कैसे शुरू हुई ईरान से जंग?: ट्रंप ने नेतन्याहू की सलाह पर दी हमले को मंजूरी; खामेनेई को मारने के लिए ऐसे मनाया
क्या ट्रंप ने नेतन्याहू के दबाव में ईरान पर हमला किया? खामेनेई और उनके सहयोगियों को निशाना बनाने के पीछे क्या थी रणनीति? अमेरिकी-इस्राइली ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने अब तक के सबसे बड़े भू-राजनीतिक तनाव को जन्म दिया है।
विस्तार
पश्चिम एशिया की राजनीति फिर से उबल रही है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सलाह पर ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले की मंजूरी दी थी। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कॉल हमले से मात्र 48 घंटे पहले हुई थी और इसके बाद अमेरिका-इस्राइल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत खामेनेई और उनके शीर्ष सहयोगियों को निशाना बनाने की योजना को बनाई।
नेतन्याहू का दबाव और खुफिया ब्रीफिंग का असर
नेतन्याहू ने ट्रंप को बताया कि खामेनेई और उनके प्रमुख सहयोगियों की बैठक तेहरान में होने वाली है, जिससे उन्हें डकैपिटेशन स्ट्राइक यानी देश के शीर्ष नेताओं को मारने का अनूठा मौका मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू ने यह भी याद दिलाया कि यह ईरान की उन कोशिशों का जवाब देने का मौका है, जिसमें ट्रंप को 2024 के दौरान हत्या के प्रयास का शिकार बनाया गया था।
ट्रंप ने शुरू में इस तरह के युद्ध के खिलाफ प्रचार किया था, लेकिन लगातार खुफिया ब्रीफिंग और नेतन्याहू की तर्कपूर्ण पेशकश ने उन्हें इस ऑपरेशन को हरी झंडी देने के लिए प्रेरित किया। जून में इस्राइल ने पहले भी ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल साइटों पर हमला किया था और अब फरवरी में अमेरिका ने भी इसमें शामिल होकर अपने सैनिकों और रणनीति का इस्तेमाल किया।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और उसका वैश्विक असर
बीते 28 फरवरी को पहला बम गिराया गया और उसी शाम ट्रंप ने खामेनेई की मौत की घोषणा की। इसके बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी सहयोगियों पर जवाबी हमले किए। इस हमले में 2,300 से अधिक ईरानी नागरिक मारे गए और अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई। तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आया और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा हुई।
इस ऑपरेशन ने केवल क्षेत्रीय शक्ति संतुलन ही नहीं बदला, बल्कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी और इस्राइली कूटनीति की नई दिशा भी तय की। खामेनेई के निधन के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता बनाया गया है।
नेतन्याहू का तर्क यह भी था कि खामेनेई की मौत से ईरानी जनता में विरोध और प्रदर्शन बढ़ सकते हैं, जिससे देश में शासन प्रणाली पर दबाव बढ़े। ट्रंप को यह अवसर अमेरिकी हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी फायदेमंद लगा। हालांकि, इस पूरे ऑपरेशन ने सवाल भी खड़े किए कि क्या एक नेता दूसरे देश के ऊपर इतना बड़ा सैन्य हमला करने की सलाह दे सकता है? ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि यह निर्णय केवल उनका था, लेकिन इन सूत्रों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि नेतन्याहू की रणनीति और तर्क ने अमेरिका को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया।
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