PM-eBus Sewa: 116 शहरों की सड़कों पर दौड़ेंगी 10 हजार एसी इलेक्ट्रिक बसें, जानें क्या है सरकार का प्लान
PM eBus Sewa Scheme India: केंद्र सरकार की पीएम-ई बस सेवा के तहत देश के 116 शहरों में जल्द ही 10,000 नई एसी इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने वाली हैं। यह योजना न सिर्फ आपके शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को हाई-टेक बनाएगी, बल्कि मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नए डिपो के साथ भारत के सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली रूप दे देगी।
विस्तार
देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पर्सनल कारों और स्कूटर्स के बाद अब सरकार का पूरा फोकस पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इको-फ्रेंडली और हाई-टेक बनाने पर है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की 'पीएम-ईबस सेवा' योजना के तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है। लोकसभा में भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने बताया कि देश के 20 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों के 116 शहरों में 10 हजार नई एयर-कंडीशंड इलेक्ट्रिक बसें चलाने को मंजूरी दे दी गई है। आइए समझते हैं कि इस योजना से आम आदमी के सफर और देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्या बदलाव आने वाला है।
किन शहरों में दौड़ेंगी ये स्मार्ट बसें?
इस योजना को मुख्य रूप से उन शहरों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जहां बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत है। आबादी के लिहाज से देखें तो सरकार ने 3 लाख से लेकर 40 लाख तक की जनसंख्या वाले शहरों को इसमें प्रमुखता से चुना है। हालांकि, छोटे और दूर-दराज के इलाकों की परिवहन संबंधी जरूरतों को भी अनदेखा नहीं किया गया है। यही वजह है कि 3 लाख से कम आबादी वाले कई राज्यों की राजधानियों, उत्तर-पूर्वी राज्यों के प्रमुख शहरों और पहाड़ी इलाकों को भी इस योजना का खास हिस्सा बनाया गया है।
इस कदम का सबसे बड़ा फायदा
देश के लगभग 80% शहर ऐसे होंगे, जहां पहली बार इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होगा। 30% शहरों को पहली बार एक व्यवस्थित और संगठित सिटी बस सर्विस मिलेगी।
सिर्फ बसें नहीं, चार्जिंग और डिपो पर भी है पूरा फोकस
इलेक्ट्रिक बसों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सबसे जरूरी एक मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। इसके लिए सरकार ने तगड़ी तैयारी कर ली है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए, बसों को खड़े करने (डिपो) और उनकी चार्जिंग व्यवस्था के लिए 200 से ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। इन प्रोजेक्ट्स के तहत बस डिपो बनाने के लिए 300 एकड़ से ज्यादा जमीन तय की गई है और साथ ही 500 सर्किट किलोमीटर से अधिक की हाई-टेंशन बिजली लाइनें बिछाई जाएंगी। इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए सरकार ने ₹1,254.38 करोड़ का बजट रखा है। इसमें से दिसंबर 2025 तक करीब ₹483.70 करोड़ खर्च भी किए जा चुके हैं। इस योजना की एक बड़ी खासियत यह भी है कि बसों की बिना रुकावट चार्जिंग के लिए जरूरी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने का 100 फीसदी खर्च सरकार खुद उठा रही है।
जबलपुर शहर का उदाहरण
इस योजना के तहत मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर को 200 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिली है। इन बसों को चलाने के लिए 12 फरवरी 2026 को कंपनियों के साथ एग्रीमेंट साइन हो चुका है। डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए जबलपुर को ₹10.48 करोड़ की मंजूरी भी मिल गई है। हालांकि, यहां अभी बसों का सड़कों पर उतरना बाकी है लेकिन जल्द ही शहरवासियों को इनका फायदा मिलने लगेगा।
क्या है इस पूरी योजना का लक्ष्य?
पीएम-ईबस सेवा का सीधा सा मकसद है- पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर उनकी जगह साफ, सुरक्षित और आधुनिक इलेक्ट्रिक बसें लाना। इससे न सिर्फ शहरों का प्रदूषण कम होगा, बल्कि लोगों का सफर भी आरामदायक बनेगा। साथ ही ये भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) सेक्टर को एक बहुत बड़ी रफ्तार देगा।
कमेंट
कमेंट X