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SpaceX: स्पेसएक्स ने स्टारशिप की 13वीं परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की, पहली बार छोड़े इतने स्टारलिंक उपग्रह
Sat, 25 Jul 2026 07:56 AM IST
Pavan
पीटीआई, केप कैनावेरल
पीटीआई, केप कैनावेरल
Published by: Pavan
Updated Sat, 25 Jul 2026 07:56 AM IST
सार
पहले यह परीक्षण उड़ान पहले 16 जुलाई को इंजन की समस्या के कारण टल गई थी। इसके बाद ट्रॉपिकल स्टॉर्म बर्था के कारण गुरुवार को भी लॉन्च स्थगित करना पड़ा था। शुक्रवार को मौसम अनुकूल होने पर मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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स्टारशिप रॉकेट की 13वीं परीक्षण उड़ान
- फोटो : X @SpaceX
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विस्तार
अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने शुक्रवार को दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्टारशिप की 13वीं परीक्षण उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की। इस मिशन में पहली बार कंपनी ने अपने सबसे उन्नत 20 स्टारलिंक इंटरनेट उपग्रह अंतरिक्ष में तैनात किए। यह मिशन नासा के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि भविष्य में इसी स्टारशिप का इस्तेमाल आर्टेमिस-III मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने के लिए किया जाना है।
यह भी पढ़ें- होर्मुज में एलपीजी टैंकर पर मिसाइल हमला: 28 भारतीय सुरक्षित; दूतावास ने नाविकों की सुरक्षा को लेकर क्या कहा?
407 फीट (124 मीटर) ऊंचे स्टारशिप ने टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित स्पेसएक्स के स्टारबेस लॉन्च साइट से उड़ान भरी। पिछले सप्ताह इंजन में आई तकनीकी समस्या के कारण लॉन्च अंतिम क्षणों में रोकना पड़ा था। इस बार उड़ान की शुरुआत सफल रही और सभी इंजन सही तरीके से चालू हुए। हालांकि, रॉकेट के पहले चरण (बूस्टर) की वापसी के दौरान सभी इंजन दोबारा चालू नहीं हो सके। इसके कारण बूस्टर नियंत्रित तरीके से लौटने के बजाय तेज गति से नीचे आया और मैक्सिको की खाड़ी में गिर गया। इसके बावजूद मिशन का मुख्य हिस्सा पूरी तरह सफल रहा।
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भारतीय महासागर में सुरक्षित उतरा स्टारशिप
बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप अंतरिक्ष की ओर बढ़ता रहा और लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक-एक करके 20 उन्नत स्टारलिंक उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़ा। करीब एक घंटे की उड़ान के बाद स्टारशिप ने भारतीय महासागर में स्प्लैशडाउन किया। यह इतनी सफल रही कि यान कुछ समय तक पानी की सतह पर तैरता भी रहा। स्पेसएक्स के कर्मचारियों ने इस सफलता पर खुशी जताई।
लेजर तकनीक से किया संपर्क
नए लॉन्च किए गए स्टारलिंक उपग्रहों ने अंतरिक्ष में पहले से मौजूद स्टारलिंक उपग्रहों से लेजर तकनीक के जरिए सफल संपर्क स्थापित किया। फिलहाल स्पेसएक्स के 10,000 से अधिक स्टारलिंक उपग्रह दुनिया भर में इंटरनेट सेवा दे रहे हैं, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा उपग्रह नेटवर्क बन गया है।
हीट शील्ड का भी हुआ बड़ा परीक्षण
इस मिशन में छह नए स्टारलिंक उपग्रहों पर कैमरे लगाए गए थे, जिन्होंने उड़ान के अंत में स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें भेजीं। वैज्ञानिकों ने हीट शील्ड पर सेंसर भी लगाए थे, ताकि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान उस पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव और तापमान का अध्ययन किया जा सके। कुछ टाइलों को जानबूझकर सफेद रंग से रंगा गया था, ताकि यह जांचा जा सके कि कुछ टाइलें खराब होने की स्थिति में भी हीट शील्ड कितनी सुरक्षित रहती है। स्पेसएक्स की इंजीनियर केट टाइस ने इसे 'लकी फ्लाइट 13' बताते हुए कहा कि कंपनी इस मिशन के नतीजों से बेहद उत्साहित है।
यह भी पढ़ें- 850 साल बाद आसमान में होगा चमत्कार: दो साल पहले ही फुल हुए होटल; आखिर 22 जुलाई 2028 को ऐसा क्या होने वाला है?
