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EV Fire Risk: क्या ईवी में आग लगने का खतरा ज्यादा होता है? दुनिया भर की रिसर्च ने तोड़ दिया सबसे बड़ा भ्रम

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे Published by: Suyash Pandey Updated Sun, 14 Jun 2026 01:36 PM IST
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सार

Electric Cars Fire Risk: इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने को लेकर लोगों के मन में अक्सर डर रहता है, लेकिन दुनिया भर की कई रिसर्च इस धारणा को गलत साबित करती हैं। स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और अमेरिका की संस्थाओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की तुलना पेट्रोल और डीजल कारों से की है।

Are Electric Cars More Likely to Catch Fire Than Petrol Vehicles?
ईवी फायर रिस्क - फोटो : एआई
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विस्तार

इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) का क्रेज भारत समेत पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। लोग पेट्रोल-डीजल के महंगे खर्च और प्रदूषण से बचने के लिए इलेक्ट्रिक कारों को तेजी से अपना रहे हैं। लेकिन, नई ईवी खरीदने से पहले कई लोगों के मन में एक बड़ा डर होता है - "क्या इलेक्ट्रिक कार में जल्दी आग लग जाती है?"



अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आपको बता दें कि यह सिर्फ एक भ्रम है। सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। आइए देखते हैं कि दुनिया भर के आंकड़े क्या कहते हैं और ईवी में आग लगने की असली वजह क्या होती है।

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इलेक्ट्रिक कार की बैटरी में आग क्यों लगती है?

हम सब जानते हैं कि पेट्रोल कार में आग लगने के लिए एक छोटी सी चिंगारी ही काफी होती है, लेकिन इलेक्ट्रिक कार में आग लगने की मुख्य वजह थर्मल रनवे होती है। आसान भाषा में कहें तो, जब बैटरी के किसी सेल का तापमान अचानक बहुत तेजी से बढ़ने लगता है, तो एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है जिससे आग लग जाती है। ऐसा आमतौर पर इन 3 कारणों से होता है:

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  • 1. बैटरी बनाने में कोई तकनीकी खराबी रह गई हो।
  • 2. चार्जिंग के दौरान कोई दिक्कत आ जाए।
  • 3. किसी बड़े एक्सीडेंट में बैटरी टूट जाए और अंदर शॉर्ट-सर्किट हो जाए।


खारे पानी से भी रहता है खतरा

इलेक्ट्रिक कार की बैटरी के अंदर अगर खारा पानी चला जाए, तो भी आग लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। टेस्ला की कुछ कारों में ऐसे मामले देखे गए हैं। दरअसल, नमक वाला पानी बिजली का बहुत अच्छा सुचालक होता है। अगर यह पानी बैटरी की सील तोड़कर अंदर घुस जाए, तो शॉर्ट-सर्किट हो जाता है और बैटरी जलने लगती है।


कार कंपनियां सुरक्षा के लिए क्या कर रही हैं?

आजकल की आधुनिक इलेक्ट्रिक कारें बेहद सुरक्षित बनाई जा रही हैं। बैटरी को एक्सीडेंट में टूटने से बचाने के लिए कड़े इंतजाम किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, मर्सिडीज-बेंज की इलेक्ट्रिक G-Class में नीचे की तरफ कार्बन-फाइबर की बेहद मजबूत परत होती है। वहीं, ऑडी अपनी Q8 ई-ट्रॉन में बैटरी के चारों ओर एल्यूमिनियम का एक मजबूत ढांचा देती है ताकि एक्सीडेंट के वक्त बैटरी पूरी तरह सुरक्षित रहे।


क्या कहते हैं दुनिया भर के आंकड़े?

अलग-अलग देशों की सरकारी और स्वतंत्र संस्थाओं ने इस डर को दूर करने के लिए रिसर्च की है। इन सभी का नतीजा एक ही है- पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने की संभावना ना के बराबर है। देखिए 4 बड़े आंकड़े:

  • स्वीडन (MSB की रिपोर्ट): पेट्रोल-डीजल कारों में आग लगने की संभावना 0.08% है, जबकि ईवी में यह मात्र 0.004% है। एक रिसर्च में 6.11 लाख इलेक्ट्रिक कारों में से सिर्फ 23 कारों में आग लगने की घटना सामने आई।
  • ऑस्ट्रेलिया (ईवी फायर सेफ): वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल कार में आग लगने का चांस 0.1% है, जबकि इलेक्ट्रिक कारों में यह खतरा सिर्फ 0.0012% है।
  • नॉर्वे (FFI): इंश्योरेंस क्लेम के डेटा के अनुसार, आग लगने वाली कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक कारों का हिस्सा सिर्फ 2.3% से 4.8% के बीच ही था।
  • अमेरिका (NHTSA): खारे पानी में डूबी लगभग 3,000 से 5,000 इलेक्ट्रिक कारों की जांच की गई, जिनमें से सिर्फ 36 (0.01% से भी कम) कारों में ही आग लगने की शिकायत मिली।
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