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Second Hand Car Tips: पुरानी कार खरीदने से पहले जरूर करें ये जांच, वरना ओडोमीटर फ्रॉड करा सकता है बड़ा नुकसान
Wed, 29 Jul 2026 07:44 AM IST
जागृति शुक्ला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Wed, 29 Jul 2026 07:44 AM IST
सार
Second Hand Car Guide: अगर आप सेकेंड हैंड कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ कम कीमत या कम किलोमीटर देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। पुरानी कारों की खरीद-बिक्री में ओडोमीटर फ्रॉड सबसे आम धोखाधड़ी में से एक माना जाता है। कई बार कार बेचने वाले गाड़ी की चली हुई दूरी कम दिखाने के लिए ओडोमीटर से छेड़छाड़ कर देते हैं, जिससे कार कम इस्तेमाल की हुई लगती है और उसकी कीमत भी ज्यादा मिल जाती है। ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप इस तरह के फ्रॉड से बच सकते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Used Car Buying Tips: ओडोमीटर वाहन की कुल चली हुई दूरी यानी किलोमीटर बताता है। कुछ लोग कार की असली माइलेज कम दिखाने के लिए इसमें छेड़छाड़ कर देते हैं। इससे खरीदार को लगता है कि कार कम चली है, जबकि हकीकत कुछ और होती है।
सिर्फ ओडोमीटर की रीडिंग पर भरोसा न करें
अगर आपके कार का ओडोमीटर बहुत कम किलोमीटर दिखा रहा है, तो केवल उसी के आधार पर निर्णय न लें। कार की सीटों, स्टीयरिंग, गियर नॉब और पैडल की स्थिति को ध्यान से देखें। अगर ये हिस्से जरूरत से ज्यादा घिसे हुए दिखाई दें, तो यह संकेत हो सकता है कि कार वास्तव में ज्यादा चली हुई है।
सर्विस रिकॉर्ड जरूर जांचें
कार खरीदने से पहले उसका पूरा सर्विस रिकॉर्ड मांगें।
अधिकृत सर्विस सेंटर में हर सर्विस के दौरान वाहन की किलोमीटर रीडिंग दर्ज होती है। अगर रिकॉर्ड और ओडोमीटर की रीडिंग में अंतर दिखाई दे, तो सतर्क हो जाएं।
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टायर और अन्य पार्ट्स की स्थिति देखें
टायर, ब्रेक डिस्क और क्लच जैसे पार्ट्स भी कार की वास्तविक स्थिति का अंदाजा देते हैं। अगर ओडोमीटर कम किलोमीटर दिखा रहा है, लेकिन टायर काफी घिस चुके हैं, तो मामला संदिग्ध हो सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखें कि टायर बदले जा सकते हैं, इसलिए केवल इसी आधार पर फैसला न लें।
ECU का डिजिटल स्कैन कराएं
आज की अधिकांश कारों में इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) होती है। कई मामलों में वाहन की वास्तविक माइलेज ECU में सुरक्षित रहती है। किसी भरोसेमंद वर्कशॉप से ECU स्कैन करवाकर असली माइलेज की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
टेस्ट ड्राइव करना बिल्कुल न भूलें
कार खरीदने से पहले उसकी टेस्ट ड्राइव जरूर करें। अगर इंजन की आवाज सामान्य नहीं है, गियर बदलने में परेशानी होती है या सस्पेंशन से असामान्य आवाज आती है, तो संभव है कि कार ओडोमीटर में दिखाई गई रीडिंग से कहीं ज्यादा चल चुकी हो।
दस्तावेजों का मिलान जरूर करें
इंश्योरेंस, प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) और सर्विस बिल जैसे दस्तावेजों में दर्ज तारीख और किलोमीटर की जानकारी का मिलान करें। अक्सर इन दस्तावेजों से भी ओडोमीटर में की गई छेड़छाड़ का पता चल सकता है।
जल्दबाजी में सौदा करने से बचें
अगर कार की स्थिति या माइलेज को लेकर किसी भी तरह का संदेह हो, तो बिना जांच-पड़ताल के वाहन न खरीदें। ऐसी स्थिति में किसी भरोसेमंद मैकेनिक या ऑटो एक्सपर्ट से वाहन की जांच करवाना बेहतर रहेगा।
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सिर्फ ओडोमीटर की रीडिंग पर भरोसा न करें
अगर आपके कार का ओडोमीटर बहुत कम किलोमीटर दिखा रहा है, तो केवल उसी के आधार पर निर्णय न लें। कार की सीटों, स्टीयरिंग, गियर नॉब और पैडल की स्थिति को ध्यान से देखें। अगर ये हिस्से जरूरत से ज्यादा घिसे हुए दिखाई दें, तो यह संकेत हो सकता है कि कार वास्तव में ज्यादा चली हुई है।
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सर्विस रिकॉर्ड जरूर जांचें
कार खरीदने से पहले उसका पूरा सर्विस रिकॉर्ड मांगें।
अधिकृत सर्विस सेंटर में हर सर्विस के दौरान वाहन की किलोमीटर रीडिंग दर्ज होती है। अगर रिकॉर्ड और ओडोमीटर की रीडिंग में अंतर दिखाई दे, तो सतर्क हो जाएं।
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टायर और अन्य पार्ट्स की स्थिति देखें
टायर, ब्रेक डिस्क और क्लच जैसे पार्ट्स भी कार की वास्तविक स्थिति का अंदाजा देते हैं। अगर ओडोमीटर कम किलोमीटर दिखा रहा है, लेकिन टायर काफी घिस चुके हैं, तो मामला संदिग्ध हो सकता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखें कि टायर बदले जा सकते हैं, इसलिए केवल इसी आधार पर फैसला न लें।
ECU का डिजिटल स्कैन कराएं
आज की अधिकांश कारों में इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) होती है। कई मामलों में वाहन की वास्तविक माइलेज ECU में सुरक्षित रहती है। किसी भरोसेमंद वर्कशॉप से ECU स्कैन करवाकर असली माइलेज की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
टेस्ट ड्राइव करना बिल्कुल न भूलें
कार खरीदने से पहले उसकी टेस्ट ड्राइव जरूर करें। अगर इंजन की आवाज सामान्य नहीं है, गियर बदलने में परेशानी होती है या सस्पेंशन से असामान्य आवाज आती है, तो संभव है कि कार ओडोमीटर में दिखाई गई रीडिंग से कहीं ज्यादा चल चुकी हो।
दस्तावेजों का मिलान जरूर करें
इंश्योरेंस, प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) और सर्विस बिल जैसे दस्तावेजों में दर्ज तारीख और किलोमीटर की जानकारी का मिलान करें। अक्सर इन दस्तावेजों से भी ओडोमीटर में की गई छेड़छाड़ का पता चल सकता है।
जल्दबाजी में सौदा करने से बचें
अगर कार की स्थिति या माइलेज को लेकर किसी भी तरह का संदेह हो, तो बिना जांच-पड़ताल के वाहन न खरीदें। ऐसी स्थिति में किसी भरोसेमंद मैकेनिक या ऑटो एक्सपर्ट से वाहन की जांच करवाना बेहतर रहेगा।