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पश्चिम एशिया में युद्ध का एक महीना: ईरान को कितना नुकसान, अमेरिका की कैसे फंसी जान? जानें हर हफ्ते का घटनाक्रम

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Sat, 28 Mar 2026 05:07 PM IST
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सार

अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बीते चार हफ्तों से जारी युद्ध में कई अहम घटनाक्रम हुए हैं। जहां ईरान में शीर्ष नेतृत्व को अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त अभियानों में मार गिराया, तो वहीं ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर के दुनियाभर की ऊर्जा सप्लाई को बाधित कर दिया है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार हर हफ्ते ईरान में अपने लक्ष्य बदलते रहे हैं और अब उन्होंने एक बार फिर ईरान से बातचीत के जरिए युद्ध रोकने की बात कही है। 

US Israel Iran War Month West Asia Conflict Donald Trump Gulf Nations Attacked Khamenei Cost of one month war
अमेरिका-इस्राइल बनाम ईरान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है। इस एक महीने में पूरे पश्चिम एशिया की सूरत काफी बदल चुकी है। पूरे क्षेत्र में मृतकों और घायलों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है। इस जंग का असर धीरे-धीरे पूरी दुनिया पर भी दिखने लगा है। इसके बावजूद दोनों ही पक्षों की तरफ से अब तक कोई भी युद्धविराम के लिए पूरी तरह तैयार नहीं दिख रहा है। 
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विशेषज्ञों का कहना है कि बीते एक महीने में जंग में उलझे इस्राइल-अमेरिका और ईरान के साथ-साथ दुनियाभर की राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक असलियत बदली है। जहां ईरान में उच्च-स्तरीय नेतृत्व के कई बड़े चेहरों की मौत हो गई है, तो वहीं अमेरिका-इस्राइल को भी इस युद्ध में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। अगर यह युद्ध कुछ और दिन जारी रहता है तो वैश्विक स्तर पर स्थितियां और गंभीर होने की आशंका है। 
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर युद्ध में बीते चार हफ्तों में क्या-क्या हुआ है? हफ्ते-दर-हफ्ते अमेरिका-इस्राइल और ईरान में क्या सैन्य और राजनीतिक घटनाक्रम दर्ज किया गया? युद्ध की मानवीय और आर्थिक कीमत क्या रही है? आइये जानते हैं...

1. अमेरिका-इस्राइल के ईरान से युद्ध का पहला हफ्ता

सैन्य प्रभाव

शीर्ष ईरानी नेतृत्व का पतन: युद्ध की शुरुआत में ही इस्राइली और अमेरिकी हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, शीर्ष जनरल अब्दोलरहीम मौसवी, ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) कमांडर मोहम्मद पाकपुर और सलाहकार अली शामखानी मारे गए।

ईरान की जवाबी कार्रवाई: ईरान ने इस्राइल, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और ऊर्जा लक्ष्यों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागकर जवाबी कार्रवाई की। इसके अलावा, ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया।

अमेरिकी बलों को नुकसान: कुवैत में एक सैन्य अड्डे पर हुए हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए, और तीन अमेरिकी लड़ाकू विमान फ्रेंडली फायर यानी गलती से अपने ही हमले  का शिकार होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए।

लेबनान तक पहुंचा युद्ध: हिजबुल्ला ने इस्राइल पर रॉकेट दागकर जंग में एंट्री ली, इसके जवाब में इस्रराइल ने लेबनान में भारी बमबारी और जमीनी अभियान शुरू कर दिए।

राजनीतिक असर

टिका रहा ईरानी शासन: अपने शीर्ष नेताओं के मारे जाने के बावजूद ईरानी सरकार नहीं गिरी, और देश में कोई बड़ा तख्तापलट या सरकार विरोधी प्रदर्शन नहीं हुआ।

अमेरिका में घरेलू विरोध: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आलोचकों ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना किए गए इन हमलों की वैधता पर सवाल उठाए। शुरुआती सर्वे से पता चला कि केवल एक चौथाई अमेरिकी जनता ही इस युद्ध का समर्थन कर रही थी।

लक्ष्यों को लेकर भ्रम: राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरानी लोगों को स्वतंत्रता दिलाना है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को नष्ट करने जैसे सीमित लक्ष्य बताए।

खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया: खाड़ी देशों ने खुद को युद्ध में तटस्थ बताते हुए ईरानी हमलों की निंदा की और इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया।


 

