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इस्राइल-अमेरिका के ईरान से संघर्ष का कहां-कितना असर: पश्चिम एशिया में था अलर्ट, फिर क्यों नहीं लौट पाए भारतीय?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Mon, 02 Mar 2026 06:24 PM IST
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सार
पश्चिम एशिया में किस क्षेत्र में कितने भारतीय रहते हैं? अमेरिका-इस्राइल और ईरान ने इस क्षेत्र में कहां-कहां कितना खतरनाक हमले किए हैं? इस संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया में भारतीय कितने सुरक्षित हैं? भारत सरकार की तरफ से संघर्ष शुरू होने से पहले ही ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए एडवायजरी जारी की गई थी, इसके बावजूद वे क्यों देश नहीं लौट पाए? आइये जानते हैं...
पश्चिम एशिया में भारतीयों की बड़ी जनसंख्या।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका और इस्राइल की तरफ से ईरान पर हमला बोले जाने के बाद पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़े हैं। ईरान ने भी इस्राइल और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया है। हालिया समय में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लेकर कतर और कुवैत तक स्थित अमेरिकी बेसों को निशाना बनाया। ईरान के यह हमले इतने घातक रहे कि यूएई के एक होटल में ड्रोन गिरने से आग लग गई। इसके अलावा क्षेत्र में कई नागरिक जुटाव वाले इलाकों में भी लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं।
पश्चिम एशिया में मौजूदा समय में जैसी स्थितियां पैदा हुई हैं, उनसे क्षेत्र में बसे भारतीय नागरिकों का एक वर्ग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दरअसल, पश्चिम एशिया के अलग-अलग देशों में लाखों की संख्या में भारतीय रह रहे हैं और अलग-अलग नौकरियों या काम में जुटे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग भारत से इस क्षेत्र में शिक्षा, व्यापार, पर्यटन आदि गतिविधियों के लिए भी पहुंचते रहते हैं।
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पश्चिम एशिया में मौजूदा समय में जैसी स्थितियां पैदा हुई हैं, उनसे क्षेत्र में बसे भारतीय नागरिकों का एक वर्ग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दरअसल, पश्चिम एशिया के अलग-अलग देशों में लाखों की संख्या में भारतीय रह रहे हैं और अलग-अलग नौकरियों या काम में जुटे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग भारत से इस क्षेत्र में शिक्षा, व्यापार, पर्यटन आदि गतिविधियों के लिए भी पहुंचते रहते हैं।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पश्चिम एशिया में किस क्षेत्र में कितने भारतीय रहते हैं? अमेरिका-इस्राइल और ईरान ने इस क्षेत्र में कहां-कहां कितना खतरनाक हमले किए हैं? इस संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया में भारतीय कितने सुरक्षित हैं? भारत सरकार की तरफ से संघर्ष शुरू होने से पहले ही ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए एडवायजरी जारी की गई थी, इसके बावजूद वे क्यों देश नहीं लौट पाए? आइये जानते हैं...
पश्चिम एशिया के किस देश में कितने भारतीय बसे?
पश्चिम एशिया के अधिकतर देशों में भारतीय या तो पढ़ाई, रोजगार, व्यापार या फिर पर्यटन के मकसद से ही जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, इस पूरे क्षेत्र में करीब 97 लाख भारतीय बसे हैं। इनमें करीब 40 फीसदी तो अकेले संयुक्त अरब अमीरात में ही रह रहे हैं। वहीं सबसे कम यमन में बसे हैं।अमेरिका-इस्राइल और ईरान के संघर्ष में कहां-कहां कितने खतरनाक हमले?
1. अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर हमले
अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के कई प्रमुख शहरों, सैन्य ठिकानों और राजनीतिक केंद्रों पर संयुक्त हमले किए हैं। जिन जगहों पर हमले हुए हैं, उनमें ईरान की राजधानी तेहरान सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
तेहरान में कहां-कहां हमलेसुप्रीम लीडर का परिसर: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के उच्च-सुरक्षा वाले परिसर (कंपाउंड) पर हमला किया गया, जिसमें उनकी, उनके रिश्तेदारों के अलावा उनके करीबी अधिकारियों की मृत्यु हो गई।
नर्मक: यहां के 72वें स्क्वायर और हेदायत हाई स्कूल पर हमला हुआ। यह वह आवासीय क्षेत्र है जहां पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद रहते हैं।
खुफिया मंत्रालय: ईरान के खुफिया मंत्रालय के आसपास के क्षेत्रों पर बमबारी की गई।
ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर मुख्यालय: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मुख्यालय को नष्ट कर दिया गया।
इसके अलावा, उन स्थानों को भी निशाना बनाया गया जहां वरिष्ठ राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारी एकत्रित थे।
तेहरान के बाहर कहां-कहां हमले
मिनाब: दक्षिणी ईरान के इस शहर में आईआरजीसी के नौसेना बेस के पास स्थित एक लड़कियों के स्कूल (शजराह तैय्यबेह) पर हमला हुआ, जिसे इस हमले के सबसे बड़े हताहत वाले स्थानों में से एक बताया जा रहा है, जहां 115 से अधिक मौतें हुईं)।
तबरीज: उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज में सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया और दो ईरानी लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया गया।
करमनशाह, कोम, इस्फहान, और करज: इन शहरों में स्थित विभिन्न सैन्य साइटों को भी निशाना बनाया गया।
लामेरद: दक्षिणी ईरान के इस शहर में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एक स्कूल से सटे हॉल पर हमला हुआ, जिसमें 18 नागरिकों की जान गई।
कनारक: ईरान के दक्षिण में कनारक में ईरानी नौसेना सुविधाओं पर और छोटे शहर कामयारान में एक आईआरजीसी बेस पर बमबारी की गई। अमेरिकी सेना ने नौ ईरानी नौसेना जहाजों को डुबोने और उनके नौसेना मुख्यालय को काफी हद तक नष्ट करने का भी दावा किया है।
अन्य जगहें
अमेरिका के बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर ने अज्ञात स्थानों पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा उर्मिया, शिराज, जाहेदान, और चाबहार में भी हमले हुए।
मिनाब: दक्षिणी ईरान के इस शहर में आईआरजीसी के नौसेना बेस के पास स्थित एक लड़कियों के स्कूल (शजराह तैय्यबेह) पर हमला हुआ, जिसे इस हमले के सबसे बड़े हताहत वाले स्थानों में से एक बताया जा रहा है, जहां 115 से अधिक मौतें हुईं)।
तबरीज: उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज में सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया और दो ईरानी लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया गया।
करमनशाह, कोम, इस्फहान, और करज: इन शहरों में स्थित विभिन्न सैन्य साइटों को भी निशाना बनाया गया।
लामेरद: दक्षिणी ईरान के इस शहर में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और एक स्कूल से सटे हॉल पर हमला हुआ, जिसमें 18 नागरिकों की जान गई।
कनारक: ईरान के दक्षिण में कनारक में ईरानी नौसेना सुविधाओं पर और छोटे शहर कामयारान में एक आईआरजीसी बेस पर बमबारी की गई। अमेरिकी सेना ने नौ ईरानी नौसेना जहाजों को डुबोने और उनके नौसेना मुख्यालय को काफी हद तक नष्ट करने का भी दावा किया है।
अन्य जगहें
अमेरिका के बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर ने अज्ञात स्थानों पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाया। इसके अलावा उर्मिया, शिराज, जाहेदान, और चाबहार में भी हमले हुए।
2. ईरान के इस्राइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले
इस्राइल और अमेरिका की तरफ से हमले किए जाने के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है। खासकर अपने सर्वोच्च नेता की हत्या के जवाब में ईरान ने इस्राइल के साथ-साथ कई खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों में बड़े पैमाने पर जवाबी हमले किए हैं। इन हमलों में मुख्य रूप से इस्राइली शहरों और क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।इस्राइल
बेत शेमेश: यरुशलम के पास स्थित इस शहर में हुए ईरानी मिसाइल हमले में कम से कम नौ लोग मारे गए और लगभग 30 घायल हुए। यह इस मौजूदा संघर्ष में इस्राइल में अब तक का सबसे बड़ा नुकसान है।
हाइफा: ईरान ने इस्राइल के बंदरगाहों को भी निशाना की है। इसके तहत उसने उत्तरी इस्राइली शहर हाइफा में भी बैलिस्टिक मिसाइल से हमले किए।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर 200 से अधिक ड्रोन और 137 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। कुल मिलाकर यूएई में कम से कम तीन की मौत और 58 के घायल होने की खबर है।
