भारत NCAP या विदेशी ग्लोबल रेटिंग?: क्रैश टेस्ट में कौन है बेहतर? जानें कैसे तय होता है कार का सुरक्षा पैमाना
NCAP Crash Test: कार खरीदते वक्त सेफ्टी रेटिंग लोगों की पहली प्राथमिकता होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत NCAP और ग्लोबल NCAP में क्या अंतर होता है? जानिए दोनों सेफ्टी टेस्ट सिस्टम की खासियत के बारे में विस्तार से...
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5 Star Safety Rating: खरीददार अब गाड़ी मे सुरक्षा रेटिंग को माइलेज और फीचर से भी ऊपर रखते हैं। इसी वजह से भारत NCAP और Global NCAP जैसे सेफ्टी टेस्ट सिस्टम चर्चा में रहते हैं। और लोग इनकी सेफ्टी रेटिंग पर भरोसा भी कर लेते हैं। इन दोनों का ही उद्देश्य कारों की सुरक्षा का आकलन करना है, लेकिन इनके काम करने का तरीका और फोकस कुछ मामलों में अलग है।
भारत NCAP क्या है ?
भारत NCAP भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की ओर से शुरू किया गया देश का अपना वाहन सुरक्षा मूल्यांकन कार्यक्रम है। इस सिस्टम में देश में बनी और बेची जाने वाली कारों की सुरक्षा को परखा जाता है। टेस्टिंग के दौरान कार की बॉडी स्ट्रक्चर, एयरबैग, सीट बेल्ट सिस्टम और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जाती है। इसकी खास बात यह है कि इसे भारतीय सड़क परिस्थितियों, ट्रैफिक पैटर्न और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
ग्लोबल NCAP क्या है?
वहीं, अगर ग्लोबल NCAP की बात करें तो यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र संगठन है, जो दुनिया के कई देशों में कारों की सुरक्षा का मूल्यांकन करता है। यह संगठन वैश्विक स्तर पर तय मानकों के अनुसार वाहनों का क्रैश टेस्ट करता है। भारत में भी ग्लोबल NCAP कई वर्षों से कारों की सुरक्षा जांच कर रहा है और इसकी रेटिंग्स ने देश में वाहन सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन दोनों में प्रमुख अंतर क्या है?
हालांकि दोनों सिस्टम का उद्देश्य सुरक्षित कारों को बढ़ावा देना ही है, लेकिन इनके कुछ बदलाव देखने को मिलता है। जो इस प्रकार हैं...
- संचालन का अंतर: भारत NCAP का संचालन भारत सरकार करती है, जबकि Global NCAP एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संगठन है।
- फोकस में अंतर: भारत NCAP भारतीय सड़कों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वाहनों का मूल्यांकन करता है। वहीं ग्लोबल NCAP दुनिया भर के लिए समान सुरक्षा मानकों पर आधारित टेस्टिंग करता है।
- टेस्टिंग अप्रोच: भारत NCAP की टेस्टिंग भारतीय जरूरतों के अनुरूप डिजाइन की गई है, जबकि ग्लोबल NCAP वैश्विक मानकों के अनुसार सभी देशों में एक समान प्रक्रिया अपनाता है।
भागीदारी का स्वरूप
भारत NCAP सरकारी पहल है, जबकि ग्लाेबल NCAP स्वतंत्र और गैर-सरकारी ढांचे के तहत काम करता है।
दोनों सिस्टम में क्या हैं समानताएं?
हालांकि अंतर होने के बाद इसमें कुछ समानताएं भी हैं, जिनके बारे में नीचे विस्तार से समझाया गया है...
- सबसे पहले, दोनों में कारों को 1 से 5 स्टार तक की सेफ्टी रेटिंग दी जाती है। ज्यादा स्टार का मतलब बेहतर सुरक्षा माना जाता है।
- इसके अलावा दोनों ही सिस्टम एडल्ट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी का अलग-अलग मूल्यांकन करते हैं।
- फ्रंटल इम्पैक्ट, साइड इम्पैक्ट जैसे प्रमुख क्रैश टेस्ट प्रोटोकॉल भी काफी हद तक समान हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि दोनों का मकसद ग्राहकों को अधिक सुरक्षित कार चुनने में मदद करना है।
सेफ्टी स्कोर कैसे तय होता है?
कारों की रेटिंग केवल स्टार के आधार पर नहीं बल्कि प्राप्त अंकों के आधार पर भी तय की जाती है।
वयस्क सुरक्षा
- 5 स्टार रेटिंग हासिल करने के लिए कार को 27 अंक लाने होते हैं।
- 4 स्टार रेटिंग के लिए कार का 22 अंक लाना जरूरी है।
- 3 स्टार रेटिंग के लिए न्यूनतम 16 अंक की आवश्यकता होती है।
बाल सुरक्षा
- बच्चों की सुरक्षा के मामले में 5 स्टार रेटिंग के लिए कार को 41 अंक स्कोर करने पड़ते हैं।
- इसी तरह 4 स्टार रेटिंग हासिल करने के लिए 35 अंक की जरूरत होती है।
- इन स्कोर के आधार पर यह आकलन किया जाता है कि दुर्घटना की स्थिति में कार यात्रियों की कितनी सुरक्षा कर सकती है।
कार खरीदते समय किस पर दें ध्यान?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कार खरीदते समय केवल स्टार रेटिंग देखना पर्याप्त नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि रेटिंग किस टेस्टिंग सिस्टम से मिली है और उस वाहन ने एडल्ट व चाइल्ड सेफ्टी में कितने अंक हासिल किए हैं। अगर कोई कार भारत NCAP या ग्लोबल NCAP में बेहतर प्रदर्शन करती है, तो यह ग्राहकों के लिए सुरक्षा के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जाता है।