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World: भारतवंशी विज्ञानी रामनाथन ने जीता क्रैफोर्ड पुरस्कार; अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार- क्यूबा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 03 Feb 2026 05:11 AM IST
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दुनिया की बड़ी खबरें - फोटो : amar ujala graphics
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अमेरिका में भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को ‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज’ ने भू-विज्ञान में 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है। भू-विज्ञान का नोबेल कहे जाने वाले इस सम्मान के तहत रामनाथन को सुपर-प्रदूषकों और वायुमंडलीय ब्राउन क्लाउड्स पर किए गए उनके शोध के लिए सम्मानित किया गया है। इससे ग्लोबल वॉर्मिंग की समझ को नई दिशा मिली। रामनाथन (82) ने 1975 में नासा में काम करते हुए एक ऐतिहासिक खोज की थी। उन्होंने बताया, क्लोरोफ्लोरोकार्बन, जो एरोसोल व रेफ्रिजरेशन में इस्तेमाल होते थे, वायुमंडल में सीओ-2 की तुलना में 10,000 गुना प्रभावी ढंग से गर्मी खींचते हैं। 
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क्यूबा ने कहा- अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार

क्यूबा के एक वरिष्ठ नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार की अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन अगर कुछ शर्तें पूरी होती हैं तो वे इसके लिए तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। 

क्यूबा के उप विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांडीज डी कोसियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद यह बात कही है, जिसमें ट्रंप ने क्यूबा को तेल देने वाले देश पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा, 'हम बातचीत के लिए तैयार हैं। अगर हम बातचीत कर सकते हैं, तो शायद इससे बातचीत की शुरुआत हो सकती है।' कोसियो ने कहा कि क्यूबा अमेरिका के साथ इस मकसद से कि हमारे दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद हम एक सम्मानजनक, गंभीर सह-अस्तित्व बनाए रख सकें, अनौपचारिक बातचीत के लिए तैयार है।'

लेकिन कोसियो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि क्यूबा के लिए कुछ चीजें बातचीत से बाहर हैं, जिसमें देश का संविधान, अर्थव्यवस्था और सरकार की प्रणाली शामिल है, जो समाजवादी है। क्यूबा एक गंभीर आर्थिक संकट, लगातार बिजली कटौती, वेनेजुएला से तेल शिपमेंट में रुकावट और अमेरिकी प्रतिबंधों से जूझ रहा है, जिसके बारे में क्यूबा के अधिकारियों का कहना है कि मार्च 2024 और फरवरी 2025 के बीच देश को 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।
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पीएम मोदी की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत इस्राइल में 300 पेड़ लगाए गए

इस्राइल के मोशव नेवातिम इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान और यहूदी त्योहार टू बिशवत को साथ मिलकर मनाया गया, जिसके तहत कम से कम 300 पेड़ लगाए गए। टू बिशवत को इस्राइल में पर्यावरण जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय दूतावास ने केरेन कायमेट लेइजराइल और मोशव नेवातिम के सहयोग से किया था। यह आयोजन पर्यावरण स्थिरता, सामुदायिक भागीदारी और भारत और इस्राइल के बीच लोगों के आपसी संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक था। इस्राइल के पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय के महानिदेशक रामी रोजेन, इस्राइल में भारत के राजदूत जेपी सिंह और बनेई शिमोन क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख नीर जमीर ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। 

सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'टू बिशवत और एक पेड़ मां के नाम दोनों ही पेड़ों को सामुदायिक जुड़ाव और स्थायी जीवन के केंद्र में रखते हैं। ये साझा प्रथाएं भारत और इज़राइल के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और मजबूत लोगों के आपसी संबंधों को दर्शाती हैं, जो प्रकृति, समुदाय और साझा मूल्यों पर हमारे दोनों देशों द्वारा दिए जाने वाले महत्व को रेखांकित करती हैं।'

भारतीय राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि, 'मुझे पूरा विश्वास है कि ये पेड़ भारत-इस्राइल दोस्ती के स्थायी प्रतीक के रूप में खड़े रहेंगे, और इस बंधन को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएंगे।'

कार्की ने माना- जेन-जी विद्रोह सरकारी विफलता
नेपाल की पीएम सुशीला कार्की ने पिछले साल 8-9 सितंबर को हुए जेन-जी विद्रोह को सत्ता की विफलताओं का आईना बताया है। राष्ट्रीय सभा में बोलते हुए कार्की ने स्वीकारा, यह आंदोलन युवाओं की आकांक्षाओं की उपेक्षा, व्याप्त भ्रष्टाचार और सुशासन की कमी के विरुद्ध उभरा एक आक्रोश था। कार्की ने कहा, यह विद्रोह एक ऐसा दर्पण है, जिसमें हम अपनी शासकीय त्रुटियां और आचरणगत कमजोरियां देख रहे हैं। उन्होंने माना, कार्यपालिका, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका द्वारा समय पर जिम्मेदारी न निभाने के कारण देश को बड़ी क्षति हुई। पीएम ने घोषणा की कि सरकार ने आंदोलन में मारे गए लोगों को शहीद घोषित कर उनके परिवारों को राहत दी है। साथ ही, आंदोलनकारियों के साथ मांगों को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता भी किया गया है।

आंदोलन में लूटे गए ज्यादातर हथियार जब्त
आगामी चुनावों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि 5 मार्च को होने वाले प्रतिनिधि सभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान लूटे गए अधिकांश हथियार बरामद कर लिए गए हैं और एकीकृत सुरक्षा योजना लागू है।

नेपाल की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने इस चुनाव को केवल जनप्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत बनाने का आह्वान किया। कार्की ने सभी दलों से स्वच्छ और भयमुक्त वातावरण में चुनाव संपन्न कराने की अपील की।

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