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Nepal: केपी ओली की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट का बालेंद्र शाह सरकार को नोटिस, पूर्व PM की रिहाई से किया इनकार

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 30 Mar 2026 08:28 PM IST
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सार

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बीते साल हुए जेन जी आंदोलन के खिलाफ भूमिका के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सरकार ने गिरफ्तारी को न्यायिक प्रक्रिया बताया है। वहीं ओली ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं।

Nepal Supreme Court issues notice to Balendra Shah government over KP Oli arrest refuses to release former PM
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी और हिरासत के मामले में नवगठित बालेंद्र शाह सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।
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यह नोटिस ओली की पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जवाब में जारी किया गया है। शाक्य ने याचिका में अपने पति की तत्काल रिहाई की मांग की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति मेघराज पोखरेल की एकल पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
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जेन-जी आंदोलन के खिलाफ भूमिका का आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ओली को 28 मार्च को पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों में उनकी कथित संलिप्तता के कारण गिरफ्तार किया गया था। इन प्रदर्शनों में 76 लोगों की मौत हो गई थी। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई, जब नवगठित बालेंद्र शाह सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जन-विद्रोह से संबंधित जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया था।

पत्नी की याचिका में अवैध हिरासत का दावा
राधिका शाक्य ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उनके पति को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता टीकाराम भट्टराई ने तर्क दिया कि तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी करके केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि गौरी बहादुर कार्की जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किसी को चुनिंदा रूप से गिरफ्तार करना अवैध है।

भट्टराई ने यह भी तर्क दिया कि सरकार ने अभी तक आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। पूर्व अटॉर्नी जनरल रमेश बादल ने सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हुए कहा कि ओली को व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर रिहा किया जाना चाहिए।

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पहले भी जारी हुआ है कारण बताओ नोटिस
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखी की ओर से दायर याचिका पर भी इसी तरह का कारण बताओ नोटिस जारी किया था। ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखी को काठमांडू जिला अदालत ने रविवार को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस बीच, देश के विभिन्न हिस्सों में गिरफ्तारियों के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं।

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