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US: विदेशी स्टूडेंट्स के लिए ओपीटी वर्क रूट की फिर से होगी समीक्षा, जानें भारतीय छात्रों पर पड़ेगा क्या असर

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Devesh Tripathi Updated Fri, 27 Feb 2026 03:14 PM IST
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सार

यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप प्रशासन रोजगार से जुड़े इमिग्रेशन कार्यक्रमों की व्यापक समीक्षा कर रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि कार्यकारी आदेशों के जरिए बनाए या बढ़ाए गए कार्यक्रमों पर फिर से विचार किया जा सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह समीक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। भारतीय छात्र एफ-1 वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या में हैं।

Trump administration will re examine OPT work route for foreign students know about impact on Indian students
वीजा नियम बदलेगा अमेरिका - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हजारों विदेशी छात्रों पर असर डालने वाला एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) ने कहा है कि वह ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग यानी ओपीटी कार्यक्रम की दोबारा समीक्षा कर रहा है। इसका मतलब है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की जो व्यवस्था एफ-1 वीजा धारकों के लिए है, उसमें नियम बदले जा सकते हैं। 
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होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने सीनेटर एरिक श्मिट को लिखे एक पत्र में बताया कि विभाग यह देख रहा है कि मौजूदा व्यवस्था- खासकर ट्रेनिंग की अवधि और दायरा क्या अमेरिका के श्रम बाजार, टैक्स व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह व्यवस्था कांग्रेस की मंशा के अनुरूप है।
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अमेरिका में पढ़ रहे तीन लाख भारतीय छात्र
इस समय अमेरिका में तीन लाख से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या पढ़ाई पूरी करने के बाद ओपीटी के तहत काम कर रही है। नोएम ने पत्र में लिखा कि डीएचएस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इमिग्रेशन से जुड़े कार्यक्रम अमेरिकी कामगारों के हित में चलें और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुरक्षित रखें। उन्होंने यह भी माना कि हाल के वर्षों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कार्यक्रमों में विदेशी छात्रों की संख्या काफी बढ़ी है, जिससे कुछ जोखिम और चुनौतियां पैदा हुई हैं।

लेटर के मुताबिक, यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट का स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम “इन मुश्किलों को समझता है और कमजोरियों को कम करने और आपकी चिंताओं को दूर करने के लिए एक्शन ले रहा है।” ओपीटी कार्यक्रम के तहत एफ-1 वीजा पर पढ़ाई करने वाले छात्र अपनी डिग्री पूरी करने के बाद अमेरिका में अधिकतम 12 महीने तक काम कर सकते हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों के छात्रों को अतिरिक्त 24 महीने की छूट मिलती है।

नियमों में क्या बदलाव करने जा रहा ट्रंप प्रशासन?
प्रोग्राम के लीगल बेसिस पर बात करते हुए, नोएम ने बताया कि ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम और उससे जुड़े ट्रेनिंग के मौके “सीधे कानूनी टेक्स्ट के बजाय रेगुलेशन के जरिए बनाए गए थे।”

उन्होंने कहा कि, “प्रेसिडेंट ट्रंप के डायरेक्शन और एडमिनिस्ट्रेशन की अमेरिका फर्स्ट इमिग्रेशन पॉलिसी के हिसाब से, डीएचएस यह फिर से देख रहा है कि क्या मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क – जिसमें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का स्कोप और अवधि शामिल है – यूएस लेबर मार्केट, टैक्स और नेशनल सिक्योरिटी के हितों को ठीक से पूरा करता है और कांग्रेस के इरादे के साथ जुड़ा हुआ है।”

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सीनेटर श्मिट ने अपने पहले के पत्र में ओपीटी को “काम से जुड़ा लाभ” बताया था, जिसे नियमों के जरिए बनाया गया है, न कि सीधे कानून से। उन्होंने विभाग से कहा था कि इसकी पूरी समीक्षा की जाए, ताकि जरूरत पड़े तो इसे बदला या समाप्त किया जा सके।

(इनपुट आईएएनएस से)

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