Pollution: ट्रैफिक कैमरों से प्रदूषण की पहचान करेगा एआई डैशबोर्ड, CSIR-NEERI वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक
NEERI AI Pollution Dashboard: शहरों में गाड़ियों के धुएं से बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नागपुर के CSIR-NEERI ने एक स्मार्ट एआई डैशबोर्ड तैयार किया है। यह सिस्टम सीधे ट्रैफिक कैमरों से जुड़कर रीयल-टाइम में गाड़ियों की गिनती करता है और बताता है कि किस जगह पर हवा में कितना जहर घुल रहा है।
विस्तार
शहरों में लगातार बढ़ती गाड़ियों की संख्या के कारण हवा में घुलता जहर एक बड़ी समस्या बन गया है। इस समस्या से निपटने और इसे बारीकी से समझने के लिए नागपुर में मौजूद CSIR-NEERI (नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) के वैज्ञानिकों ने एक शानदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डैशबोर्ड तैयार किया है। अब ये पता लगाने के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा कि किस चौराहे पर गाड़ियों से कितना धुआं निकल रहा है। ये एआई टूल पलक झपकते ही इसका रीयल-टाइम डेटा दे देगा।
कैसे काम करता है ये एआई डैशबोर्ड?
इस टूल का नाम एआई-LSEI (एआई-इंटीग्रेटेड लाइन सोर्स एमिशन इन्वेंटरी) है। इसका काम करने का तरीका बेहद स्मार्ट और आसान है। ये शहरों में पहले से लगे सीसीटीवी या ट्रैफिक कैमरों की लाइव फीड से जुड़ जाता है। कैमरे से आ रही तस्वीरों को देखकर एआई खुद से ही सड़क से गुजरने वाली गाड़ियों को पहचानता है और उनकी गिनती करता है। इसके बाद ये सिस्टम गणना कर लेता है कि उन गाड़ियों से कुल कितना प्रदूषण पैदा हुआ है।
कौन-सी गाड़ियों को पहचान सकता है यह सिस्टम?
ये डैशबोर्ड सड़क पर चलने वाले लगभग हर तरह के वाहन को अलग-अलग कैटेगिरी में बांटकर गिन सकता है जैसे:
- टू-व्हीलर (बाइक/स्कूटर)
- थ्री-व्हीलर (ऑटो/ई-रिक्शा)
- कारें
- हल्के कमर्शियल वाहन (पिकअप आदि)
- बसें
- भारी कमर्शियल वाहन (ट्रक)
पुराने तरीकों से कैसे बेहतर है यह तकनीक?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहले प्रदूषण का आकलन करने के लिए मैन्युअल तरीके से गाड़ियां गिनी जाती थीं। उस पुराने तरीके से रिपोर्ट आने में करीब एक साल लग जाता था और तब तक सड़क पर गाड़ियों की संख्या बदल चुकी होती थी। इसके उलट नया एआई डैशबोर्ड रीयल-टाइम ट्रैफिक देखकर तुरंत सटीक नतीजे देता है।
किन गैसों पर रखता है नजर?
यह डैशबोर्ड हवा को खराब करने वाले मुख्य प्रदूषकों का सटीक अनुमान लगाता है:
- पार्टिकुलेट मैटर (PM)
- नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx)
- कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
- हाइड्रोकार्बन (HC)
कहां से आता है डेटा?
सटीक जानकारी के लिए ये सिस्टम सरकार के परिवहन पोर्टल से इंजन और ईंधन तकनीक का डेटा लेता है। साथ ही, ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के जरिए तय किए गए एमिशन मानकों का इस्तेमाल करता है। यह सारा डेटा एक GIS मैप पर दिखाई देता है। इससे शहर का प्रदूषण हॉटस्पॉट तुरंत स्क्रीन पर लाल रंग में नजर आ जाता है।
ट्रैफिक मैनेजमेंट में भी है मददगार
यह सिस्टम पूरे दिन के ट्रैफिक पैटर्न को रिकॉर्ड करता है। उदाहरण के तौर पर, सुबह ऑफिस के वक्त कितनी कारें और बाइक्स थीं और उनसे कितना प्रदूषण बढ़ा। किसी बड़े मैच या इवेंट के दौरान भी ट्रैफिक पुलिस इस डैशबोर्ड की मदद से ट्रैफिक को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकती है। इस प्रोजेक्ट को NEERI के वरिष्ठ वैज्ञानिक राहुल व्यावहारे, मुख्य वैज्ञानिक केवी जॉर्ज और उनकी टीम ने संस्थान के निदेशक एस वेंकट मोहन के मार्गदर्शन में तैयार किया है।
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