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ईरान की नाकेबंदी कब से?: अमेरिकी सेना ने बताया, होर्मुज में शुल्क वसूली को लेकर अराघची ने ट्रंप पर कसा तंज
Tue, 14 Jul 2026 02:43 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 14 Jul 2026 02:43 AM IST
सार
होर्मुज जलडमरूमध्य में शुल्क वसूली और समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी फिर लागू करने का एलान किया है, जबकि ईरान ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य
- फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
होर्मुज जलडमरूमध्य पर शुल्क वसूली को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने आ गए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका मंगलवार से ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी फिर लागू करेगा। यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी जहाजों पर लागू होगी।
अमेरिकी नौसेना के सेंट्रल कमांड ने कहा कि नाकेबंदी 14 जुलाई को अमेरिकी समयानुसार शाम चार बजे से प्रभावी होगी। यह सभी देशों के झंडे वाले जहाजों पर लागू होगी और ईरान के बंदरगाहों, तेल टर्मिनलों तथा तटीय क्षेत्रों को कवर करेगी।
सेंटकॉम ने की नाकेबंदी की पुष्टि
सेंट्रल कमांड की एडवाइजरी में कहा गया, 'नाकेबंदी वाले क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले किसी भी संदिग्ध जहाज को रोका जा सकता है, उसका रास्ता बदला जा सकता है या उसे कब्जे में लिया जा सकता है। आदेशों का पालन नहीं करने वाले जहाजों के खिलाफ कानूनी रूप से बल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।'
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात की नाकेबंदी फिर शुरू करेंगे। सेंटकॉम ने बयान में कहा, 'सेंटकॉम बल ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की ओर जाने या वहां से आने वाले जहाजों के खिलाफ नाकेबंदी लागू करेंगे। अमेरिकी सेना उन सभी जहाजों की क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आवाजाही का समर्थन करती रहेगी जो इस नाकेबंदी का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं।'
अमेरिकी सेना ने तैनात किए कितने युद्धपोत?
अमेरिकी सेना ने कहा कि यह अभियान 13 अप्रैल से 18 जून तक लागू रही पिछली नाकेबंदी के बाद दोबारा शुरू किया जा रहा है। उस दौरान अमेरिकी बलों ने 140 से अधिक नियमों का पालन करने वाले जहाजों का मार्ग बदला था, नौ आदेश नहीं मानने वाले जहाजों को निष्क्रिय किया था और 50 से अधिक मानवीय सहायता ले जा रहे जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी।
व्यावसायिक जहाजों के चालक दल को ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास परिचालन के दौरान आधिकारिक नौवहन सूचनाओं पर नजर रखने और अमेरिकी नौसैनिक बलों से संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में इस समय नौसेना के 19 जहाज तैनात किए हैं। इनमें दो विमानवाहक पोत और 10 से अधिक विध्वंसक युद्धपोत शामिल हैं।
ये भी पढ़ें: '20% बहुत ज्यादा है': होर्मुज में शुल्क वसूली पर अमेरिका-ईरान आमने-सामने, अराघची बोले- असली संरक्षक हम हैं
ट्रंप ने होर्मुज में 20 फीसदी शुल्क का किया एलान
इससे पहले सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका 'ईरानी नाकेबंदी' को फिर लागू करेगा और खुद को होर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक बनाएगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हम 'ईरानी नाकेबंदी' को फिर लागू कर रहे हैं। बाकी सभी देशों को जलडमरूमध्य का निष्पक्ष और खुला उपयोग मिलता रहेगा।'
उन्होंने यह भी कहा कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक माल पर उसके मूल्य का 20 फीसदी शुल्क लिया जाएगा, ताकि जलडमरूमध्य में सुरक्षा उपलब्ध कराने पर होने वाले अमेरिकी खर्च की भरपाई की जा सके। यह प्रस्ताव अमेरिका की उस लंबे समय से चली आ रही नीति से अलग है, जिसके तहत जलडमरूमध्य को बिना किसी पारगमन शुल्क के सभी जहाजों के लिए खुला रखने का समर्थन किया जाता रहा है।
ये भी पढ़ें: UNSC: भारत ने यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता के लिए शुरू किया अभियान, सीट के दावे पर क्या बोले एस जयशंकर?
ट्रंप के शुल्क वसूली के पैंतरे पर क्या बोला ईरान?
