सीधा संपर्क बुडापेस्ट (हंगरी) में हुआ। हंगेरियन सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के निर्देश पर, लुडोविका यूनिवर्सिटी ऑफ़ पब्लिक सर्विस ने जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के नाम पर अहमदीनेजाद को आमंत्रित किया। यह आमंत्रण वास्तव में इस्राइली खुफिया एजेंट्स के साथ उनकी गुप्त चर्चाओं के लिए महज एक आवरण था।
मोसाद प्रमुख के साथ सीधी बैठक: अहमदीनेजाद की भर्ती इस्राइल के लिए इतनी उच्च प्राथमिकता थी कि तत्कालीन मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने 2024 में व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने के लिए हंगरी के बुडापेस्ट की यात्रा की। इस संपर्क के तुरंत बाद, मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईओए) को सूचित किया कि वे अहमदीनेजाद के संपर्क में हैं।
सुरक्षाकर्मियों को चकमा देना: जून 2025 में बुडापेस्ट की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान, अहमदीनेजाद कम से कम दो बार अपने ईरानी सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर लंबी बैठकों के लिए गायब हो गए थे। पूछताछ करने पर उन्होंने बहाना बनाया कि वह विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों से मिल रहे थे। ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स और एक खुफिया अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर एनवाईटी को बताया कि अंसार यूनिट में उनके अंगरक्षकों ने ईरान सरकार को इसकी सूचना भी दी थी।
सुरक्षाकर्मियों को चकमा देना: जून 2025 में बुडापेस्ट की अपनी दूसरी यात्रा के दौरान, अहमदीनेजाद कम से कम दो बार अपने ईरानी सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर लंबी बैठकों के लिए गायब हो गए थे। पूछताछ करने पर उन्होंने बहाना बनाया कि वह विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों से मिल रहे थे। ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स और एक खुफिया अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर एनवाईटी को बताया कि अंसार यूनिट में उनके अंगरक्षकों ने ईरान सरकार को इसकी सूचना भी दी थी।
महमूद अहमदीनेजाद की इस्राइल से मुलाकात।
- फोटो : अमर उजाला
दावा किया जाता है कि इन बैठकों के बाद अमेरिका और इस्राइल ने हाल के वर्षों में आवास और यात्रा के लिए अहमदीनेजाद को गुप्त रूप से पैसे भी दिए। अहमदीनेजाद का मानना था कि अगर अमेरिका और इस्राइल ने ईरान में युद्ध और सत्ता परिवर्तन किया, तो वे किसी बाहरी विपक्षी नेता को चुन सकते हैं, जिससे देश अस्थिर हो जाएगा। इसलिए उन्होंने खुद को एक ऐसे सुधारक नेता के रूप में पेश किया जो सत्ता में आने पर इस्राइल को मान्यता देने और संबंध सामान्य करने के लिए तैयार था।
गौरतलब है कि अहमदीनेजाद वह नेता थे जो कभी इस्राइल के विनाश की बात तक करते थे। ऐसे में इस्राइल का अपनी गुप्त सत्ता-परिवर्तन योजना के लिए उन्हें चुनना एक हैरान करने वाला कदम था। हालांकि, विशेषज्ञों और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्राइल ने उन्हें कुछ खास कारणों और उनकी राजनीतिक खूबियों के चलते चुना था।
इस्राइल ने अहमदीनेजाद को ही स्थापित करने के लिए क्यों चुना?
