{"_id":"69b10a88bcda0428910ff987","slug":"91-growth-5-years-registrations-hit-19-6l-massive-govt-push-fuels-india-s-ev-sector-2026-03-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"EV Growth: पांच साल में 1.7 लाख से 19.6 लाख पहुंचे रजिस्ट्रेशन, जानें किन सरकारी योजनाओं से ईवी को मिली रफ्तार","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
EV Growth: पांच साल में 1.7 लाख से 19.6 लाख पहुंचे रजिस्ट्रेशन, जानें किन सरकारी योजनाओं से ईवी को मिली रफ्तार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Wed, 11 Mar 2026 12:34 PM IST
विज्ञापन
सार
India EV Growth FY25: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में ईवी रजिस्ट्रेशन लगभग दस गुना बढ़ गया है। इस तेज रफ्तार के पीछे सरकार की कई योजनाएं अहम भूमिका निभा रही हैं, जिनमें बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा देने वाली स्कीम्स शामिल हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
विज्ञापन
विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 20 में जहां करीब 1.74 लाख ईवी रजिस्ट्रेशन थे, वहीं, वित्तीय वर्ष 25 तक ये संख्या बढ़कर करीब 19.68 लाख हो गई। यानी केवल पांच वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में लगभग 91 प्रतिशत से ज्यादा की तेज वृद्धि दर्ज की गई। ये आंकड़ें सरकारी वाहन डाटाबेस वाहन पोर्टल से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। हालांकि महामारी (FY21) के दौरान थोड़ी गिरावट जरूर आई, लेकिन उसके बाद की रिकवरी ने ऑटो जगत को चौंका दिया है। 2022 में जहां 4.5 लाख गाड़ियां बिकीं, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा 16.8 लाख को पार कर गया।
साल-दर-साल बढ़ते ईवी रजिस्ट्रेशन (एक नजर में)
ये भी पढ़े: Road Accidents: महाराष्ट्र में 10 साल में सड़क दुर्घटना दर में बड़ी गिरावट, क्या वहां सड़क हादसों का जोखिम कम हुआ?
Trending Videos
साल-दर-साल बढ़ते ईवी रजिस्ट्रेशन (एक नजर में)
| वित्तीय वर्ष (FY) | ईवी रजिस्ट्रेशन (लगभग) | |
|---|---|---|
| FY20 | 1.74 लाख | EV अपनाने की शुरुआती तेजी से हुुई |
| FY21 | 1.43 लाख | महामारी के कारण हल्की गिरावट आई |
| FY22 | 4.59 लाख | बाजार में तेज रिकवरी हुई |
| FY23 | 11.83 लाख | ईवी मांग में बड़ी बढ़ोतरी |
| FY24 | 16.81 लाख | लगातार मजबूत ग्रोथ |
| FY25 | 19.68 लाख | ईवी बाजार ने नई ऊंचाई छुई |
ये भी पढ़े: Road Accidents: महाराष्ट्र में 10 साल में सड़क दुर्घटना दर में बड़ी गिरावट, क्या वहां सड़क हादसों का जोखिम कम हुआ?