अमेरिका की होर्मुज में शुल्क वसूली की घोषणा पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान ने वॉशिंगटन पर क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने का आरोप लगाया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर ट्रंप के प्रस्ताव का व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब दिया।
उन्होंने लिखा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति बिल्कुल सही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने वाला पक्ष इस सेवा के बदले भुगतान पाने का हकदार है। ईरान हमेशा से इस जलडमरूमध्य का संरक्षक रहा है और हमेशा रहेगा। 20 फीसदी निश्चित रूप से बहुत ज्यादा है। हम निष्पक्ष रहेंगे।' अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने भी दोहराया है कि किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अनिवार्य शुल्क लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
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अमेरिकी नौसेना के सेंट्रल कमांड ने कहा कि नाकेबंदी 14 जुलाई को अमेरिकी समयानुसार शाम चार बजे से प्रभावी होगी। यह सभी देशों के झंडे वाले जहाजों पर लागू होगी और ईरान के बंदरगाहों, तेल टर्मिनलों तथा तटीय क्षेत्रों को कवर करेगी।
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सेंटकॉम ने की नाकेबंदी की पुष्टि
सेंट्रल कमांड की एडवाइजरी में कहा गया, 'नाकेबंदी वाले क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले किसी भी संदिग्ध जहाज को रोका जा सकता है, उसका रास्ता बदला जा सकता है या उसे कब्जे में लिया जा सकता है। आदेशों का पालन नहीं करने वाले जहाजों के खिलाफ कानूनी रूप से बल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।'
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले समुद्री यातायात की नाकेबंदी फिर शुरू करेंगे। सेंटकॉम ने बयान में कहा, 'सेंटकॉम बल ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की ओर जाने या वहां से आने वाले जहाजों के खिलाफ नाकेबंदी लागू करेंगे। अमेरिकी सेना उन सभी जहाजों की क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आवाजाही का समर्थन करती रहेगी जो इस नाकेबंदी का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं।'
अमेरिकी सेना ने तैनात किए कितने युद्धपोत?
अमेरिकी सेना ने कहा कि यह अभियान 13 अप्रैल से 18 जून तक लागू रही पिछली नाकेबंदी के बाद दोबारा शुरू किया जा रहा है। उस दौरान अमेरिकी बलों ने 140 से अधिक नियमों का पालन करने वाले जहाजों का मार्ग बदला था, नौ आदेश नहीं मानने वाले जहाजों को निष्क्रिय किया था और 50 से अधिक मानवीय सहायता ले जा रहे जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी।
व्यावसायिक जहाजों के चालक दल को ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास परिचालन के दौरान आधिकारिक नौवहन सूचनाओं पर नजर रखने और अमेरिकी नौसैनिक बलों से संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में इस समय नौसेना के 19 जहाज तैनात किए हैं। इनमें दो विमानवाहक पोत और 10 से अधिक विध्वंसक युद्धपोत शामिल हैं।
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ट्रंप ने होर्मुज में 20 फीसदी शुल्क का किया एलान
इससे पहले सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका 'ईरानी नाकेबंदी' को फिर लागू करेगा और खुद को होर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक बनाएगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हम 'ईरानी नाकेबंदी' को फिर लागू कर रहे हैं। बाकी सभी देशों को जलडमरूमध्य का निष्पक्ष और खुला उपयोग मिलता रहेगा।'
उन्होंने यह भी कहा कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक माल पर उसके मूल्य का 20 फीसदी शुल्क लिया जाएगा, ताकि जलडमरूमध्य में सुरक्षा उपलब्ध कराने पर होने वाले अमेरिकी खर्च की भरपाई की जा सके। यह प्रस्ताव अमेरिका की उस लंबे समय से चली आ रही नीति से अलग है, जिसके तहत जलडमरूमध्य को बिना किसी पारगमन शुल्क के सभी जहाजों के लिए खुला रखने का समर्थन किया जाता रहा है।
ये भी पढ़ें: UNSC: भारत ने यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता के लिए शुरू किया अभियान, सीट के दावे पर क्या बोले एस जयशंकर?
ट्रंप के शुल्क वसूली के पैंतरे पर क्या बोला ईरान?
अमेरिका की होर्मुज में शुल्क वसूली की घोषणा पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान ने वॉशिंगटन पर क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करने का आरोप लगाया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर ट्रंप के प्रस्ताव का व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब दिया।
उन्होंने लिखा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति बिल्कुल सही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने वाला पक्ष इस सेवा के बदले भुगतान पाने का हकदार है। ईरान हमेशा से इस जलडमरूमध्य का संरक्षक रहा है और हमेशा रहेगा। 20 फीसदी निश्चित रूप से बहुत ज्यादा है। हम निष्पक्ष रहेंगे।' अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने भी दोहराया है कि किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अनिवार्य शुल्क लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।