यूरोपीय संघ का विचार कितना पुराना
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यूरोपीय संघ बनाने का विचार दुनिया के सबसे पुराने विचारों में एक है। ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का फैसला इसमें सबसे नया एपिसोड है।
दरअसल यूरोपीय संघ की कल्पना का इतिहास बहुत पुराना है। यूनानी उत्तरी और पश्चिमी यूरोप के अपने पड़ोसियों के बारे में ज्यादा नहीं सोचते थे। यूनानी उन्हें बर्बर मानते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनकी भाषाएं असभ्यों जैसी है।
मकदुनिया (मैसेडोनिया) के सिकंदर महान की भी यूरोप में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उसने मेसेडोनिया से दक्षिण आकर यूनान पर कब्जा जमाया। इसके बाद उन्होंने पूर्व में एशिया की ओर रुख किया। इसके बाद उन्होंने मिस्र में समय बिताया, फिर पर्शिया (फ़ारस) पर जीत हासिल की।
इसके बाद उन्होंने मध्य एशिया और अफगानिस्तान का रूख किया। इसके बाद उन्हें अपने जीवन का सबसे कड़ा संघर्ष पंजाब में झेलना पड़ा और वहां से उन्हें वापस लौटना पड़ा। ईरान में 33 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई। सिकंदर से लगभग तीन सौ साल बाद जूलियस सीजर ने सबसे पहले यूरोप को एक बैनर के तले लाने की कोशिश की थी।
रोमन सेना ने येरूशलम और सीरिया की ओर पूर्व का रुख किया
ईसा के जन्म से कुछ दशक पहले सीजर ने इटली की सेना का नेतृत्व करते हुए फ्रांस और जर्मनी पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने कई जंगली जनजातियों को भी अपने अधीन कर लिया था।
इतना ही नहीं सीजर ने इंग्लैंड (इंग्लैंडने ब्रेक्सिट के खिलाफ वोट डाला है) पर भी कब्जा कर लिया था। उस समय के पूरे यूरोप पर रोम का शासन चलता था। सीजर के बाद उनके उत्तराधिकारी अगस्तस ने रोमन साम्राज्य के उत्तरी हिस्से में विस्तार को तब रोक दिया
जब उन्हें जर्मनी के टेयूटूबोर्ग के जंगल में 9 ईस्वी (एडी) में हार का सामना करना पड़ा। इस समय यूरोप की शहरी और सभ्य आबादी महाद्वीप के दक्षिणे हिस्से में रहती थी। यूरोप का उत्तरी हिस्सा जो कि आज दुनिया भर में आर्थिक तौर पर सबसे अधिक संपन्न है, उस समय वह एक जंगली इलाका था, सिसे जीतने के लिए कोई युद्ध नहीं करना चाहता था।
इसके बाद रोमन सेना ने येरूशलम और सीरिया की ओर पूर्व का रुख किया। तब रोमन ने अपने साम्राज्य की नई राजधानी इस्तांबुल में बनाई।
पश्चिम में, जर्मन जनजाति थी, जिनकी कोई लिपि नहीं थी, सब अशिक्षित थे
पश्चिम में, जर्मन जनजाति थी, जिनकी कोई लिपि नहीं थी, सब अशिक्षित थे। लेकिन पांचवीं सदी ईस्वी (एडी) आते-आते उन्होंने रोमन आधिपत्य को समाप्त कर दिया था। यह अंधकार का युग कहलाता है। यूरोप में लेखन और अध्ययन के क्षेत्र में गिरावट का दौर था।
सातवीं सदी में मिस्र पर मुसलमानों का कब्जा हो गया था और मुस्लिम शासकों ने यहां से कागज के यूरोप निर्यात पर रोक लगा दी थी। इस दौर में किताबों का लिखना और उनकी कॉपी करना बंद हो गया था। इसके बाद ईसाई धर्म के नाम पर यूरोप को एकजुट करने की कोशिश शुरु हुई।
उसी दौरान स्पेन पर अरब मुसलमानों की जीत ने यूरोपवासियों में और डर पैदा कर दिया था (जिस तरह आजकल सीरियाई अप्रवासियों का डर उन्हें सता रहा है) और यूरोप को एक साथ लाने की मांग और तेज होने लगी।