दुबई: यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को नुकसान पहुंचा और पांच सितारा होटलों में आग लग गई, जिसमें सात लोग घायल हुए।
अबु धाबी: अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ड्रोन का मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। इसके अलावा, एतिहाद टावर्स, जहां इस्राइली दूतावास स्थित है, पर भी मलबा गिरा। इसमें कुछ लोगों को चोटें आईं।
ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर 200 से अधिक ड्रोन और 137 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। कुल मिलाकर यूएई में कम से कम तीन की मौत और 58 के घायल होने की खबर है।
दुबई: यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को नुकसान पहुंचा और पांच सितारा होटलों में आग लग गई, जिसमें सात लोग घायल हुए।
अबु धाबी: अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ड्रोन का मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। इसके अलावा, एतिहाद टावर्स, जहां इस्राइली दूतावास स्थित है, पर भी मलबा गिरा। इसमें कुछ लोगों को चोटें आईं।
कुवैत
अमेरिकी सैन्य अड्डा: कुवैत में अली अल-सलेम एयरबेस और अमेरिकी सैनिकों के एक बेस पर हमला किया गया। इस हमले में 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए। कुवैत का कहना है कि ईरान के हमले में अमेरिका के कई लड़ाकू विमान गिरे हैं।
कुवैत मुख्य हवाई अड्डा: यहां एक ड्रोन हमले में नौ कर्मचारी घायल हो गए। कुवैत ने 97 बैलिस्टिक मिसाइलों और 283 ड्रोनों को नष्ट करने का दावा किया है।
बहरीन
ईरान ने मनामा स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल से हमला किया गया। इसके अलावा बहरीन के हवाई अड्डे पर ड्रोन से हमला हुआ और कई आवासीय इमारतों को निशाना बनाया गया। बहरीन ने 45 मिसाइलों और 9 ड्रोनों को रोकने का दावा किया है।
कतर
कतर, जो एक प्रमुख अमेरिकी एयरबेस की मेजबानी करता है, पर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें हवा में ही रोक दिया गया। इस हमले में 16 लोग घायल हुए।
ये भी पढ़ें: West Asia Tension: ट्रंप ने दिए ईरान से बातचीत के संकेत, भड़का ईरान; लारिजानी बोले- नहीं करेंगे कोई समझौता
अमेरिकी सैन्य अड्डा: कुवैत में अली अल-सलेम एयरबेस और अमेरिकी सैनिकों के एक बेस पर हमला किया गया। इस हमले में 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए। कुवैत का कहना है कि ईरान के हमले में अमेरिका के कई लड़ाकू विमान गिरे हैं।
कुवैत मुख्य हवाई अड्डा: यहां एक ड्रोन हमले में नौ कर्मचारी घायल हो गए। कुवैत ने 97 बैलिस्टिक मिसाइलों और 283 ड्रोनों को नष्ट करने का दावा किया है।
बहरीन
ईरान ने मनामा स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर मिसाइल से हमला किया गया। इसके अलावा बहरीन के हवाई अड्डे पर ड्रोन से हमला हुआ और कई आवासीय इमारतों को निशाना बनाया गया। बहरीन ने 45 मिसाइलों और 9 ड्रोनों को रोकने का दावा किया है।
कतर
कतर, जो एक प्रमुख अमेरिकी एयरबेस की मेजबानी करता है, पर ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें हवा में ही रोक दिया गया। इस हमले में 16 लोग घायल हुए।
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ओमान
ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर हमला किया गया, जिसमें चालक दल के चार सदस्य घायल हो गए। इसके अलावा उसके दुकम वाणिज्यिक बंदरगाह पर दो ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें एक कर्मचारी घायल हो गया।
सीरिया
यहां दक्षिणी शहर सुवैदा के औद्योगिक क्षेत्र में एक इमारत पर मिसाइल गिरने से चार लोग मारे गए। माना जा रहा है कि यह ईरानी मिसाइल इस्राइल के लिए दागी गई थी जो रास्ते में गिर गई।
जॉर्डन
जॉर्डन ने अपने क्षेत्र को निशाना बनाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया, जिससे केवल संपत्ति का नुकसान हुआ।
सऊदी अरब
सऊदी अरब ने भी ईरानी हमलों को हवा में ही रोकने का दावा किया है। हालांकि, एक ईरानी ड्रोन सऊदी के डिफेंस सिस्टम को भेदने में कामयाब रहा और अरामको तेल रिफाइनरी के पास ब्लास्ट हो गया।
ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर हमला किया गया, जिसमें चालक दल के चार सदस्य घायल हो गए। इसके अलावा उसके दुकम वाणिज्यिक बंदरगाह पर दो ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें एक कर्मचारी घायल हो गया।
सीरिया
यहां दक्षिणी शहर सुवैदा के औद्योगिक क्षेत्र में एक इमारत पर मिसाइल गिरने से चार लोग मारे गए। माना जा रहा है कि यह ईरानी मिसाइल इस्राइल के लिए दागी गई थी जो रास्ते में गिर गई।
जॉर्डन
जॉर्डन ने अपने क्षेत्र को निशाना बनाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया, जिससे केवल संपत्ति का नुकसान हुआ।
सऊदी अरब
सऊदी अरब ने भी ईरानी हमलों को हवा में ही रोकने का दावा किया है। हालांकि, एक ईरानी ड्रोन सऊदी के डिफेंस सिस्टम को भेदने में कामयाब रहा और अरामको तेल रिफाइनरी के पास ब्लास्ट हो गया।
पश्चिम एशिया में फिलहाल भारतीय कितने सुरक्षित?
