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मिसाइल से बचे पर नहीं बची नौकरी: होर्मुज में तैनात नाविकों ने शिपिंग कंपनी पर ठोका मुकदमा, क्या है पूरा केस?

Fri, 10 Jul 2026 03:25 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 10 Jul 2026 03:25 PM IST
सार

होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले का शिकार हुए एक थाई कार्गो जहाज के तीन पूर्व क्रू सदस्यों ने मुकदमा दायर किया है। उन्होंने जहाज का संचालन करने वाली कंपनी के खिलाफ मजदूर अधिकारों के उल्लंघन और गलत तरीके से नौकरी से निकालने के मुद्दे पर यह केस किया है।  

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Survived missile but lost job Sailors deployed in Hormuz sue shipping company know what is full case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

होर्मुज जलडमरूमध्य में मार्च में हुए हमले का शिकार बने थाई कार्गो जहाज के तीन पूर्व नाविकों ने शिपिंग कंपनी पर मजदूर अधिकारों के उल्लंघन, जान जोखिम में डालने और गलत तरीके से नौकरी से निकालने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि हमले के बाद उन्हें PTSD हो गया, जिसकी वजह से अब वे दोबारा समुद्री नौकरी नहीं कर सकते। 

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आखिर हमला कब और कैसे हुआ था?
11 मार्च को ओमान के उत्तर में 'मयूरी नारी' नाम के जहाज पर एक प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट जैसे हथियार) से हमला हुआ था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। बाकी 20 क्रू सदस्यों को बचा लिया गया था और वे करीब एक सप्ताह बाद थाईलैंड लौट आए थे।
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किन लोगों ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया?
पूर्व क्रू सदस्य पनीथी तुमकाव, नोप्पाडोन वोंगसुवन और सुरादेस मानपुएन ने 'प्रेशियस शिपिंग कंपनी' के साथ-साथ उसकी दो सहयोगी कंपनियों और जहाज के कप्तान के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
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कंपनी पर आखिर क्या आरोप लगाए गए हैं?
उनके वकील कुनपत सिंघाथोंग के अनुसार, मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा जोखिमों की जानकारी होने के बावजूद कंपनी ने जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का फैसला लिया और क्रू सदस्यों की जान खतरे में डाल दी।

हमले के बाद नौकरी क्यों चली गई?
कुनपत ने बताया कि हमले के बाद जहाज पूरी तरह बेकार हो गया था। इसके बाद तीनों कर्मचारियों को उनके नौ महीने के रोजगार अनुबंध की अवधि पूरी होने से पहले ही नौकरी से निकाल दिया गया। उन्हें दो महीने के वेतन के बराबर मुआवजा दिया गया।

मुआवजा कम क्यों बताया जा रहा है?
वकील का कहना है कि यह मुआवजा पर्याप्त नहीं था, क्योंकि बाद में तीनों को पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) होने की पुष्टि हुई। इस मानसिक आघात के कारण वे अब भविष्य में नाविक के रूप में काम करने में सक्षम नहीं हैं।

कोर्ट जाने की नौबत क्यों आई?
बैंकॉक की सेंट्रल लेबर कोर्ट में मामला दायर करने से पहले कुनपत ने कहा, 'हमने कंपनी के साथ बातचीत कर मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन उसने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। इसलिए हमें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।'

मुआवजे की कितनी मांग की गई है?
कुनपत ने मुआवजे की सटीक राशि बताने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए मांगी गई रकम 10 लाख बाहट (करीब 30 हजार अमेरिकी डॉलर) से अधिक होगी।

हमले का मानसिक असर कितना गहरा रहा?
पनीथी, जिन्होंने एक दशक से अधिक समय तक 'प्रेशियस शिपिंग' के लिए काम किया, ने बताया कि उनके व्यवहार में बदलाव देखने के बाद उनकी पत्नी ने उन्हें इलाज कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, 'जब भी तेज आवाज होती है, मैं चौंक जाता हूं। अब मैं काम नहीं कर सकता और मुझे नियमित रूप से दवा लेनी पड़ती है।' वहीं, 'प्रेशियस शिपिंग' ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया है।

मारे गए नाविकों के परिवारों से कंपनी ने क्या कहा?
हमले में जान गंवाने वाले तीन क्रू सदस्यों के शव इस महीने की शुरुआत में थाईलैंड लाए गए थे। 3 जुलाई को जारी बयान में 'प्रेशियस शिपिंग' ने शवों को वापस लाने की प्रक्रिया में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। कंपनी ने कहा कि वह इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता, देखभाल और सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।


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होर्मुज जलडमरूमध्य इतना अहम क्यों है?
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। यह दुनिया के कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस के वैश्विक व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा ढोने वाला सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से जाने वाली ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा एशियाई देशों तक पहुंचता है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से एशिया के कई देश ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं।

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