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BRICS: मई में भारत आएंगे रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ट्रेड और करेंसी पर होगा बड़ा फैसला!

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 31 Mar 2026 07:32 PM IST
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सार

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इसी साल 14-15 मई को होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तय करना है। इस दौरान लावरोव और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच अलग से विशेष बैठक भी होगी।
 

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सर्गेई लावरोव, रूस के विदेश मंत्री  - फोटो : ANI
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विस्तार

भारत और रूस के अटूट रिश्तों की कहानी में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। दरअसल, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मई में भारत के दौरे पर आने वाले हैं। खबरों के मुताबिक, लावरोव यहां आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। इतना ही नहीं, उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अलग से एक विशेष बैठक भी होगी। 
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रूसी समाचार एजेंसी टास के अनुसार, उप-विदेश मंत्री रुडेंको ने कहा कि विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव 14 और 15 मई को होने वाली ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने की योजना बना रहे हैं। यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी मंच पर समझौतों के सामान्य प्रारूप तय किए जाएंगे, जिन्हें भारत की अध्यक्षता में आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पेश किया जाना है।
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विदेश मंत्री जयशंकर के साथ लावरोव की बैठक
हालांकि, यह सिर्फ ब्रिक्स की बैठकों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। रुडेंको ने जानकारी दी कि ब्रिक्स के आयोजनों के सिलसिले में ही विदेश मंत्री लावरोव की एक अलग से भारत की कामकाजी यात्रा भी तय की गई है। इस दौरान वे भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को और ज्यादा मजबूत करने पर चर्चा होगी।

गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2026 में ब्रिक्स की कमान भारत के हाथों में है। इस बार भारत की अध्यक्षता का मूल विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' रखा गया है। यह विषय सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को बताता है। वर्ष 2025 में पीएम मोदी ने रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'मानवता प्रथम' की बात कही थी। 

वहीं, मार्च महीने में ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि दुनिया में तेजी से उभरती बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए ब्रिक्स, एससीओ, जी20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर आपसी सहयोग को बढ़ाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान रूस के साथ मिलकर साझी चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है।

यह भी पढ़ें: 'ईरान में हो चुका सत्ता परिवर्तन': यूएस रक्षामंत्री बोले- समझौता करो वरना बड़े हमले होंगे, नाटो पर फैसला जल्द

कैसे बना ब्रिक्स?
ब्रिक्स की बात करें तो यह सफर वर्ष 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर 'ब्रिक' (BRIC) के रूप में शुरू हुआ था। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसका पहला शिखर सम्मेलन हुआ। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से यह 'ब्रिक्स' (BRICS) बना। समय के साथ यह संगठन लगातार बड़ा होता गया।

जनवरी 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई इसके पूर्ण सदस्य बने और जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हो गया। इसके अलावा 2025 में ही बेलारूस, क्यूबा, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम समेत 10 देशों को 'पार्टनर कंट्री' का दर्जा दिया गया है। लावरोव का यह दौरा यकीनन इस संगठन और भारत-रूस संबंधों को नई धार देगा।

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