गौरतलब है कि अहमदीनेजाद वह नेता थे जो कभी इस्राइल के विनाश की बात तक करते थे। ऐसे में इस्राइल का अपनी गुप्त सत्ता-परिवर्तन योजना के लिए उन्हें चुनना एक हैरान करने वाला कदम था। हालांकि, विशेषज्ञों और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्राइल ने उन्हें कुछ खास कारणों और उनकी राजनीतिक खूबियों के चलते चुना था।
1. सर्वोच्च नेता से गहरे मतभेद और व्यवस्था से मोहभंग
इस्राइली खुफिया एजेंसियां अहमदीनेजाद और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच बढ़ती दरार पर बारीकी से नजर रख रही थीं। राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद जब गार्डियन काउंसिल ने उन्हें बार-बार चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया, तो अहमदीनेजाद का ईरानी शासन से पूरी तरह मोहभंग हो गया और उनके मन में खामेनेई के प्रति गहरी नाराजगी पैदा हो गई। सर्वोच्च नेता से इन मतभेदों के कारण उन्हें महज सत्ता प्रतिष्ठान के एक साधारण सदस्य के बजाय एक विरोधी चेहरे के रूप में देखा जाने लगा।
2. इस्राइल को मान्यता देने का वादा
अहमदीनेजाद सत्ता में लौटने के लिए इतने महत्वाकांक्षी थे कि वे विदेशी शक्तियों की मदद लेने को भी तैयार थे। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद उन्होंने अपने करीबियों के बीच खुद को रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन जैसे एक सुधारक नेता के रूप में पेश करना शुर किया। सबसे अहम बात यह थी कि अहमदीनेजाद ने वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आए, तो अब्राहम अकॉर्ड्स (इस्लामिक देशों के इस्राइल से मैत्री संबंध बनाने की पहल) के तहत इस्राइल को मान्यता देंगे और दोनों देशों के संबंध सामान्य करेंगे।
इस्राइली खुफिया एजेंसियां अहमदीनेजाद और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बीच बढ़ती दरार पर बारीकी से नजर रख रही थीं। राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद जब गार्डियन काउंसिल ने उन्हें बार-बार चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया, तो अहमदीनेजाद का ईरानी शासन से पूरी तरह मोहभंग हो गया और उनके मन में खामेनेई के प्रति गहरी नाराजगी पैदा हो गई। सर्वोच्च नेता से इन मतभेदों के कारण उन्हें महज सत्ता प्रतिष्ठान के एक साधारण सदस्य के बजाय एक विरोधी चेहरे के रूप में देखा जाने लगा।
2. इस्राइल को मान्यता देने का वादा
अहमदीनेजाद सत्ता में लौटने के लिए इतने महत्वाकांक्षी थे कि वे विदेशी शक्तियों की मदद लेने को भी तैयार थे। राष्ट्रपति पद से हटने के बाद उन्होंने अपने करीबियों के बीच खुद को रूस के पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन जैसे एक सुधारक नेता के रूप में पेश करना शुर किया। सबसे अहम बात यह थी कि अहमदीनेजाद ने वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आए, तो अब्राहम अकॉर्ड्स (इस्लामिक देशों के इस्राइल से मैत्री संबंध बनाने की पहल) के तहत इस्राइल को मान्यता देंगे और दोनों देशों के संबंध सामान्य करेंगे।
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद।
- फोटो : आईएनएस
3. तीन प्रमुख राजनीतिक खूबियां
विशेषज्ञों के अनुसार, अहमदीनेजाद को चुनने के पीछे उनकी तीन खास खूबियां थीं- उनकी लोकप्रियता, सत्ता के भीतर काम करने का अनुभव, और सर्वोच्च नेतृत्व से उनके मतभेद।
4. सत्ता प्रतिष्ठान और जमीनी हकीकत की समझ
इस्राइल को यह पता था कि अहमदीनेजाद ईरान में एक बहुत जाना-पहचाना नाम हैं और उनके पास सरकार चलाने का लंबा अनुभव है। उन्हें समाज के निचले तबकों (वर्किंग-क्लास) की समस्याओं और उनकी भाषा की बहुत अच्छी समझ है। साथ ही, वे इस्लामिक गणराज्य की मौजूदा सत्ता व्यवस्था की कमजोरियों और कार्यप्रणाली से भी भली-भांति परिचित हैं।
5. संकट में उपयोगी हथियार
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी इन्हीं खूबियों की वजह से युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता के दौर में उन्हें एक उपयोगी व्यक्ति के रूप में देखा गया। इस्राइल के लिए वे कोई करीबी सहयोगी नहीं, बल्कि ईरानी सत्ता के भीतर दरार पैदा करने और मौजूदा सरकार को गिराने के लिए एक बेहद उपयोगी 'अस्थायी चेहरे' के रूप में काम आ सकते थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, अहमदीनेजाद को चुनने के पीछे उनकी तीन खास खूबियां थीं- उनकी लोकप्रियता, सत्ता के भीतर काम करने का अनुभव, और सर्वोच्च नेतृत्व से उनके मतभेद।
4. सत्ता प्रतिष्ठान और जमीनी हकीकत की समझ
इस्राइल को यह पता था कि अहमदीनेजाद ईरान में एक बहुत जाना-पहचाना नाम हैं और उनके पास सरकार चलाने का लंबा अनुभव है। उन्हें समाज के निचले तबकों (वर्किंग-क्लास) की समस्याओं और उनकी भाषा की बहुत अच्छी समझ है। साथ ही, वे इस्लामिक गणराज्य की मौजूदा सत्ता व्यवस्था की कमजोरियों और कार्यप्रणाली से भी भली-भांति परिचित हैं।
5. संकट में उपयोगी हथियार
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी इन्हीं खूबियों की वजह से युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता के दौर में उन्हें एक उपयोगी व्यक्ति के रूप में देखा गया। इस्राइल के लिए वे कोई करीबी सहयोगी नहीं, बल्कि ईरानी सत्ता के भीतर दरार पैदा करने और मौजूदा सरकार को गिराने के लिए एक बेहद उपयोगी 'अस्थायी चेहरे' के रूप में काम आ सकते थे।
योजना में कैसे हुए गड़बड़?