मानवीय प्रभाव

  • पहले सप्ताह के अंत तक, अमेरिकी और इस्राइली हमलों की वजह से ईरान में 1,332 लोगों की मौत हुई।
  • दक्षिणी शहर मिनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हुई बमबारी में 170 से अधिक लोग मारे गए, इनमें ज्यादातर बच्चियां थीं। इस बमबारी में अमेरिका का हाथ होने की बात सामने आई।  
  • लेबनान में बढ़ती हिंसा के कारण सैकड़ों लोग मारे गए और लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा।

आर्थिक असर

तेल की कीमतों में भारी उछाल: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से युद्ध के पहले हफ्ते के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गईं।

उड्डयन क्षेत्र प्रभावित: भारत समेत एशिया और पश्चिम के कई देशों ने पश्चिम एशिया के अधिकतर हिस्सों में नागरिक उड़ानों को बड़े पैमाने पर घटा दिया, जिससे हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

2. युद्ध का दूसरा हफ्ता

युद्ध के दूसरे हफ्ते तक यह स्पष्ट हो गया था कि ईरानी सरकार गिरने वाली नहीं है और यह युद्ध कोई छोटा सैन्य अभियान नहीं होगा। 

सैन्य प्रभाव

अमेरिकी विमान दुर्घटना: इराक में अमेरिका का एक ईंधन भरने वाला विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें चालक दल के सभी छह सदस्य मारे गए। ईरान समर्थित इराकी गुटों ने इसे मार गिराने का दावा किया, हालांकि अमेरिकी सेना ने कहा कि यह किसी दुश्मन या अपने ही हमले का नतीजा नहीं था।

तेहरान में 'काली बारिश': अमेरिका और इस्राइल ने अपने हमले जारी रखे और पहली बार तेहरान में तेल भंडारण डिपो को निशाना बनाया। इन हमलों के कारण निकले धुएं से 90 लाख की आबादी वाले इस शहर में काली बारिश हुई।

हमलों का दायरा बढ़ा: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कई जहाजों को निशाना बनाकर अपना नियंत्रण कड़ा कर लिया और सऊदी अरब पर भी हमले किए। इसमें दो लोगों की मौत हो गई। इस बीच अमेरिकी सेना ने माना कि वह अभी जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है।

लेबनान में भारी बमबारी: हिज्बुल्ला और ईरान ने इस्राइल पर रॉकेट हमले किए। इसके जवाब में इस्राइल ने लेबनान में अपना जमीनी हमला और तेज कर दिया और बेरूत और उसके दक्षिणी उपनगरों (दहियाह) पर भारी बमबारी की।
 

राजनीतिक प्रभाव

नए सर्वोच्च नेता के नाम का एलान: राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों के बावजूद ईरान ने दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को अपना नया सर्वोच्च नेता चुन लिया। मोजतबा ने कुछ समय बाद ही ईरानी एजेंसी को भेजे बयान में अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ जंग जारी रखने और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की चेतावनी दी।



नेतृत्व के बयानों में विरोधाभास: राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा, लेकिन इसके उलट अधिकारियों ने जोर दिया कि इस युद्ध की कोई सीमा नहीं है। वहीं, हिज्बुल्ला के नेता नईम कासिम ने कहा कि उनका समूह इस अस्तित्व की लड़ाई में एक लंबे टकराव के लिए पूरी तरह तैयार है।

मानवीय प्रभाव

  • ईरान ने दावा किया कि अमेरिकी और इस्राइली हमलों में उसके लगभग 10,000 नागरिक स्थल क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
  • लेबनान में संकट और गहरा गया, जहां इस्राइल के सैन्य अभियानों की वजह से विस्थापितों की संख्या 8,00,000 को पार कर गई। दूसरे हफ्ते के अंत तक इस्राइली हमलों में लेबनान के अंदर 770 से अधिक लोग मारे जा चुके थे।


आर्थिक प्रभाव

8 मार्च को कच्चे तेल की कीमतें उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं, जो बाद में 90 से 100 डॉलर के बीच आ गईं। वैश्विक ईंधन आपूर्ति को हो रहे नुकसान से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में जारी करने का फैसला किया।

ट्रंप ने सुझाव दिया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से अमेरिका को फायदा होगा क्योंकि वह एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक है, भले ही इससे आम उपभोक्ताओं की लागत और महंगाई बढ़ने का खतरा हो।

3. युद्ध का तीसरा हफ्ता

युद्ध के तीसरे हफ्ते में इस्राइल-अमेरिका का ईरान से यह टकराव नियमित हवाई हमलों से आगे बढ़कर एक बड़े क्षेत्रीय ऊर्जा संघर्ष में बदल गया। 

