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US: 'देश के लिए मुख्य स्तंभ बना हुआ है संविधान', अमेरिकी मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी; ट्रंप के लिए क्या इशारा?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 01 Jan 2026 07:19 AM IST
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सार

रॉबर्ट्स के पत्र की शुरुआत थॉमस पेन की ओर से लिखित 1776 के महत्वपूर्ण पैम्फलेट 'कॉमन सेंस' के इतिहास से हुई। इसका समापन कूलिज के इस प्रोत्साहन के साथ हुआ कि पक्षपातपूर्ण राजनीति के तमाम झंझटों के बीच संविधान और स्वतंत्रता की घोषणा में सांत्वना ढूंढें।

US Chief Justice John Roberts says Constitution remains firm and unshaken major Supreme Court rulings Trump
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट को इस साल कई बड़े मामलों पर फैसला सुनाना है। - फोटो : ANI
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अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बुधवार को कहा कि संविधान देश के लिए एक मजबूत स्तंभ बना हुआ है। अमेरिकी मुख्य न्यायाधीश का यह संदेश देश की न्यायिक प्रणाली में उथल-पुथल भरे वर्ष के बाद आया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले आने वाले हैं।

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रॉबर्ट्स ने कहा कि राष्ट्र के संस्थापक दस्तावेज मजबूत और स्थायी बने हुए हैं। रॉबर्ट्स ने राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज के एक सदी पुराने कथन का संदर्भ देते हुए न्यायपालिका को लिखे अपने वार्षिक पत्र में लिखा, 'तब भी सत्य था; अब भी सत्य है।'
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अमेरिकी मुख्य न्यायाधीश कर चुके हैं ट्रंप की निंदा 
यह पत्र ऐसे वक्त में सामने आया है, जब बीते साल अमेरिका के कानूनी विद्वानों और डेमोक्रेट्स सांसदों ने संभावित संवैधानिक संकट की आशंका जताई है। इसके पीछे वजह रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों का उन फैसलों का विरोध करना है, जिन्होंने उनके दूरगामी रूढ़िवादी एजेंडे को धीमा कर दिया था।

इन मुद्दों पर जॉन रॉबर्ट्स ने भी एक बार अपनी राय रखी थी। उन्होंने ट्रंप की ओर से उस न्यायाधीश के महाभियोग की मांग करने के बाद निंदा की थी, जिसने गिरोह के सदस्य होने के आरोपी वेनेजुएला के प्रवासियों के निर्वासन से संबंधित एक मामले में प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाया था।

2026 में कई बड़े मामलों पर आने हैं फैसले
अमेरिकी मुख्य न्यायाधीश का बुधवार का पत्र काफी हद तक देश के इतिहास पर केंद्रित था, जिसमें 19वीं सदी के शुरुआती दौर का एक मामला भी शामिल था। इसके तहत इस सिद्धांत को स्थापित किया कि कांग्रेस को विवादास्पद फैसलों के आधार पर न्यायाधीशों को उनके पद से नहीं हटाना चाहिए।

निचली अदालतों में ट्रंप प्रशासन को विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की आपातकालीन सुनवाई में उसे करीब दो दर्जन मामलों में जीत हासिल हुई हैं। अदालत के रूढ़िवादी बहुमत ने ट्रंप को फिलहाल ट्रांसजेंडर लोगों को सेना से प्रतिबंधित करने, कांग्रेस की ओर से अनुमोदित अरबों डॉलर के संघीय खर्च को वापस लेने, आव्रजन पर आक्रामक रुख अपनाने और सीनेट की ओर से पुष्टि किए गए स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को बर्खास्त करने की अनुमति दे दी है।

ये भी पढ़ें: नए साल से पहले ट्रंप का दावा: US में रिकॉर्ड निवेश, कारखाने और व्यवसायों के लिए अभूतपूर्व दौर; टैरिफ अहम कारण

पिछले एक साल में अदालत ने ट्रंप को कुछ मामलों में करारी हार भी दी है, जिसमें अमेरिकी शहरों में नेशनल गार्ड तैनात करने का उनका प्रयास भी शामिल है। 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सामने अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी हैं, जिनमें जन्मजात नागरिकता को समाप्त करने के लिए ट्रंप के प्रयासों पर बहस और इस बात पर फैसला शामिल है कि क्या वह सैकड़ों देशों पर एकतरफा रूप से टैरिफ लगा सकते हैं।

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