पश्चिम एशिया में ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा खतरे में आई है। दरअसल क्षेत्र में संघर्ष के चलते अधिकतर एयरलाइन कंपनियों ने अपनी सेवाओं को कुछ समय के लिए रोक दिया है। इसके अलावा कुछ देशों में लगातार होते हमलों की वजह से लोगों को सुरक्षित क्षेत्र में जाने के लिए कहा गया है।फ्लाइट्स रद्द होने से फंसे लोग: इस क्षेत्र के कई देशों (जैसे ईरान, इस्राइल, इराक, यूएई आदि) का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं या निलंबित कर दी हैं। इसके अलावा विदेशी एयरलाइंस भी क्षेत्र में सेवाओं को बंद रखे हुए हैं, जिससे लाखों भारतीय वहां फंस गए हैं।
डर और दहशत का माहौल: मिसाइल हमलों और इनसे बचाव के लिए अलर्ट करने वाले सायरन की आवाजों की वजह से भारतीय नागरिकों में खौफ है। लोग एहतियात के तौर पर घरों के अंदर रह रहे हैं, सुरक्षित रहने की कोशिश कर रहे हैं और जरूरी भोजन का भंडारण कर रहे हैं। दुबई गए पुणे के एक कॉलेज के 84 छात्र भी फंस गए हैं जिन्हें सुरक्षित होटलों में ले जाया गया है। कर्नाटक और केरल के हजारों कामगारों के परिवार भी उनकी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के भी सैकड़ों लोग जहां-तहां फंसे हैं।
सरकार लगातार जारी कर रही एडवाइजरी: भारत के विदेश मंत्रालय के साथ-साथ ईरान, इस्राइल, यूएई, बहरीन और कतर स्थित भारतीय दूतावासों ने कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। नागरिकों से सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने, घरों के अंदर रहने और सतर्क रहने को कहा गया है। दूतावासों ने नागरिकों की मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।
सरकार लगातार जारी कर रही एडवाइजरी: भारत के विदेश मंत्रालय के साथ-साथ ईरान, इस्राइल, यूएई, बहरीन और कतर स्थित भारतीय दूतावासों ने कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। नागरिकों से सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने, घरों के अंदर रहने और सतर्क रहने को कहा गया है। दूतावासों ने नागरिकों की मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।
भारत के अलर्ट के बावजूद ईरान से क्यों नहीं लौटे भारतीय?
चौंकाने वाली बात यह है कि भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले ही लोगों को क्षेत्र से निकलने के लिए कई परामर्श जारी किए थे। सबसे ज्यादा एडवायजरी ईरान में रह रहे लोगों के लिए जारी की गईं, जिसमें नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने, छात्रों को तुरंत वापस लौटने तक के लिए कहा गया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में भारतीय अब तक ईरान में ही फंसे हुए हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई से की गई बातचीत में छात्रों ने अपने न लौटने की वजह भी बताई।- छात्रों को बेसिक साइंसेज और प्री-इंटर्नशिप की अनिवार्य सरकारी परीक्षाएं देनी हैं। इन परीक्षाओं के नतीजे ही यह तय करते हैं कि छात्र अपनी क्लिनिकल ट्रेनिंग और अस्पताल की पोस्टिंग के लिए आगे बढ़ सकेंगे या नहीं।
- ये परीक्षाएं साल में केवल दो बार आयोजित की जाती हैं। छात्रों का कहना है कि यदि वे भारत लौट आते हैं और परीक्षा छूट जाती है, तो उनकी साढ़े पांच साल की मेडिकल डिग्री में देरी होगी और उन्हें कम से कम 6 महीने का शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
- युद्ध के भारी खतरे और तनाव के बावजूद, ईरानी विश्वविद्यालयों ने संघर्ष शुरू होने से पहले तक इन अहम परीक्षाओं को स्थगित नहीं किया, जिसके चलते स्टूडेंट्स जहां-तहां फंस गए। संकट में फंसे इन छात्रों, जिनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर के छात्रों की है, ने अपनी पढ़ाई दांव पर होने के कारण भारत लौटने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी।
- जम्मू-कश्मीर ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) ने भी पीएम को पत्र लिखकर मांग की थी कि भारत सरकार ईरानी अधिकारियों से बात करके परीक्षाओं को स्थगित करवाए, ताकि छात्र बिना किसी अकादमिक नुकसान के सुरक्षित अपने घर लौट सकें।
- कुछ छात्रों ने संघर्ष शुरू होने से पहले यह भी कहा कि ईरान में बाहरी हमले (युद्ध) का खतरा बहुत अधिक है, लेकिन आंतरिक रूप से फिलहाल स्थिति ठीक है। इसलिए वे मजबूरी में सुरक्षा और अपने करियर के बीच फंसे हुए हैं और परीक्षाएं टलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे स्वदेश लौट सकें।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में दूसरे देशों से फ्लाइट सेवाएं रद्द होने की वजह से भारतीयों की वतन वापसी में मुश्किलें आ रही हैं।