नासा के लिए क्यों है अहम मिशन?
नासा चाहता है कि स्टारशिप जल्द पूरी तरह परीक्षण पूरा कर कक्षा में नियमित उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाए। इसके बाद आर्टेमिस-III मिशन के तहत तीन अमेरिकी और एक इतालवी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा से पहले अपने कैप्सूल को स्टारशिप से डॉकिंग का अभ्यास करेंगे। वहीं, एलन मस्क का सपना स्टारशिप के जरिए मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाना है। मस्क पहले ही भविष्य में मंगल और चंद्रमा की पर्यटक यात्राओं की योजना की बात कर चुके हैं।
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407 फीट (124 मीटर) ऊंचे स्टारशिप ने टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित स्पेसएक्स के स्टारबेस लॉन्च साइट से उड़ान भरी। पिछले सप्ताह इंजन में आई तकनीकी समस्या के कारण लॉन्च अंतिम क्षणों में रोकना पड़ा था। इस बार उड़ान की शुरुआत सफल रही और सभी इंजन सही तरीके से चालू हुए। हालांकि, रॉकेट के पहले चरण (बूस्टर) की वापसी के दौरान सभी इंजन दोबारा चालू नहीं हो सके। इसके कारण बूस्टर नियंत्रित तरीके से लौटने के बजाय तेज गति से नीचे आया और मैक्सिको की खाड़ी में गिर गया। इसके बावजूद मिशन का मुख्य हिस्सा पूरी तरह सफल रहा।
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बूस्टर से अलग होने के बाद स्टारशिप अंतरिक्ष की ओर बढ़ता रहा और लगभग 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक-एक करके 20 उन्नत स्टारलिंक उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़ा। करीब एक घंटे की उड़ान के बाद स्टारशिप ने भारतीय महासागर में स्प्लैशडाउन किया। यह इतनी सफल रही कि यान कुछ समय तक पानी की सतह पर तैरता भी रहा। स्पेसएक्स के कर्मचारियों ने इस सफलता पर खुशी जताई।
लेजर तकनीक से किया संपर्क
नए लॉन्च किए गए स्टारलिंक उपग्रहों ने अंतरिक्ष में पहले से मौजूद स्टारलिंक उपग्रहों से लेजर तकनीक के जरिए सफल संपर्क स्थापित किया। फिलहाल स्पेसएक्स के 10,000 से अधिक स्टारलिंक उपग्रह दुनिया भर में इंटरनेट सेवा दे रहे हैं, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा उपग्रह नेटवर्क बन गया है।
हीट शील्ड का भी हुआ बड़ा परीक्षण
इस मिशन में छह नए स्टारलिंक उपग्रहों पर कैमरे लगाए गए थे, जिन्होंने उड़ान के अंत में स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें भेजीं। वैज्ञानिकों ने हीट शील्ड पर सेंसर भी लगाए थे, ताकि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान उस पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव और तापमान का अध्ययन किया जा सके। कुछ टाइलों को जानबूझकर सफेद रंग से रंगा गया था, ताकि यह जांचा जा सके कि कुछ टाइलें खराब होने की स्थिति में भी हीट शील्ड कितनी सुरक्षित रहती है। स्पेसएक्स की इंजीनियर केट टाइस ने इसे 'लकी फ्लाइट 13' बताते हुए कहा कि कंपनी इस मिशन के नतीजों से बेहद उत्साहित है।
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नासा के लिए क्यों है अहम मिशन?
नासा चाहता है कि स्टारशिप जल्द पूरी तरह परीक्षण पूरा कर कक्षा में नियमित उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाए। इसके बाद आर्टेमिस-III मिशन के तहत तीन अमेरिकी और एक इतालवी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा से पहले अपने कैप्सूल को स्टारशिप से डॉकिंग का अभ्यास करेंगे। वहीं, एलन मस्क का सपना स्टारशिप के जरिए मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाना है। मस्क पहले ही भविष्य में मंगल और चंद्रमा की पर्यटक यात्राओं की योजना की बात कर चुके हैं।