Road Accidents: महाराष्ट्र में 10 साल में सड़क दुर्घटना दर में बड़ी गिरावट, वहां सड़क हादसों का जोखिम कम हुआ?
राज्य की इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट से पता चला है कि महाराष्ट्र में 2025 में हर 10,000 गाड़ियों पर दुर्घटना की दर एक दशक में सबसे कम दर्ज किया गया। जबकि दुर्घटना की कुल संख्या थोड़ी बढ़ी है।
विस्तार
महाराष्ट्र में वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं की दर में गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रति 10,000 वाहनों पर दुर्घटनाओं की दर पिछले दस वर्षों में काफी कम हुई है।
2015 में जहां यह दर 25 थी, वहीं 2025 में घटकर 7 रह गई। यह संकेत देता है कि वाहन संख्या और सड़क नेटवर्क बढ़ने के बावजूद प्रति वाहन जोखिम कम हुआ है।
क्या कुल दुर्घटनाओं की संख्या फिर भी बढ़ी है?
हालांकि दुर्घटनाओं की दर कम हुई है, लेकिन कुल दुर्घटनाओं की संख्या में हल्की बढ़ोतरी देखी गई।
2024 में जहां कुल 36,118 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 36,450 हो गई।
इसके विपरीत मौतों की संख्या में कमी आई है। 2024 की तुलना में 2025 में 166 कम मौतें दर्ज की गईं। इससे यह संकेत मिलता है कि दुर्घटनाओं के बाद बचाव और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था बेहतर हुई है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क सुरक्षा संगठन सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक पीयूष तिवारी बताते हैं कि, दुर्घटनाओं की दर में कमी उत्साहजनक है, लेकिन इसे सावधानी से समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते वाहन संख्या के कारण दुर्घटनाओं की दर कम होने के बावजूद कुल दुर्घटनाएं और मौतें ज्यादा हो सकती हैं।
उनके मुताबिक सड़क सुरक्षा में स्थायी सुधार के लिए बेहतर सड़क डिजाइन, सख्त कानून प्रवर्तन, सुरक्षित वाहन और त्वरित ट्रॉमा केयर जैसी व्यवस्था जरूरी है।
क्या ई-चालान वसूली में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है?
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में ट्रैफिक चालान वसूली को लेकर भी चिंता जताई गई है।
2025 में लगभग 1.7 करोड़ ई-चालान जारी किए गए, लेकिन इनमें से केवल 38 लाख का ही भुगतान किया गया। करीब 1.3 करोड़ चालान अभी भी बकाया हैं।
बकाया जुर्माने की राशि भी बढ़ी है। 2023 में यह 770 करोड़ रुपये थी, जो 2024 में बढ़कर 1,095 करोड़ रुपये और 2025 में 1,344 करोड़ रुपये हो गई।
क्या जुर्माना वसूली के लिए नए उपाय सुझाए गए हैं?
आमतौर पर लंबित चालान मामलों को निपटाने के लिए लोक अदालत का सहारा लिया जाता है।
ट्रैफिक विभाग मोटर चालकों को नोटिस भेजता है और उनसे जुर्माना जमा करने या लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए कहता है।
इसके अलावा सड़क पर वाहन रोकने के दौरान भी चालान इतिहास की जांच की जाती है और मौके पर ही बकाया राशि चुकाने के लिए कहा जाता है।
राज्य ट्रैफिक विभाग ने जुर्माना वसूली सुधारने के लिए कुछ नए सुझाव भी दिए हैं। इनमें FASTag (फास्टैग) खातों से जुर्माना काटने और वाहन बीमा को ई-चालान सिस्टम से जोड़ने जैसे उपाय शामिल हैं। हालांकि इन प्रस्तावों को अभी मंजूरी नहीं मिली है।
क्या सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं?
रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
इनमें सड़क नाटक, व्याख्यान और हर साल जनवरी में आयोजित होने वाला सड़क सुरक्षा सप्ताह शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य में "वन स्टेट वन ई-चालान" प्रणाली लागू की जा रही है। जिसके तहत करीब 6,300 ई-चालान डिवाइस और 96 इंटरसेप्टर वाहन तैनात किए गए हैं।
क्या सड़क सुरक्षा में सुधार हुआ है?
आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि महाराष्ट्र में प्रति वाहन दुर्घटना दर में कमी आई है।
फिर भी कुल दुर्घटनाओं की संख्या और बड़ी संख्या में लंबित चालान यह दिखाते हैं कि सड़क सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, सख्त नियम और जागरूकता अभियान मिलकर ही सड़क सुरक्षा को मजबूत बना सकते हैं।
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