सैन्य प्रभाव

अली लारिजानी पर हमला: इस्राइल ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और अर्धसैनिक बल बसीज के प्रमुख गोलमरेजा सुलेमानी की हत्या कर दी।



इस्राइल पर मिसाइल हमले: ईरान की दो भारी मिसाइलों ने इस्राइल की तीन स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली को भेदते हुए दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद में भीषण तबाही मचाई। बताया गया कि डिमोना में इस्राइल का एक परमाणु ऊर्जा केंद्र भी था, जो इस हमले की चपेट में आ गया।

ऊर्जा ठिकानों पर युद्ध का विस्तार: इस्राइल ने ईरान के दक्षिण पार्स गैस फील्ड पर बड़ा हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने कतर के रास लाफान एलएनजी संयंत्र और इस्राइल की एक तेल रिफाइनरी समेत क्षेत्रीय ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया। यह टकराव इतना घातक हो गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह कहना पड़ गया कि इस्राइल का हमला उनकी जानकारी के बिना हुआ और अब युद्ध में आगे ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाएगा।

अमेरिकी और अन्य बलों की प्रतिक्रिया: अमेरिका ने ईरानी हमलों को रोकने के लिए पश्चिम एशिया में 10,000 इंटरसेप्टर ड्रोन तैनात किए। इस बीच इराक में ईरान समर्थित गुटों ने बगदाद के पास एक अमेरिकी सैन्य शिविर पर हमले किए, और हिज्बुल्ला ने इस्राइल के अंदर 200 किलोमीटर गहराई तक मार करने वाले रॉकेट दागे।

राजनीतिक असर

ट्रंप का इस्राइली हमले से किनारा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ईरानी गैसफील्ड पर हुए इस्राइल के हमले से खुद को अलग कर लिया और कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को ऐसे हमलों पर रोक लगाने के लिए कहा था। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान आगे कतर को निशाना बनाता है तो वह ईरान को तबाह कर देंगे।



ईरान की शर्तें: ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अपनी शर्तें रखीं। इनमें भविष्य में हमले न होने का आश्वासन, हर्जाना और ईरान के अधिकारों को मान्यता देना शामिल था।

खाड़ी देशों की कड़ी प्रतिक्रिया: कतर के ऊर्जा संयंत्र पर हुए हमले के बाद उसने ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को अवांछित व्यक्ति (पर्सोना नॉन ग्राटा) घोषित कर दिया। सऊदी अरब ने भी कहा कि ईरान पर उसका बचा-खुचा भरोसा भी पूरी तरह टूट गया है।

अमेरिकी अधिकारी का इस्तीफा: अमेरिका के राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधी केंद्र (एनसीटीसी) के निदेशक जो केंट ने यह कहते हुए युद्ध के विरोध में इस्तीफा दे दिया कि जंग शुरू होने के समय ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था। उनके इस्तीफे के बाद रिपब्लिकन पार्टी में ट्रंप की युद्ध नीति को लेकर आवाजें बुलंद होना शुरू हो गईं। दूसरी तरफ अमेरिका के सहयोगी देशों, नाटो और यूरोपीय देशों ने भी इस जंग में सीधा कूदने से इनकार कर दिया। 

मानवीय प्रभाव

  • ईरानी रेड क्रीसेंट के मुताबिक, ईरान में मृतकों की कुल संख्या 1,444 को पार कर गई। इस्राइली-अमेरिकी हमलों में जान गंवाने वालों में 204 बच्चे भी शामिल रहे।
  • लेबनान में स्थिति और बदतर हो गई, जहां इस्राइली हमलों में मृतकों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई और विस्थापितों का आंकड़ा 10 लाख से ज्यादा हो गया।


आर्थिक नुकसान

  • ईरानी हमलों से कतर की 17 प्रतिशत एलएनजी (एलएनजी) उत्पादन की क्षमता खत्म हो गई। इससे उसे 20 अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व का भारी नुकसान होने की संभावना है। इसने यूरोप और एशिया के ऊर्जा बाजारों के लिए भी बड़ा संकट पैदा कर दिया।
  • ऊर्जा संकट का सीधा असर अमेरिका पर पड़ा, जहां पेट्रोल की कीमतें बढ़कर चार डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा हो गईं, जो युद्ध से पहले के मुकाबले करीब एक डॉलर ऊपर थीं।
  • इसके अलावा भारत, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान, आसियान देशों समेत आधी दुनिया के लिए ऊर्जा संकट गहरा गया। इस बीच अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध को हटाते हुए उसके तेल-गैस को खरीदने के लिए 30 दिन की छूट का प्रावधान लागू कर दिया, ताकि ऊर्जा संकट को खत्म किया जा सके।  

