भारत में जल्द ही नई कारों और अन्य वाहनों के लिए साइबर सिक्योरिटी (Cybersecurity) से जुड़े सख्त नियम लागू हो सकते हैं। सरकार एक ऐसे अनिवार्य अनुपालन फ्रेमवर्क पर काम कर रही है, जिसके तहत देश में बिकने वाले सभी नए वाहनों को साइबर सुरक्षा से जुड़े तय मानकों का पालन करना होगा।
Car Safety: नई कारों को हैकिंग-प्रूफ बनाना होगा जरूरी! सरकार छह महीने में लाएगी ऑटो साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क
भारत में चलने वाले नए वाहनों और कनेक्टेड कारों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। देश में बिकने वाले सभी नए वाहनों पर लागू होने वाले एक सख्त साइबर सुरक्षा अनुपालन ढांचे पर काम शुरू हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार, साइबर सुरक्षा उपायों को अनिवार्य बनाने वाला यह नया ढांचा अगले छह महीनों के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा।
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सरकार नया साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क क्यों तैयार कर रही है?
सरकार का मानना है कि आधुनिक वाहनों में बढ़ती डिजिटल तकनीक के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करना भी जरूरी हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि सरकार फिलहाल यह आकलन कर रही है कि नए नियमों में किन-किन सुरक्षा उपायों को शामिल किया जाए।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य होगा-
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नए वाहनों को हैकिंग से सुरक्षित बनाने पर जोर देना।
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देश में बिकने वाले सभी नए वाहनों के लिए साइबर सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य करना।
वाहनों के किन सिस्टम की जांच की जा रही है?
सरकार उन सभी तकनीकी फीचर्स की समीक्षा कर रही है, जिनमें वाहन से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जाता है और उसी के आधार पर वाहन को निर्देश दिए जाते हैं।
अधिकारी के मुताबिक, विशेष रूप से ऐसे सिस्टम की जांच की जा रही है-
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जहां वाहन का डेटा एकत्र किया जाता है।
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जहां उस डेटा को प्रोसेस किया जाता है।
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जहां प्रोसेस किए गए डेटा के आधार पर वाहन को निर्देश दिए जाते हैं।
इन सभी पहलुओं में साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है।
क्या पहले से चल रही कनेक्टेड कारों को भी सुरक्षित बनाया जाएगा?
सरकार केवल नई गाड़ियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहती।
अधिकारी ने बताया कि यह भी जांचा जा रहा है कि पहले से सड़क पर मौजूद कनेक्टेड वाहनों की साइबर सुरक्षा को ओवर-द-एयर (OTA) अपडेट के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है या नहीं।
ई-रिक्शा बैटरी से छेड़छाड़ का इस फैसले से क्या संबंध है?
हाल के दिनों में कुछ मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर ई-रिक्शा की बैटरियों के साथ अनधिकृत छेड़छाड़ किए जाने के मामले सामने आए थे।
सरकार ने ऐसे मोबाइल एप पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इसी घटना के बाद यह चिंता भी सामने आई कि भविष्य में अत्याधुनिक तकनीक से लैस वाहनों को भी साइबर हमलों या छेड़छाड़ का निशाना बनाया जा सकता है।
किन आधुनिक फीचर्स को लेकर सरकार सतर्क है?
सरकार विशेष रूप से उन सेमी-ऑटोनॉमस वाहनों को लेकर सतर्क है, जिनमें एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) जैसी तकनीकें मौजूद हैं।
रिपोर्ट में जिन फीचर्स का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं-
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ऑटोमैटिक पार्किंग
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ऑटोमैटिक ब्रेकिंग
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लेन असिस्ट
सरकार को आशंका है कि यदि ऐसे सिस्टम साइबर हमलों का शिकार होते हैं, तो सुरक्षा संबंधी गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं।
2030 तक ADAS को लेकर क्या अनुमान है?
रिपोर्ट में नीति आयोग के एक आकलन का भी उल्लेख किया गया है।
इसके अनुसार, 2030 तक भारत में बिकने वाले लगभग 90 प्रतिशत पैसेंजर वाहनों में एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) आधारित सुरक्षा फीचर्स होने की संभावना है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल होंगे-
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लेन डिपार्चर वार्निंग (Lane Departure Warning)
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एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल (Adaptive Cruise Control)
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ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (Automatic Emergency Braking)
वाहनों से जुटने वाले डेटा पर सरकार की क्या चिंता है?
केंद्र सरकार नई पीढ़ी के वाहनों द्वारा जुटाए जाने वाले डेटा को लेकर भी चर्चा कर रही है।
एक अन्य अधिकारी के अनुसार, आधुनिक वाहन इंटरनेट के जरिए अपनी लोकेशन साझा करते हैं और आसपास के वातावरण से जुड़ी बड़ी मात्रा में जानकारी प्रोसेस करते हैं।
सरकार यह भी जांच रही है कि वाहन निर्माता-
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यात्रियों का डेटा
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ड्राइवर से जुड़ा डेटा
को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन नियम, 2025 जैसे उपयुक्त नियमों के अनुरूप स्टोर और उपयोग कर रहे हैं या नहीं।