{"_id":"6a6977aec99ad9a56e0d603a","slug":"unsc-reform-process-cannot-be-held-hostage-india-parvathaneni-harish-on-west-asia-conflict-2026-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"'चुनिंदा देशों का नहीं हो सकता एकाधिकार': UN सुरक्षा परिषद सुधार पर भारत का सख्त संदेश, किसे ठहराया जिम्मेदार?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
'चुनिंदा देशों का नहीं हो सकता एकाधिकार': UN सुरक्षा परिषद सुधार पर भारत का सख्त संदेश, किसे ठहराया जिम्मेदार?
Wed, 29 Jul 2026 09:17 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, यूएन।
पीटीआई, यूएन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 29 Jul 2026 09:17 AM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने सुरक्षा परिषद सुधार में हो रही देरी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे कुछ देशों के स्वार्थ का बंधक न बनाने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों और व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शांति और सुरक्षा की मांग की है। भारत ने क्या-क्या कहा है? जानिए...
विज्ञापन
यूएन में भारत का संदेश
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की धीमी रफ्तार पर भारत ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथनेनी हरीश ने कहा कि 17 दौर की बातचीत के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया कुछ देशों के संकीर्ण और विभाजनकारी हितों की बंधक नहीं बन सकती।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़ी अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) को अगले सत्र तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही यह प्रक्रिया अब 18वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। सितंबर से शुरू होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में इस पर फिर चर्चा होगी।
पी हरीश ने भारत दर्शन का जिक्र क्यों किया?
भारत ने वार्ता आगे बढ़ाने के फैसले का समर्थन किया, लेकिन सुधार प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी भी जताई। हरीश ने कहा कि 80वां सत्र भी पहले की तरह बिना किसी ठोस उपलब्धि के खत्म हो गया। उन्होंने भारतीय दर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि आत्मा कई जन्मों के बाद मोक्ष प्राप्त करती है, लेकिन सुरक्षा परिषद सुधार के 17 चक्र पूरे होने के बाद भी कोई समाधान दिखाई नहीं दे रहा।
विज्ञापन
भारत ने क्या कहा?
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों की सीटों का विस्तार किया जाए। केवल अस्थायी सीटें बढ़ाने से पांच स्थायी सदस्यों (P5) के निर्णय लेने के अधिकार में कोई बदलाव नहीं आएगा। भारत ने यह भी कहा कि अब लिखित मसौदे के आधार पर तय समयसीमा के साथ बातचीत शुरू होनी चाहिए। साथ ही वैश्विक दक्षिण को सुरक्षा परिषद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
2028-29 की सीट के लिए चुनाव लड़ेगा भारत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस महीने 2028-29 कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए भारत के अभियान की शुरुआत कर चुके हैं। अगले साल जून में होने वाले चुनाव में एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। सबसे हाल में वह 2021-22 के कार्यकाल में परिषद का सदस्य था।
कुछ देश क्या चाहते हैं?
इटली, पाकिस्तान, तुर्किये और कनाडा के यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस (यूएफसी) समूह का प्रस्ताव है कि सुरक्षा परिषद में केवल अस्थायी सीटों की संख्या बढ़ाई जाए। यह समूह परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान तनाव: खत्म हुआ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी? बलिदानियों के आंकड़े पर उठे सवाल, जानें पेंटागन का नया खेल
पश्चिम एशिया में जहाजों पर हमलों की निंदा
सुरक्षा परिषद की एक अलग बैठक में भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी चिंता जताई। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जीएफएस गैलेक्सी, एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा समेत कई व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई, एक लापता है और कई अन्य घायल हुए हैं। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही हर हाल में बहाल होनी चाहिए।
भारत के लिए क्यों अहम है पश्चिम एशिया?
भारत ने कहा कि पश्चिम एशिया उसकी अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और लाखों भारतीयों से सीधे जुड़ा हुआ क्षेत्र है।
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़ी अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) को अगले सत्र तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही यह प्रक्रिया अब 18वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। सितंबर से शुरू होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में इस पर फिर चर्चा होगी।
विज्ञापन
पी हरीश ने भारत दर्शन का जिक्र क्यों किया?
भारत ने वार्ता आगे बढ़ाने के फैसले का समर्थन किया, लेकिन सुधार प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी भी जताई। हरीश ने कहा कि 80वां सत्र भी पहले की तरह बिना किसी ठोस उपलब्धि के खत्म हो गया। उन्होंने भारतीय दर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि आत्मा कई जन्मों के बाद मोक्ष प्राप्त करती है, लेकिन सुरक्षा परिषद सुधार के 17 चक्र पूरे होने के बाद भी कोई समाधान दिखाई नहीं दे रहा।
विज्ञापन
भारत ने क्या कहा?
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों की सीटों का विस्तार किया जाए। केवल अस्थायी सीटें बढ़ाने से पांच स्थायी सदस्यों (P5) के निर्णय लेने के अधिकार में कोई बदलाव नहीं आएगा। भारत ने यह भी कहा कि अब लिखित मसौदे के आधार पर तय समयसीमा के साथ बातचीत शुरू होनी चाहिए। साथ ही वैश्विक दक्षिण को सुरक्षा परिषद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
2028-29 की सीट के लिए चुनाव लड़ेगा भारत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस महीने 2028-29 कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए भारत के अभियान की शुरुआत कर चुके हैं। अगले साल जून में होने वाले चुनाव में एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। सबसे हाल में वह 2021-22 के कार्यकाल में परिषद का सदस्य था।
कुछ देश क्या चाहते हैं?
इटली, पाकिस्तान, तुर्किये और कनाडा के यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस (यूएफसी) समूह का प्रस्ताव है कि सुरक्षा परिषद में केवल अस्थायी सीटों की संख्या बढ़ाई जाए। यह समूह परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान तनाव: खत्म हुआ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी? बलिदानियों के आंकड़े पर उठे सवाल, जानें पेंटागन का नया खेल
पश्चिम एशिया में जहाजों पर हमलों की निंदा
सुरक्षा परिषद की एक अलग बैठक में भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी चिंता जताई। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जीएफएस गैलेक्सी, एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा समेत कई व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई, एक लापता है और कई अन्य घायल हुए हैं। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही हर हाल में बहाल होनी चाहिए।
भारत के लिए क्यों अहम है पश्चिम एशिया?
भारत ने कहा कि पश्चिम एशिया उसकी अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और लाखों भारतीयों से सीधे जुड़ा हुआ क्षेत्र है।
- खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं।
- जीसीसी देशों के साथ भारत का सालाना व्यापार करीब 180 अरब डॉलर का है।
- भारत को इन देशों से 52 अरब डॉलर से अधिक का प्रेषण (रेमिटेंस) और 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिलता है।