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PM मोदी की अपील पर नियम क्या: किन देशों ने लागू किया वर्क फ्रॉम होम, क्या खुद घर से काम कर सकते हैं कर्मचारी?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 13 May 2026 08:13 PM IST
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सार
ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हुए अब दो महीने बीत चुके हैं। इसका सीधा असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोलियम उत्पादों का संयमित उपयोग करने की अपील की है।
पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम की अपील।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका और इस्राइल की ईरान पर की गई कार्रवाई के बाद से ही पूरे पश्चिम एशिया में स्थिति तनावपूर्ण है। इसका असर अब दुनिया पर दिखने लगा है। भारत भी इसके असर से अछूता नहीं है और इस क्षेत्र से आने वाले तेल-गैस के साथ कुछ अन्य जरूरी वस्तुओं का संकट गहराता दिख रहा है। इसी स्थिति का असर ही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार और सोमवार को देशवासियों से बचत से जुड़ी कुछ अपील करनी पड़ी है। इनमें पेट्रोल-डीजल के संयम से इस्तेमाल के साथ-साथ लोगों से विदेशी उत्पाद और सोने की खरीद को कम करने जैसी अपील शामिल हैं।
पीएम मोदी के इन सभी अनुरोधों के बीच एक अपील पर आम लोगों खासकर नौकरी करने वालों का सबसे ज्यादा ध्यान गया है। यह अपील थी- वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने के विकल्प को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने की।
आखिर वर्क फ्रॉम होम को लेकर भारत में नियम क्या हैं? अगर पीएम ने देशवासियों से ज्यादा से ज्यादा वर्क फ्रॉम होम करने की अपील की है तो क्या सरकारी या निजी कर्मचारी खुद से इस अपील को मानते हुए घर से काम शुरू कर सकते हैं? श्रम कानून इसे लेकर क्या कहता है? कोरोनाकाल में यह किस तर्ज पर लागू हुआ था? संकट की स्थिति में किस-किस देश ने वर्क फ्रॉम होम को लागू किया है? आइये जानते हैं...
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पीएम मोदी के इन सभी अनुरोधों के बीच एक अपील पर आम लोगों खासकर नौकरी करने वालों का सबसे ज्यादा ध्यान गया है। यह अपील थी- वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने के विकल्प को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने की।
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आखिर वर्क फ्रॉम होम को लेकर भारत में नियम क्या हैं? अगर पीएम ने देशवासियों से ज्यादा से ज्यादा वर्क फ्रॉम होम करने की अपील की है तो क्या सरकारी या निजी कर्मचारी खुद से इस अपील को मानते हुए घर से काम शुरू कर सकते हैं? श्रम कानून इसे लेकर क्या कहता है? कोरोनाकाल में यह किस तर्ज पर लागू हुआ था? संकट की स्थिति में किस-किस देश ने वर्क फ्रॉम होम को लागू किया है? आइये जानते हैं...
पहले जानें- क्या भारत में वर्क फ्रॉम होम को लेकर कोई कानून है?
मौजूदा समय में भारत के श्रम कानूनों में कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस तरह की कार्य व्यवस्था मुख्य रूप से नौकरी के अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट पर, कंपनी की एचआर नीति, और कर्मचारी और नियुक्ति देने वाले के बीच आपसी समझौते से तय की जाती है।- भारतीय अनुबंध नियमों के मुताबिक, कंपनियों या नियोक्ताओं (एम्प्लॉयर्स) को कर्मचारियों की उपस्थिति के नियम और काम करने के स्थान को तय करने का पूरा अधिकार है।
- भारत में व्हाइट-कॉलर (ऑफिस या डेस्क में बैठकर करने वाली) नौकरियों को नियंत्रित करने वाले राज्य-स्तरीय शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट, एक्ट में भी वर्क फ्रॉम होम का कोई अधिकार नहीं दिया गया है।
- अलग से कोई कानूनी ढांचा न होने के कारण नियुक्ति देने वाला/वाले कानूनी तौर पर कर्मचारियों को कभी भी और कैसे भी ऑफिस आकर काम करने के लिए कह सकते हैं।
क्या कोविड काल के बाद लागू हुए नए श्रम कानूनों में वर्क फ्रॉम होम के लिए कोई प्रावधान?
केंद्र सरकार की तरफ से 2025 में लागू किए गए चार नई श्रम संहिताओं में पहली बार रिमोट वर्क और हाइब्रिड वर्क को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है। हालांकि, इसमें भी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का कोई स्पष्ट अधिकार नहीं दिया गया है। यानी यह पूरी तरह से एम्प्लॉयर और कर्मचारी के बीच की स्थिति पर छोड़ा गया है कि उसे वर्क फ्रॉम होम मिल सकता है या नहीं।...तो क्या कर्मियों के वर्क फ्रॉम होम के लिए कोई और तरीका नहीं है?
