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Mars: मंगल पर था भरपूर पानी, धूल भरी आंधियों ने अंतरिक्ष में उड़ा दिया; जानें कैसे हुआ खत्म
अमर उजाला नेटवर्क, टोक्यो/सेन्दाई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 01 Apr 2026 05:42 AM IST
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सार
वैज्ञानिकों ने मार्टियन वर्ष 37 (पृथ्वी के 2022–2023) के दौरान एक असामान्य स्थानीय धूल-तूफान का अध्ययन किया। इस दौरान मंगल के मध्य वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा सामान्य स्तर से लगभग दस गुना तक बढ़ गई। इतनी अधिक वृद्धि पहले कभी दर्ज नहीं की गई थी और मौजूदा जलवायु मॉडल भी इसकी भविष्यवाणी नहीं कर पाए थे।
मंगल ग्रह
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
कभी जलसमृद्ध रहा मंगल आज सूखा मरुस्थल क्यों बन गया, इस लंबे समय से अनसुलझे सवाल पर नई रोशनी डालते हुए वैज्ञानिकों ने पाया है कि छोटे, स्थानीय धूलभरे-तूफान भी ग्रह के पानी को अंतरिक्ष में उड़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
तोहोकू यूनिवर्सिटी समेत अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम के इस अध्ययन में सामने आया है कि ये तूफान जलवाष्प को ऊपरी वायुमंडल तक पहुंचाकर उसे तोड़ देते हैं, जिससे हाइड्रोजन अंतरिक्ष में निकल जाता है और पानी स्थायी रूप से खत्म होता जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार आज का मंगल एक ठंडा और सूखा ग्रह है, लेकिन इसकी सतह पर मौजूद प्राचीन जलधाराएं, पानी से बदले खनिज और अन्य भूगर्भीय संकेत बताते हैं कि कभी यहां प्रचुर मात्रा में पानी मौजूद था।
वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह पानी कहां और कैसे गायब हो गया। हालांकि कुछ प्रक्रियाएं पहचानी जा चुकी हैं, लेकिन मंगल के गायब पानी का बड़ा हिस्सा अब भी एक पहेली बना हुआ है। कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट जर्नल में प्रकाशित इस नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। शोध में पाया गया कि अपेक्षाकृत छोटे और स्थानीय धूल-तूफान भी मंगल के उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों के दौरान जलवाष्प को वायुमंडल में काफी ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं।
मार्टियन वर्ष 37 में असामान्य उछाल
वैज्ञानिकों ने मार्टियन वर्ष 37 (पृथ्वी के 2022–2023) के दौरान एक असामान्य स्थानीय धूल-तूफान का अध्ययन किया। इस दौरान मंगल के मध्य वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा सामान्य स्तर से लगभग दस गुना तक बढ़ गई। इतनी अधिक वृद्धि पहले कभी दर्ज नहीं की गई थी और मौजूदा जलवायु मॉडल भी इसकी भविष्यवाणी नहीं कर पाए थे। हाइड्रोजन का बढ़ना पानी के नुकसान का सीधा संकेत है। जलवाष्प के ऊंचाई तक पहुंचने के बाद वैज्ञानिकों ने एक्सोबेस,जहां से मंगल का वायुमंडल अंतरिक्ष में बदलने लगता है,पर हाइड्रोजन की मात्रा में तेज वृद्धि दर्ज की। यह स्तर सामान्य से 2.5 गुना अधिक था।
कई अंतरिक्ष मिशनों के डाटा से खुला राज
यह अध्ययन कई अंतरराष्ट्रीय मंगल मिशनों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है। इनमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के एक्सोमार्स मिशन का ट्रेस गैस ऑर्बिटर (टीजीओ) और उसका नोमैड उपकरण, नासा का मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एमआरओ) और एमिरेट्स मार्स मिशन (ईएमएम) शामिल हैं। ये सभी यान फिलहाल मंगल की कक्षा में सक्रिय हैं और लगातार डेटा भेज रहे हैं।
यह अध्ययन संकेत देता है कि मंगल से पानी का नुकसान केवल बड़े वैश्विक तूफानों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और स्थानीय धूल-तूफान भी इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे एक समय का जलसमृद्ध ग्रह धीरे-धीरे सूखे और निर्जीव मरुस्थल में बदल गया।
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वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर यह पानी कहां और कैसे गायब हो गया। हालांकि कुछ प्रक्रियाएं पहचानी जा चुकी हैं, लेकिन मंगल के गायब पानी का बड़ा हिस्सा अब भी एक पहेली बना हुआ है। कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट जर्नल में प्रकाशित इस नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। शोध में पाया गया कि अपेक्षाकृत छोटे और स्थानीय धूल-तूफान भी मंगल के उत्तरी गोलार्ध की गर्मियों के दौरान जलवाष्प को वायुमंडल में काफी ऊंचाई तक पहुंचा सकते हैं।
मार्टियन वर्ष 37 में असामान्य उछाल
वैज्ञानिकों ने मार्टियन वर्ष 37 (पृथ्वी के 2022–2023) के दौरान एक असामान्य स्थानीय धूल-तूफान का अध्ययन किया। इस दौरान मंगल के मध्य वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा सामान्य स्तर से लगभग दस गुना तक बढ़ गई। इतनी अधिक वृद्धि पहले कभी दर्ज नहीं की गई थी और मौजूदा जलवायु मॉडल भी इसकी भविष्यवाणी नहीं कर पाए थे। हाइड्रोजन का बढ़ना पानी के नुकसान का सीधा संकेत है। जलवाष्प के ऊंचाई तक पहुंचने के बाद वैज्ञानिकों ने एक्सोबेस,जहां से मंगल का वायुमंडल अंतरिक्ष में बदलने लगता है,पर हाइड्रोजन की मात्रा में तेज वृद्धि दर्ज की। यह स्तर सामान्य से 2.5 गुना अधिक था।
कई अंतरिक्ष मिशनों के डाटा से खुला राज
यह अध्ययन कई अंतरराष्ट्रीय मंगल मिशनों से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है। इनमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के एक्सोमार्स मिशन का ट्रेस गैस ऑर्बिटर (टीजीओ) और उसका नोमैड उपकरण, नासा का मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एमआरओ) और एमिरेट्स मार्स मिशन (ईएमएम) शामिल हैं। ये सभी यान फिलहाल मंगल की कक्षा में सक्रिय हैं और लगातार डेटा भेज रहे हैं।
यह अध्ययन संकेत देता है कि मंगल से पानी का नुकसान केवल बड़े वैश्विक तूफानों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और स्थानीय धूल-तूफान भी इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे एक समय का जलसमृद्ध ग्रह धीरे-धीरे सूखे और निर्जीव मरुस्थल में बदल गया।
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