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West didnt supply weapons to India for decades as it saw military dictatorship its preferred partner Jaishanka
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जयशंकर की दो टूक: पश्चिमी देश भारत को नहीं देते थे हथियार, क्षेत्र में सैन्य तानाशाही को मानते थे अपना साझेदार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 10 Oct 2022 09:41 PM IST
सार
विदेश मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा, हमारे पास सोवियत और रूसी हथियारों की एक बड़ी सूची है। यह सूची कई कारणों से बढ़ी है। आप हथियार प्रणालियों की खूबियां जानते हैं..लेकिन पश्चिमी देशों ने कई दशकों तक भारत को हथियारों की आपूर्ति नहीं की।
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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर
- फोटो : Twitter/Dr. S Jaishankar (File)
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अपने बेबाक बयानों से चर्चाओं में रहने वाले विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने एक बार फिर पश्चिमी देशों पर निशाना साधा है। जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत के पास आज पर्याप्त मात्रा में इसलिए सोवियत और रूसी हथियार हैं, क्योंकि पश्चिमी देशों ने इस क्षेत्र में एक सैन्य तानाशाही (पाकिस्तान) को अपने 'पसंदीदा साथी' के रूप में चुना और दशकों तक नई दिल्ली को हथियारों की आपूर्ति नहीं की।
'रूस के संबंधों से भारतीय हिंतों की हुई सेवा'
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अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर
- फोटो : Twitter/Senator Penny Wong
यह बात उन्होंने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग के साथ संयुक्त सम्मेलन के दौरान कही। जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से संबंध हैं, जिससे निश्चित तौर पर भारत के हितों की अच्छी सेवा हुई है।
'पश्चिम ने एक सैन्य तानाशाही वाले देश को पसंदीदा साथी के रूप में देखा'
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अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर
- फोटो : Twitter/ Dr S. Jaishankar
विदेश मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा, हमारे पास सोवियत और रूसी हथियारों की एक बड़ी सूची है। यह सूची कई कारणों से बढ़ी है। आप हथियार प्रणालियों की खूबियां जानते हैं..लेकिन पश्चिमी देशों ने कई दशकों तक भारत को हथियारों की आपूर्ति नहीं की और हमारे बगल के एक सैन्य तानाशाही वाले देश को पसंदीदा साथी के रूप में देखा।
डॉ. जयशंकर जाहिर तौर पर पाकिस्तान की ओर इशारा कर रहे थे। शीत युद्ध के दौर में अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देश उसके करीबी सहयोगी थे। पाकिस्तान अपने अस्तित्व के 73 वर्षों के बाद भी आधे से ज्यादा समय सेना के जनरलों के द्वारा शासित रहा है।
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रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कही ये बात
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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर
- फोटो : Twitter/ Senator Penny Wong
विदेश मंत्री ने आगे कहा, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हमारे पास जो भी है, हम उससे निपटते हैं। हम वो फैसले लेते हैं जो हमारे भविष्य के हितों के साथ-साथ हमारी वर्तमान स्थिति दोनों को प्रतिबिंबित करते हैं। जयशंकर ने रूस-यूक्रेन के बीच के मौजूदा संघर्ष को लेकर कहा कि मेरी समझ में हर सैन्य संघर्ष की तरह इससे हम सीख रहे हैं और मुझे यकीन है कि सेना में मेरे पेशेवर सहयोगी इसका बहुत गहराई से अध्ययन कर रहे होंगे।
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'क्या भारत को रूसी हथियारों पर निर्भरता कम करनी चाहिए?'
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अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष के साथ विदेश मंत्री जयशंकर
- फोटो : Twitter/ Dr S. Jaishankar
एक ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि क्या भारत को रूसी हथियार प्रणालियों पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और क्या यूक्रेन की स्थिति को देखते हुए उसके साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करना चाहिए।
पिछले महीने जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी यही सवाल उनसे किया गया था। तब उन्होंने कहा था कि भारत एक विकल्प का प्रयोग करता है, जो मानता है कि जब उसे हथियारों की पेशकश की जाती है तो वह उसके अपने हित में होती है।
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