यूं तो वर्क फ्रॉम होम का कोई सार्वभौमिक अधिकार नहीं है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में कर्मचारी लचीली कार्य व्यवस्था की मांग कर सकते हैं।1. मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961: इस कानून की धारा 5(5) के तहत, बच्चे के जन्म के बाद कर्मचारी और नियोक्ता आपसी सहमति से वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था कर सकते हैं।
2. विशेष जरूरत: विकलांगता, कार्यस्थल की सुरक्षा या विशेष चिकित्सा जरूरतों के आधार पर भी कर्मचारी रिमोट वर्क देने की अपील कर सकते हैं।
आखिर कोरोनाकाल में कैसे अनिवार्य हो गया था वर्क फ्रॉम होम?
कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए महामारी के दौरान विश्व स्तर पर पहली बार वर्क फ्रॉम होम को वैश्विक स्तर पर अपनाया गया था। भारत में भी कोरोनाकाल में बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर इसे अनिवार्य और कानूनी रूप से लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, महामारी रोग अधिनियम, 1897 और राज्य के आपदा-प्रबंधन नियमों के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया था।इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बाध्यकारी दिशा-निर्देश भी जारी किए थे, जिनमें कार्यालयों को जहां तक संभव हो रिमोट तरीके (वर्क फ्रॉम होम) से काम करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। इन्हीं विशेष आपात कानूनों और सरकारी आदेशों की वजह से कोरोनाकाल में वर्क फ्रॉम होम एक कानूनी बाध्यता बन गया था।
ये भी पढ़ें: वैश्विक ऊर्जा संकट: 40 देशों में ईंधन राशनिंग और वर्क फ्रॉम होम लागू, पीएम मोदी ने भी की बचत की अपील
मौजूदा पश्चिम एशिया संकट के चलते कहां-कहां पहले से लागू है वर्क फ्रॉम होम?
पश्चिम एशिया संकट और उसके कारण वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों और ईंधन आपूर्ति की चिंताओं को देखते हुए, कई एशियाई देशों ने ईंधन बचाने के लिए कोविड महामारी का उदाहरण लेते हुए वर्क फ्रॉम होम और लचीली कार्य व्यवस्थाओं को पहले ही लागू करना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी आईईए के अनुसार, लगभग 40 देशों ने ईंधन बचाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। इनमें ईंधन की राशनिंग, सरकारी यात्राओं पर पाबंदी, वर्क फ्रॉम होम और सम-विषम वाहन प्रणाली जैसे उपाय शामिल हैं।श्रीलंका: सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कर्मचारियों की यात्रा और ईंधन के उपयोग को कम करने के लिए चार दिन के कार्य सप्ताह की शुरुआत की गई है।
फिलीपींस: सरकार ने ऊर्जा आपातकाल की घोषणा की है और ईंधन व बिजली की खपत को कम करने के लिए कई सरकारी कार्यालयों को चार दिन के कार्य तक सीमित कर दिया गया है।
पाकिस्तान: ईंधन की कमी, इसकी बढ़ती आयात लागत और विदेशी मुद्रा के दबाव से जूझते हुए, इस देश ने सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम की है और आंशिक रूप से रिमोट वर्क का प्रयोग शुरू किया है।
भारत में भी वर्क फ्रॉम होम लागू करने की अपील।
- फोटो : अमर उजाला
वियतनाम: यहां छोटे उद्योगों और ट्रांसपोर्टर्स पर पड़ रहे ईंधन की कीमतों के असर को कम करने के लिए व्यवसायों को रिमोट वर्क और ऑनलाइन बैठकों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इंडोनेशिया: ईंधन की मांग को नियंत्रित करने और भंडार को प्रबंधित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कार्यालय आने के दिनों को कम करके रिमोट वर्क की व्यवस्था लागू की गई है।
म्यांमार: ईंधन की कमी और पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारों के कारण प्रशासन के कुछ हिस्सों में रिमोट वर्क को लागू किया गया है। साथ ही निजी वाहनों के लिए आल्टरनेट डे पर चलाने के नियम पेश हुए हैं।
इंडोनेशिया: ईंधन की मांग को नियंत्रित करने और भंडार को प्रबंधित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कार्यालय आने के दिनों को कम करके रिमोट वर्क की व्यवस्था लागू की गई है।
म्यांमार: ईंधन की कमी और पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारों के कारण प्रशासन के कुछ हिस्सों में रिमोट वर्क को लागू किया गया है। साथ ही निजी वाहनों के लिए आल्टरनेट डे पर चलाने के नियम पेश हुए हैं।
इसके अलावा थाईलैंड, सिंगापुर और बांग्लादेश जैसे देशों ने पूरी तरह से वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य तो नहीं किया है, लेकिन ऊर्जा बचाने के लिए कर्मचारियों के काम के समय में बदलाव, कार्यालयों में एसी के उपयोग को सीमित करने और गैर-जरूरी यात्राओं पर रोक जैसे अन्य कदम उठाए हैं। कंबोडिया, लाओ पीडीआर, मलयेशिया, पेरू, मिस्र भी ऐसे उपाय अपना रहे हैं।
यूरोप: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईएई) के इमरजेंसी एनर्जी कंजर्वेशन (आपातकालीन ऊर्जा संरक्षण) ट्रैकर के अनुसार, यूरोपीय आयोग समेत इन देशों ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए निजी और सरकारी वाहनों का उपयोग सीमित करने, एक दिन छोड़कर गाड़ी चलाना, सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया।
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