- फोटो : Amar Ujala Graphics
क्यों इस्राइल-अमेरिका की अहमदीनेजाद को लेकर योजना सफल नहीं हो पाई?
अहमदीनेजाद को सत्ता में लाने की इस्राइल और अमेरिका की योजना के विफल होने के पीछे मीनी अभियानों में आई गड़बड़ी और रणनीतिक कमियां, दोनों प्रमुख कारण थे। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी और इस्राइली सूत्रों के हवाले से इसके कई कारण सामने रखे हैं...1. ईरान पर हमले और रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हुआ मोहभंग
जब इस्राइल ने तेहरान में अहमदीनेजाद के परिसर पर हवाई हमला किया और मोसाद के एजेंट्स ने इसी बीच उन्हें अफरा-तफरी में निकालकर एक गुप्त सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचाया, तो अहमदीनेजाद इस खतरनाक और बेतरतीब रेस्क्यू ऑपरेशन से बहुत परेशान हो गए। बताया जाता है कि इस घटनाक्रम के बाद उन्हें सत्ता में वापस लाने की इस्राइली योजना से उनका मोहभंग हो गया और वे कुछ समय बाद उस सुरक्षित ठिकाने से खुद ही चले गए।
2. ईरानी खुफिया एजेंसियों को लग चुकी थी भनक
अहमदीनेजाद की इस्राइली खुफिया एजेंट्स के साथ मुलाकातों और बातचीत की जानकारी ईरान की शक्तिशाली सैन्य संस्था- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की खुफिया शाखा को भी लग गई थी।
3. सैन्य और सत्ता के समर्थन की कमी
इस्राइली सुरक्षा विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविक्ज और अन्य के मुताबिक, अहमदीनेजाद को ताज पहनाने की कोशिश यह दिखाती है कि विदेशी खुफिया एजेंसियों ने ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को ठीक से नहीं समझा। अहमदीनेजाद के पास सत्ता का कोई मजबूत आधार नहीं था और न ही उन्हें ईरान की ताकतवर सेना- आईआरजीसी का समर्थन मिलने की कोई संभावना थी।
4. अमेरिका-इस्राइल हमलों के बावजूद ईरानी व्यवस्था का पूरी तरह न टूटना
विशेषज्ञों का मानना है कि अहमदीनेजाद तभी सत्ता पर कब्जा कर सकते थे जब ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाती। लेकिन अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बावजूद ईरान की राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह से नहीं टूटी, बल्कि इन हमलों के बाद और एकजुट हो गई।
इस्राइली सुरक्षा मामलों के अनुभवी विशेषज्ञ योसी मेलमैन के मुताबिक, मह कुछ हवाई हमलों और छोटे विद्रोहों के जरिए ईरान की सरकार गिराने की कल्पना पूरी तरह से अवास्तविक थी और यह दर्शाती है कि इस्राइल-अमेरिका के योजना बनाने वाले लोग जमीनी हकीकत से काफी दूर थे।
इस्राइली सुरक्षा विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविक्ज और अन्य के मुताबिक, अहमदीनेजाद को ताज पहनाने की कोशिश यह दिखाती है कि विदेशी खुफिया एजेंसियों ने ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को ठीक से नहीं समझा। अहमदीनेजाद के पास सत्ता का कोई मजबूत आधार नहीं था और न ही उन्हें ईरान की ताकतवर सेना- आईआरजीसी का समर्थन मिलने की कोई संभावना थी।
4. अमेरिका-इस्राइल हमलों के बावजूद ईरानी व्यवस्था का पूरी तरह न टूटना
विशेषज्ञों का मानना है कि अहमदीनेजाद तभी सत्ता पर कब्जा कर सकते थे जब ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाती। लेकिन अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बावजूद ईरान की राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह से नहीं टूटी, बल्कि इन हमलों के बाद और एकजुट हो गई।
इस्राइली सुरक्षा मामलों के अनुभवी विशेषज्ञ योसी मेलमैन के मुताबिक, मह कुछ हवाई हमलों और छोटे विद्रोहों के जरिए ईरान की सरकार गिराने की कल्पना पूरी तरह से अवास्तविक थी और यह दर्शाती है कि इस्राइल-अमेरिका के योजना बनाने वाले लोग जमीनी हकीकत से काफी दूर थे।
अहमदीनेजाद बीते चार महीने कहां-क्यों गायब रहे?
