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विवादों में ट्रंप का विशाल स्मारक द्वार: NPS ने जताई चिंता, क्या बदलेगी वाशिंगटन के ऐतिहासिक स्थलों की पहचान?

Wed, 05 Aug 2026 08:44 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 05 Aug 2026 08:44 AM IST
सार

आज की इस रिपोर्ट में जानिए ट्रंप के 250 फीट ऊंचे स्मारक द्वार परियोजना पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, नेशनल पार्क सर्विस की रिपोर्ट में ऐतिहासिक स्थलों पर असर की बात और पूर्व सैनिकों व इतिहासकार के विरोध की वजह।

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Trump's arch could harm integrity of many of Washington's historical sites, report says
ट्रंप का प्रस्तावित विशाल द्वार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/व्हाइट हाउस

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बनाए जाने वाले प्रस्तावित 250 फीट (76 मीटर) ऊंचे स्मारक मेहराब (विशाल द्वार) से उसके आसपास मौजूद कई ऐतिहासिक जगहों की अहमियत पर असर पड़ सकता है। यह बात नेशनल पार्क सर्विस (एनपीएस) के एक आकलन में कही गई है।
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वाशिंगटन के कई स्मारक, इमारतें और ऐतिहासिक जगहों को कई दशकों में बहुत सोच-समझकर बनाया गया है। इनका मकसद देश के इतिहास की बड़ी घटनाओं को दिखाना और एक जगह को दूसरी जगह से जोड़कर एक खास संदेश देना है।
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ट्रंप की ओर से प्रस्तावित यह बहुत ऊंचा सुनहरे रंग का मेहराब (गिल्डेड आर्च) पिछले महीने एक संघीय आयोग से शुरुआती मंजूरी हासिल कर चुका है। लेकिन नेशनल पार्क सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार, यह दर्जनों ऐतिहासिक जगहों की पहचान और महत्व को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि इससे इन जगहों के बीच का वह दृश्य और दूरी का तालमेल बदल जाएगा, जो उनकी खास पहचान का हिस्सा है।
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सोमवार को जारी हुई एनपीएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस परियोजना का इलाका मेमोरियल एवेन्यू कॉरिडोर सांस्कृतिक क्षेत्र के अंदर आता है। यह अमेरिका का राष्ट्रीय महत्व वाला ऐतिहासिक इलाका है, जो वाशिंगटन डीसी के लिंकन मेमोरियल से लेकर वर्जीनिया के अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री तक फैला हुआ है।

किन जगहों के बीच टूटेगा तालमेल?
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मेहराब का सबसे बड़ा असर यह होगा कि यह लिंकन मेमोरियल, मेमोरियल ब्रिज और अर्लिंग्टन हाउस के बीच बनी सीधी लाइन को तोड़ देगा। अर्लिंग्टन हाउस पहले अमेरिकी गृहयुद्ध के समय कॉन्फेडरेट सेना (दक्षिणी राज्यों की सेना) के जनरल रॉबर्ट ई. ली का घर था।


इसमें कहा गया है कि मेमोरियल ब्रिज और उसके आसपास का पूरा इलाका इस तरह बनाया गया था कि पोटोमैक नदी के ऊपर बने स्मारकों की एक योजना के जरिये अमेरिका के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को शारीरिक और प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जा सके।

ट्रंप की परियोजना के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
यह रिपोर्ट ट्रंप की इस परियोजना के लिए एक बड़ी रुकावट बन गई है। इससे पहले यह परियोजना कई मंजूरी प्रक्रियाओं से आसानी से आगे बढ़ रही थी। इन मंजूरी देने वाले योजना बोर्डों में ट्रंप की ओर से नियुक्त अधिकारी और उनके समर्थक शामिल थे।

यह प्रस्तावित मेहराब उन कई परियोजनाओं में से एक है, जिनके जरिये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वॉशिंगटन शहर पर अपनी स्थायी छाप छोड़ना चाहते हैं। इस मेहराब से शहर का नजारा और पहचान बदलने की संभावना को देखते हुए इसका विरोध शुरू हो गया है। पूर्व सैनिकों के एक समूह और एक इतिहासकार ने इसके खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है।

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मंजूरी के बाद भी क्यों फंसा है मामला?
ट्रंप की ओर से बनाए जाने वाले इस मेहराब के डिजाइन को अमेरिकी कला आयोजग से शुरुआती मंजूरी मिल चुकी है। इस आयोग के सभी सदस्यों की नियुक्ति ट्रंप ने की थी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना आयोग ने जुलाई में हुई बैठक में इस जगह और शुरुआती योजना को मंजूरी दी थी। अब सितंबर की बैठक में यह आयोग इस मामले पर फिर से चर्चा करेगा।

क्या संसद की मंजूरी जरूरी है?
यह मेहराब ट्रंप की उन कई परियोजनाओं में शामिल है, जिनको लेकर अदालत में मामला चल रहा है। मुकदमा दायर करने वाले तीन पूर्व सैनिकों और एक इतिहासकार ने इसके निर्माण को चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस निर्माण के लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मंजूरी जरूरी है।

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