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Pakistan: सस्ते भारतीय टीके नहीं मिलने से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर दबाव, मंत्री बोले-हालात कठिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कराची
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 08 Feb 2026 05:23 AM IST
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सार
आतंक की फैक्ट्री कहलाने वाले पाकिस्तान की माली हालत किसी से छिपी नहीं है। इस बीच पाकिस्तान में भारत से जाने वाले सस्ते टीकों की कमी ने उसकी अर्थव्यवस्था को और बिगाड़ दिया है। पाकिस्तान को अब दूसरे देशों से टीके खरीदने पड़ रहे हैं।
पाकिस्तान में टीकों की कमी
- फोटो : facebook/@NHSRCOfficial
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विस्तार
पाकिस्तान में भारत से किफायती टीके नहीं मिलने के कारण अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य दबाव में है। पाकिस्तानी स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने इस पर हताशा जताते हुए कहा, हालात कठिन हैं। मई 2025 के संघर्ष के बाद से भारत से सस्ते टीकों की आपूर्ति रुकने से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है।
इससे पहले वैश्विक सार्वजनिक-निजी स्वास्थ्य साझेदारी के तहत पाकिस्तान ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन्स एंड इम्यूनाइजेशन (गावी) के जरिये सस्ते टीके लेता था। गावी दुनिया के सबसे गरीब देशों के बच्चों को टीके दिलाती है। कमाल बोले, फिलहाल पाकिस्तान 40 करोड़ डॉलर की वार्षिक लागत पर टीके मंगाता है व 51% लागत वहन करता है। इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा असर हो रहा है।
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गावी के जरिये भारत से मिलती थी मदद
गावी की भूमिका को स्वीकार करते हुए पाकिस्तानी स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने कहा, यह संगठन खरीद मध्यस्थ और वित्तपोषण भागीदार के रूप में पाकिस्तान को मुख्य रूप से भारत से टीके प्राप्त करने में मदद करता रहा है। वह बोले, दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद, गावी ने पाकिस्तान को भारतीय दवा कंपनियों के जरिये मदद की। कोविड में भी गावी ने भारत से लाखों टीके जुटाने में मदद की थी।
पाकिस्तान में टीका उत्पादन नहीं
सरकार वर्तमान में नागरिकों को 13 प्रकार के टीके मुफ्त में दे रही है, लेकिन इनमें से किसी का भी उत्पादन देश नहीं होता है। पाकिस्तान विश्व का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है, जिसकी आबादी लगभग 24 करोड़ है और यहां प्रति वर्ष 62 लाख जन्म होते हैं, जिससे टीकों की मांग में काफी वृद्धि हुई है। कमाल ने कहा- अंतरराष्ट्रीय सहायता के कारण वार्षिक आयात लागत को नियंत्रण में रखा गया है, लेकिन यदि टीकों का स्थानीय उत्पादन शुरू नहीं होता है तो यह स्थिति बदल सकती है।
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ऑपरेशन सिंदूर में बिगड़े रिश्ते
भारत ने पिछले साल 7 मई को पहलगाम हमले के प्रतिशोध में पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इन हमलों के कारण दोनों देशों के बीच चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति के साथ समाप्त हुईं।
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गावी के जरिये भारत से मिलती थी मदद
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पाकिस्तान में टीका उत्पादन नहीं
सरकार वर्तमान में नागरिकों को 13 प्रकार के टीके मुफ्त में दे रही है, लेकिन इनमें से किसी का भी उत्पादन देश नहीं होता है। पाकिस्तान विश्व का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है, जिसकी आबादी लगभग 24 करोड़ है और यहां प्रति वर्ष 62 लाख जन्म होते हैं, जिससे टीकों की मांग में काफी वृद्धि हुई है। कमाल ने कहा- अंतरराष्ट्रीय सहायता के कारण वार्षिक आयात लागत को नियंत्रण में रखा गया है, लेकिन यदि टीकों का स्थानीय उत्पादन शुरू नहीं होता है तो यह स्थिति बदल सकती है।
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ऑपरेशन सिंदूर में बिगड़े रिश्ते
भारत ने पिछले साल 7 मई को पहलगाम हमले के प्रतिशोध में पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इन हमलों के कारण दोनों देशों के बीच चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति के साथ समाप्त हुईं।
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