 

4. युद्ध का चौथा हफ्ता

युद्ध के चौथे हफ्ते में अमेरिका ने पहली बार ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क का दावा किया, लेकिन इसके साथ ही यह संघर्ष एक लंबी जंग में बदलता दिखाई दिया। दरअसल, ट्रंप एक तरफ बातचीत के लिए टाइमलाइन को बढ़ाते रहे तो वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ती रही।

सैन्य प्रभाव

परमाणु और औद्योगिक ठिकानों पर हमले: इस्राइल ने ईरान के स्टील कारखानों और एक परमाणु रिएक्टर पर बमबारी की। इसके जवाब में ईरान ने पूरे क्षेत्र के औद्योगिक स्थलों को निशाना बनाने की धमकी दी। इस बीच कतर में एक सैन्य हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 3 तुर्की सैनिकों सहित 7 लोग मारे गए।

अमेरिकी सैनिकों की तैनाती: अमेरिका ने पश्चिम एशिया में हजारों अतिरिक्त सैनिकों, जिनमें 82वीं एयरबोर्न डिवीजन और मरीन्स शामिल हैं, को तैनात किया। इससे ईरान के अंदर संवेदनशील ठिकानों, जैसे- खर्ग और होर्मुज जलडमरूमध्य के तटीय क्षेत्रों पर जमीनी हमले की आशंका बढ़ गई।

ट्रंप की धमकियां: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो वे ईरान के पावर प्लांट्स को तबाह कर देंगे। हालांकि, बाद में उन्होंने इस समय सीमा को पहले पांच दिन और फिर 10 दिनों के लिए बढ़ा दिया।

लेबनान में जमीनी लड़ाई: इस्राइली बलों ने दक्षिण लेबनान को जोड़ने वाले प्रमुख कासमियेह ब्रिज पर हमला किया, जबकि हिज्बुल्ला ने दर्जनों इस्राइली टैंकों को तबाह करने का दावा किया। 

राजनीतिक असर

युद्धविराम का प्रस्ताव खारिज: अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा, लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर दिया। इस बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान युद्धविराम की भीख मांग रहा है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने वॉशिंगटन से किसी भी सीधे संपर्क से इनकार किया।

लेबनान की जमीन पर कब्जे के संकेत: इस्राइल के वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच ने बयान दिया कि इस्राइल की नई सीमा लेबनान की लिटानी नदी होनी चाहिए। इसका सीधा मतलब होगा कि लेबनान के लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र पर इस्राइल कब्जे कीकोशिश कर रहा है।

हूती विद्रोहियों की चेतावनी: अब तक तटस्थ रहे यमन के हूती समूह ने चेतावनी दी कि अगर लाल सागर का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया गया या युद्ध और भड़का, तो वे भी इस युद्ध में शामिल हो जाएंगे।

खाड़ी देशों का रुख: कतर ने संघर्ष को कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे दुश्मनों से ब्लैकमेल नहीं होंगे। इन सबसे अलग कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि सऊदी अरब युद्धविराम की कोशिशों के खिलाफ है और वह अमेरिका से ईरान के खिलाफ युद्ध के सारे मकसद पूरे करने का आग्रह करते हुए युद्ध जारी करने को कह रहा है। 

मानवीय प्रभाव

  • पहले महीने के अंत तक ईरान में मरने वालों की संख्या 2,000 के करीब पहुंच गई। उधर खाड़ी क्षेत्र में 25 मौतें हुईं। इसके अलावा अमेरिका के 13 सैनिकों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 200 से ज्यादा घायल बताए गए हैं। 
  • ईरान और हिज्बुल्ला की तरफ से किए गए हमलों में में पहले महीने में 20 इस्राइली नागरिक मारे गए। वहीं, पांच हजार से ज्यादा घायल हैं।
  • लेबनान में इस्राइली हमलों में 121 बच्चों सहित 1,116 लोग मारे गए और बमबारी के कारण 12 लाख से ज्यादा विस्थापित हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक गंभीर मानवीय आपदा करार दिया।


आर्थिक संकट

तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल: आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गईं, जो 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर था।

शेयर बाजारों में भारी गिरावट: युद्ध से जुड़ी आर्थिक अनिश्चितता के चलते अमेरिकी शेयर बाजारों, जैसे एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भारी नुकसान और गिरावट दर्ज की गई। उधर भारत में भी शेयर बाजार में एक महीने के अंदर करीब 10 फीसदी (7700 अंकों) की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। आगे अगर यह युद्ध जारी रहता है तो शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी रहेगा।


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