रोम के पोप ने एक जर्मन आदिवासी मुखिया चार्ल्स को पहला रोमन साम्राज्य घोषित कर दिया। उनका ऐतिहासिक नाम था चार्लेमागेन, जिसका मतलब होता है चार्ल्स द ग्रेट। इसके बाद यूरोप में सामंतवाद का दौर शुरू हुआ और कई बड़े राज्यों का अभ्युदय हुआ।
चार्ल्स द ग्रेट के पड़पोते चार्ल्स द फैट उस दौर में एकीकृत यूरोप पर शासन करने वाले अंतिम राजा थे
फ्रांस और इंग्लैंड के शक्तिशाली राजाओं ने यूरोप को आपस में बांट लिया और उस पर शासन करने लगे। चार्ल्स द ग्रेट के पड़पोते चार्ल्स द फैट उस दौर में एकीकृत यूरोप पर शासन करने वाले अंतिम राजा थे।
इसके बाद रोम में चर्च का दौर शुरू हुआ, सैन्य और राजनीतिक शक्ति के तौर पर। रोमन चर्च ने यूरोप के राजाओं को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वो अपना राज-काज छोड़कर येरूशलम को मुसलमानों से आजाद कराएं।
11वीं सदी से 15वीं सदी तक चले इस युद्द को क्रुसेड्स के नाम से जाना जाता है। पहले जर्मनी और फिर इंग्लैंड में प्रोटेस्टेंट आंदोलन के चलते यूरोप में ईसाई धर्म के नाम पर बनी एकजुटता टूट गई। इसके बाद चर्चों की ताकत कम हुई और पूर्व में मुस्लिमों की ताकत बढ़ी।
वैज्ञानिक क्रांति ने एक बार फिर यूरोपीय दबदबे के दौर को वापस ला दिया, जो रोमन साम्राज्य के दौर में था। सैन्य तकनीकों की मदद से नेपोलियन ने बहुत कम समय के लिए ही सही, लेकिन 1000 साल में पहली बार यूरोप को एकीकृत कर दिया।
1940 के शुरुआती दिनों में हिटलर ने एक बार फिर से यूरोप को एकजुट कर दिया था
1940 के शुरुआती दिनों में हिटलर ने एक बार फिर से यूरोप को एकजुट कर दिया था, कुछ महीनों में ही उसकी नाजी सेना ने पूरे महाद्वीप पर कब्जा कर लिया था।
इटली जैसे जिन हिस्सों पर हिटलर कब्जा नहीं कर पाया, वे या तो बाद में मिला लिए गए या फिर वे उसके सहयोगी बन गए। तब केवल ब्रिटिश द्वीप समूह ही उसके नियंत्रण से बाहर था। द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति और रूस के अभ्युदय ने भी यूरोप को सैन्य रूप से एकीकृत रखा।
सैन्य संगठन नैटो के गठन के जरिए ऐसा हो सका जिसका मुख्यालय तो ब्रसेल्स में स्थित है, लेकिन असली ताकत अमरीका के पास ही रही। यूरोपीय संघ बन जाने के बाद भी नैटो जारी रहा है। यूरोपीय संघ का मुख्यालय भी ब्रसेल्स में स्थित है। इस इमारत का नाम चार्लेमागेन के नाम पर रखा गया था। 25 साल पहले जर्मनी के एकीकृत होने के बाद यूरोपीय संघ की सारी ताकत बर्लिन में केंद्रित हो गई।
चार्लेमागेन के दौर से यूरोपीय संघ तक एकीकृत यूरोप का विचार लगातार जारी रहा
चार्लेमागेन के दौर से यूरोपीय संघ तक एकीकृत यूरोप का विचार लगातार जारी रहा। लेकिन इसकी वजहें अलग-अलग समय पर अलग-अलग थीं- कभी सैन्य विस्तार, कभी ईसाई धर्म तो कभी व्यापार। देशों की राष्ट्रीय सीमाएं कई बार बदलीं, कई बार भाषाएं बदलीं।
ब्रिटेन का अलग होने का फैसला इस लंबे इतिहास में एक ताजा घटनाक्रम है। बहरहाल, इस आलेख को मैं एक दिलचस्प नोट पर खत्म कर रहा हूं। फ्रस का नाम जर्मन जनजाति फ्रैंक से निकला है, जिन्होंने फ्रांसीसी हिस्से पर जीत हासिल की थी और आज के फ्रांसीसी लोगों के साथ घुलमिल गए। इसी समुदाय के लोगों के नाम पर जर्मन शहर फ्रैंकफर्ट है।
इंग्लैंड का मतलब ऐंजिल्स की जमीन है, ऐंजिल्स उत्तरी जर्मनी का जनजाति समूह था जिसने शताब्दियों पहले इंग्लैंड पर कब्जा जमाया था। उत्तरी इटली को लोम्बार्डी कहते हैं, लोम्बार्डी भी एक जर्मन जनजाति समूह था। इस नजरिए से देखें तो जर्मन समुदाय अपनी नस्ल के जरिए स्थायी तौर पर यूरोप को एकीकृत कर चुका है।