UNEP: प्रकृति को नुकसान पहुंचाने पर सालाना 7.3 लाख करोड़ डॉलर खर्च कर रही दुनिया; पर्यावरण बचाने के दावे खोखले
संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। दुनिया पर्यावरण संरक्षण के बजाय उसे नुकसान पहुंचाने वाली योजनाओं पर कहीं ज्यादा खर्च कर रही है। जानिए पूरी रिपोर्ट क्या कहती है...
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धरती को बचाने के दावों और वैश्विक सम्मेलनों की घोषणाओं के बीच दुनिया की असली प्राथमिकता आंकड़ों में साफ दिखती है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि दुनिया हर साल करीब 7.3 लाख करोड़ डॉलर ऐसे निवेशों और सब्सिडियों में झोंक रही है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि प्रकृति की सुरक्षा और पुनर्जीवन पर किया जा रहा खर्च महज 22,000 करोड़ डॉलर तक सिमटा हुआ है। यह अंतर सिर्फ रकम का नहीं बल्कि उस दिशा का है, जिसमें वैश्विक वित्त व्यवस्था आज बह रही है।
यूएनईपी की स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर 2026 रिपोर्ट, जो 2023 के आंकड़ों पर आधारित है, साफ कहती है कि वैश्विक वित्त प्रणाली प्रकृति के खिलाफ काम कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रकृति को बचाने पर खर्च किए गए हर एक डॉलर के बदले दुनिया 30 डॉलर उसे नुकसान पहुंचाने में खर्च कर रही है। यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि नीति, प्राथमिकता और सोच का है। रिपोर्ट के मुताबिक हर साल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कुल 7.3 लाख करोड़ डॉलर में से करीब 4.9 लाख करोड़ डॉलर निजी क्षेत्र से आते हैं।
नेचर ट्रांजिशन एक्स-कर्व बदलाव का देता है रास्ता
इस संकट से निपटने के लिए रिपोर्ट ऐसे नीतिगत बदलावों पर जोर देती है, जो एक साथ प्रकृति की रक्षा भी करें और अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत भी बनाएं। इसी के तहत रिपोर्ट में एक नया ढांचा पेश किया गया है, जिसे ‘नेचर ट्रांजिशन एक्स-कर्व’ नाम दिया गया है। यह ढांचा सरकारों और कंपनियों को यह दिशा दिखाता है कि कैसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सब्सिडी और पुराने, विनाशकारी निवेशों को धीरे-धीरे खत्म किया जाए और उनकी जगह प्रकृति-अनुकूल निवेश को तेजी से बढ़ाया जाए। प्रणालियों, बेहतर जांच तकनीकों और आधुनिक जल शोधन प्रणालियों को अपनाने की जरूरत बताई गई है, ताकि संक्रमण फैलने से पहले ही खतरे की पहचान कर उसे रोका जा सके।
2030 तक ढाई गुना निवेश क्यों जरूरी
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर दुनिया को जलवायु संकट और जैव विविधता के पतन से बचाना है, तो 2030 तक नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस में निवेश को ढाई गुना बढ़ाकर हर साल 57,100 करोड़ डॉलर तक ले जाना होगा। दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी लगने वाली यह राशि भी वैश्विक जीडीपी का सिर्फ 0.5 फीसदी होगी यानी आर्थिक रूप से यह लक्ष्य असंभव नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति का सवाल है।