विज्ञापन
विज्ञापन
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना
सरकार केवल ईवी बिक्री ही नहीं बल्कि देश में घरेलू उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। इसी दिशा में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (PLI) शुरू की गई है। यह योजना सितंबर 2021 में मंजूर हुई थी और इसका बजट लगभग 25,938 करोड़ रुपये है।इसका उद्देश्य विकासशील ऑटोमोटिव तकनीकों के उत्पादन को बढ़ाना और उद्योग में नए निवेश को आकर्षित करना है।
बैटरी निर्माण के लिए बड़ा निवेश
ईवी उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बैटरी मानी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एडवांस केमेस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए पीएलआई योजना शुरू की है। इसके लिए करीब 18,100 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। जिसका लक्ष्य भारत में 50 GWh बैटरी निर्माण क्षमता स्थापित करना है। माना जा रहा है कि इससे बैटरी आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
PM E-DRIVE योजना से मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने सितंबर 2024 में पीएम ई-ड्राइव भी शुरू की। इस योजना के लिए कुल बजट लगभग 10,900 करोड़ है और यह चार वर्षों तक लागू रहेगी। इसके तहत
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, ई-एम्बुलेंस, इलेक्ट्रिक ट्रक और इलेक्ट्रिक बसों का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन परीक्षण सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में नए ऑटो-रिक्शा परमिट पर लगी रोक: क्या है सरकार के इस बड़े फैसले की 4 अहम वजहें, समझिए पूरी मामला
रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण को भी बढ़ावा
इतना ही नहीं ईवी मोटर में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार ने नई योजना शुरू की है। इसके लिए भी करोड़ों का बजट आवंटित किया गया। इसका लक्ष्य हर साल करीब छह हजार मीट्रिक ट्रन उत्पादन क्षमता बढ़ाना है। इससे ईवी सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए सुरक्षा तंत्र
सरकार ने पीएम ई-बस सेवा पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म स्कीम भी शुरू की है। जिसका बजट करीब 3,435 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। देशभर में 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती को समर्थन देना ही इसका लक्ष्य है। यह योजना बस ऑपरेटरों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है।
भारत को ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिश
सरकार विदेशी कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रिक कार उत्पादन के लिए आकर्षित करने की योजना भी चला रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को कम से कम 4,150 करोड़ रुपये निवेश करना होगा। फिर तीसरे साल तक 25% लोकल वैल्यू एडिशन और पांचवें साल तक 50% घरेलू उत्पादन होगा। इससे भारत में ईवी उद्योग के लिए बड़ा इकोसिस्टम तैयार होने की उम्मीद है।
सरकार केवल ईवी बिक्री ही नहीं बल्कि देश में घरेलू उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। इसी दिशा में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (PLI) शुरू की गई है। यह योजना सितंबर 2021 में मंजूर हुई थी और इसका बजट लगभग 25,938 करोड़ रुपये है।इसका उद्देश्य विकासशील ऑटोमोटिव तकनीकों के उत्पादन को बढ़ाना और उद्योग में नए निवेश को आकर्षित करना है।
बैटरी निर्माण के लिए बड़ा निवेश
ईवी उद्योग की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बैटरी मानी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एडवांस केमेस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए पीएलआई योजना शुरू की है। इसके लिए करीब 18,100 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था। जिसका लक्ष्य भारत में 50 GWh बैटरी निर्माण क्षमता स्थापित करना है। माना जा रहा है कि इससे बैटरी आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
PM E-DRIVE योजना से मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने सितंबर 2024 में पीएम ई-ड्राइव भी शुरू की। इस योजना के लिए कुल बजट लगभग 10,900 करोड़ है और यह चार वर्षों तक लागू रहेगी। इसके तहत
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, ई-एम्बुलेंस, इलेक्ट्रिक ट्रक और इलेक्ट्रिक बसों का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वाहन परीक्षण सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: महाराष्ट्र में नए ऑटो-रिक्शा परमिट पर लगी रोक: क्या है सरकार के इस बड़े फैसले की 4 अहम वजहें, समझिए पूरी मामला
रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण को भी बढ़ावा
इतना ही नहीं ईवी मोटर में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार ने नई योजना शुरू की है। इसके लिए भी करोड़ों का बजट आवंटित किया गया। इसका लक्ष्य हर साल करीब छह हजार मीट्रिक ट्रन उत्पादन क्षमता बढ़ाना है। इससे ईवी सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए सुरक्षा तंत्र
सरकार ने पीएम ई-बस सेवा पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म स्कीम भी शुरू की है। जिसका बजट करीब 3,435 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। देशभर में 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती को समर्थन देना ही इसका लक्ष्य है। यह योजना बस ऑपरेटरों को भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है।
भारत को ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिश
सरकार विदेशी कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रिक कार उत्पादन के लिए आकर्षित करने की योजना भी चला रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को कम से कम 4,150 करोड़ रुपये निवेश करना होगा। फिर तीसरे साल तक 25% लोकल वैल्यू एडिशन और पांचवें साल तक 50% घरेलू उत्पादन होगा। इससे भारत में ईवी उद्योग के लिए बड़ा इकोसिस्टम तैयार होने की उम्मीद है।
कमेंट
कमेंट X