बीते चार महीनों (फरवरी के अंत से लेकर हाल ही तक) में महमूद अहमदीनेजाद के सार्वजनिक रूप से गायब रहे हैं। हालांकि, अली खामेनेई के अंतिम कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान उनके लापता होने का पूरा घटनाक्रम कुछ ऐसा रहा...इस्राइल के रेस्क्यू अभियान से हुआ अहमदीनेजाद का मोहभंग
- अमेरिका-इस्राइल की तरफ से ईरान पर हमलों के दौरान इस्राइली एजेंट्स ने अहमदीनेजाद को ईरान की कड़ी निगरानी से निकालने के लिए उनके तेहरान स्थित परिसर पर भी हवाई हमला किया। हमले के तुरंत बाद मची अफरा-तफरी के बीच, मोसाद के एजेंट्स एक काली प्यूजो कार में वहां पहुंचे और अहमदीनेजाद को निकालकर ईरान में ही एक गुप्त सुरक्षित स्थान पर ले गए।
- अहमदीनेजाद इस खतरनाक बचाव अभियान से बहुत परेशान हो गए और उन्हें सत्ता में वापस लाने की इस्राइली योजना से उनका मोहभंग हो गया। जिसके बाद वे अज्ञात परिस्थितियों में उस गुप्त ठिकाने से चले गए।
अभी अहमदीनेजाद कहां-किस हालात में हैं?
मौजूदा समय में अहमदीनेजाद को आईआरजीसी की खुफिया इकाई की हिरासत में नजरबंद किया गया है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ईरानी अधिकारियों को इस्राइल के साथ अहमदीनेजाद की गुप्त मुलाकातों और संबंधों का पता चल गया था।
इसके चलते फरवरी के अंत में गुप्त सुरक्षित ठिकाने पर ले जाए जाने के बाद से अहमदीनेजाद को सार्वजनिक रूप से बिल्कुल नहीं देखा गया था। वह बीते सोमवार को पहली बार अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में कुछ समय के लिए दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने भारी जैकेट और ठुड्डी तक एक सर्जिकल मास्क पहना हुआ था और वे चारों तरफ से सुरक्षाकर्मियों से घिरे हुए थे। इसके अलावा उनके ठिकानों की सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मौजूदा समय में अहमदीनेजाद को आईआरजीसी की खुफिया इकाई की हिरासत में नजरबंद किया गया है। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि ईरानी अधिकारियों को इस्राइल के साथ अहमदीनेजाद की गुप्त मुलाकातों और संबंधों का पता चल गया था।
इसके चलते फरवरी के अंत में गुप्त सुरक्षित ठिकाने पर ले जाए जाने के बाद से अहमदीनेजाद को सार्वजनिक रूप से बिल्कुल नहीं देखा गया था। वह बीते सोमवार को पहली बार अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में कुछ समय के लिए दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने भारी जैकेट और ठुड्डी तक एक सर्जिकल मास्क पहना हुआ था और वे चारों तरफ से सुरक्षाकर्मियों से घिरे हुए थे। इसके अलावा उनके ठिकानों की सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।