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US: अमेरिका ने जताई बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ पर चिंता, चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों पर खतरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: लव गौर
Updated Tue, 10 Feb 2026 11:25 AM IST
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सार
बांग्लादेश में आम चुनाव 12 फरवरी को होने जा रहे हैं। इससे पहले अमेरिका में बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। ब्रीफिंग में चेतावनी देते हुए बताया गया कि देश एक गंभीर राजनीतिक मोड़ की तरफ बढ़ रहा है।
बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI Photos
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विस्तार
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने जा रहे हैं। शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद यह पहले चुनाव है। इस बीच धार्मिक अल्पसंख्यकों पर खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका में बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ पर चिंता जाहिर की गई है। अमेरिकी कांग्रेस की एक ब्रीफिंग में चेतावनी देते हुए बताया गया कि देश एक गंभीर राजनीतिक मोड़ की तरफ बढ़ रहा है।
दरअसल, बांग्लादेश की स्थिति को लेकर यूएस कांग्रेस ब्रीफिंग हिंदू एक्शन और कोहना संगठनों ने रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में आयोजित की थी। इसमें अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने कहा कि किसी भी देश में सुधार के दावों को परखने का सबसे सही तरीका यह देखना है कि वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।
अमेरिका के लिए बांग्लादेश चिंता का विषय
रूबिन ने आगे कहा कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टी धर्म का इस्तेमाल जवाबदेही से बचने के लिए करते हैं और इससे माहौल भड़काऊ बनता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब समाज में सहनशीलता खत्म हो जाती है, तो उसे दोबारा हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में बांग्लादेश तेजी से गंभीर चिंता वाले देश की श्रेणी में आ सकता है और यह स्थिति अमेरिका के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए।
उनके अनुसार बांग्लादेश आबादी और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बहुत अहम देश है और दक्षिण एशिया की दिशा बताने वाला संकेतक भी है। इतना ही नहीं रूबिन ने अमेरिका की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका अक्सर पहले घटना होने देता है और फिर प्रतिक्रिया करता है, जबकि समय रहते कदम उठाना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने पॉलिटिकल हिंसा की रिपोर्टिंग में डिप्लोमैटिक टालमटोल की भी आलोचना की।
जमात-ए-इस्लामी को दिया आतंकी संगठन करार
उन्होंने कहा, 'पैसिव वॉइस का इस्तेमाल करके, आप यह दिखा रहे हैं कि आपको नहीं पता कि बम किसने फोड़ा या आप खास तौर पर उस विषय को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। आप असल में आतंकवाद को व्हाइटवॉश कर रहे हैं।' सवाल-जवाब सेशन के दौरान माइकल रुबिन ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी को एक सामान्य राजनीतिक दल की तरह नहीं देखा जाना चाहिए और उन्होंने इसे आतंकी संगठन करार दिया।
इस ब्रीफिंग में पत्रकार और भू-राजनीतिक विश्लेषक एडेल नजारियन ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी का चुनाव केवल बांग्लादेश का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ेगा। एडेल ने कहा कि अवामी लीग को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखना समाज के लिए खतरनाक संदेश है।
ये भी पढ़ें: 'यह देख रहे हैं तो मैं मर चुका': ईरानी युवक ने ट्रंप को वीडियो भेजकर दी जान, ईरान से बात नहीं करने की गुहार
धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक शासन पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि जब किसी बड़ी पार्टी को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है, तो समाज को जो संदेश जाता है वह सीधा और खतरनाक होता है। इससे यह धारणा बनती है कि सत्ता वैध तरीके से नहीं, बल्कि ताकत के बल पर तय होती है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व से साफ और ठोस कदम उठाने की अपील की। नजारियन ने कहा कि सिर्फ बयान देना काफी नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई भी जरूरी है। बता दें कि यह ब्रीफिंग बांग्लादेश के चुनाव से कुछ दिन पहले हुई, जिसमें शिक्षाविदों, पत्रकारों और सामुदायिक नेताओं ने धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक शासन पर गंभीर चिंता जताई गई।
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दरअसल, बांग्लादेश की स्थिति को लेकर यूएस कांग्रेस ब्रीफिंग हिंदू एक्शन और कोहना संगठनों ने रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में आयोजित की थी। इसमें अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने कहा कि किसी भी देश में सुधार के दावों को परखने का सबसे सही तरीका यह देखना है कि वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।
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अमेरिका के लिए बांग्लादेश चिंता का विषय
रूबिन ने आगे कहा कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टी धर्म का इस्तेमाल जवाबदेही से बचने के लिए करते हैं और इससे माहौल भड़काऊ बनता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब समाज में सहनशीलता खत्म हो जाती है, तो उसे दोबारा हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में बांग्लादेश तेजी से गंभीर चिंता वाले देश की श्रेणी में आ सकता है और यह स्थिति अमेरिका के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए।
उनके अनुसार बांग्लादेश आबादी और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बहुत अहम देश है और दक्षिण एशिया की दिशा बताने वाला संकेतक भी है। इतना ही नहीं रूबिन ने अमेरिका की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका अक्सर पहले घटना होने देता है और फिर प्रतिक्रिया करता है, जबकि समय रहते कदम उठाना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने पॉलिटिकल हिंसा की रिपोर्टिंग में डिप्लोमैटिक टालमटोल की भी आलोचना की।
जमात-ए-इस्लामी को दिया आतंकी संगठन करार
उन्होंने कहा, 'पैसिव वॉइस का इस्तेमाल करके, आप यह दिखा रहे हैं कि आपको नहीं पता कि बम किसने फोड़ा या आप खास तौर पर उस विषय को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। आप असल में आतंकवाद को व्हाइटवॉश कर रहे हैं।' सवाल-जवाब सेशन के दौरान माइकल रुबिन ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी को एक सामान्य राजनीतिक दल की तरह नहीं देखा जाना चाहिए और उन्होंने इसे आतंकी संगठन करार दिया।
इस ब्रीफिंग में पत्रकार और भू-राजनीतिक विश्लेषक एडेल नजारियन ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी का चुनाव केवल बांग्लादेश का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ेगा। एडेल ने कहा कि अवामी लीग को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखना समाज के लिए खतरनाक संदेश है।
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धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक शासन पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि जब किसी बड़ी पार्टी को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है, तो समाज को जो संदेश जाता है वह सीधा और खतरनाक होता है। इससे यह धारणा बनती है कि सत्ता वैध तरीके से नहीं, बल्कि ताकत के बल पर तय होती है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व से साफ और ठोस कदम उठाने की अपील की। नजारियन ने कहा कि सिर्फ बयान देना काफी नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई भी जरूरी है। बता दें कि यह ब्रीफिंग बांग्लादेश के चुनाव से कुछ दिन पहले हुई, जिसमें शिक्षाविदों, पत्रकारों और सामुदायिक नेताओं ने धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक शासन पर गंभीर चिंता जताई गई।
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